भाजपा-चीन भाई-भाई
देश को धर्मांधता और राष्ट्रवाद के जहर में डुबोकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पतंगबाजी और डमरू बजा रहे हैं
देश को धर्मांधता और राष्ट्रवाद के जहर में डुबोकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पतंगबाजी और डमरू बजा रहे हैं। जनता को फिर भी समझ नहीं आ रहा कि मदारी जैसे खेल दिखाकर दर्शकों को असलियत से भटका देता है, वही काम भाजपा सरकार कर रही है। मदारी तो फिर भी अपनी रोजी-रोटी के लिए यह काम करता है, उसमें पेशे के प्रति ईमानदारी होती है, जो भाजपा की मौजूदा सरकार में सिरे से नदारद दिख रही है। छह साल पहले जून 2020 में गलवान घाटी पर चीन ने अतिक्रमण की कोशिश की थी और इसमें सीमा पर तैनात भारतीय सैनिकों से झड़प हुई, जिसमें कम से कम 20 जवान शहीद हुए थे। उस समय नरेन्द्र मोदी से बिहार चुनाव में बिहार रेजीमेंट के शहीद जवानों के नाम को भुनाया था। आचार संहिता कहती है कि सेना के नाम पर वोट नहीं मांगे जा सकते, लेकिन नरेन्द्र मोदी कहां आचार-विचार की परवाह करते हैं। उन्हें केवल सत्ता और मुनाफा नज़र आता है। इसलिए अब जिस चीन को दुश्मन बताकर उसका आर्थिक बहिष्कार करने का ऐलान किया, लाल आंखें दिखाकर डराने का वादा किया, अब उसी चीन की सत्तारुढ़ कम्युनिस्ट पार्टी से भाजपा और संघ की बाकायदा बैठक हो रही है। इनकी निर्लज्जता और दुस्साहस अब इतना अधिक हो चुका है कि इसकी जानकारी सोशल मीडिया पर दी जा रही है। भाजपा जानती है कि देश का बिका हुआ मीडिया और चापलूसी में लगे पत्रकार इस बारे में कोई आलोचना नहीं करेंगे। बल्कि अब देश को बताया जाएगा कि चीन से नजदीकी बढ़ाकर प्रधानमंत्री मोदी ने कैसे मास्टर स्ट्रोक चला है। मोदी और जिनपिंग का प्लान, ट्रंप होगा परेशान, जैसी हेडलाइन्स देखने मिलें तो आश्चर्य नहीं।
पाठकों को बता दें कि मंगलवार को भाजपा के विदेश मामलों के विभाग के प्रभारी विजय चौथाई वाले ने एक पोस्ट में जानकारी दी कि सीपीसी के अंतरराष्ट्रीय विभाग (आईडीसीपीसी) की उपमंत्री सुन हैयान के नेतृत्व में सीपीसी प्रतिनिधिमंडल ने दिल्ली में भाजपा मुख्यालय का दौरा किया। इस दौरान भाजपा प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व पार्टी के महासचिव अरुण सिंह ने किया। बैठक में भारत में चीनी राजदूत जू फीहोंग भी शामिल हुए। बैठक के दौरान भाजपा और सीपीसी के बीच संचार और संवाद को बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा हुई। अब ये सवाल भाजपा से पूछा जा सकता है कि आखिर वह किस हैसियत से उस देश की सत्तारुढ़ पार्टी से संचार और संवाद बढ़ाना चाहती है, जो बार-बार हमारी सीमाओं में अतिक्रमण करता है, हमारे इलाकों पर अपना दावा ठोंकता है, और जिसने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान को मदद पहुंचाई? क्या प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भाजपा और चीन की पार्टी के बीच हुई बैठक से नावाकिफ थे? अगर नहीं, तो पहले से इस बारे में उन्होंने देश को सूचित क्यों नहीं किया। वैसे प्रधानमंत्री मोदी से अब किसी भी किस्म की ईमानदार पहल की अपेक्षा नहीं रखनी चाहिए। क्योंकि गलवान के बाद उन्होंने कहा था कि न कोई घुसा था, न हमारी जमीन गई। जबकि तथ्य है कि चीनी सेना ने हमारी जमीन का अतिक्रमण किया है और अब उसे वापस लेने की मांग शायद भारत सरकार ने छोड़ दी है।
देश के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल हजारों साल पहले के हमलों का बदला लेने के लिए आज के नौजवानों को उकसा रहे हैं, लेकिन अपनी जिम्मेदारी पूरी नहीं कर रहे। पहले कंधार तक वो आतंकवादियों को छोड़कर आए थे, और अब गलवान, पुलवामा, पहलगाम जैसे बड़े हमलों के बावजूद उनकी कोई पुख्ता रणनीति सामने नहीं आ रही है, जिससे पता चले कि हां वो वाकई धुरंधर है।
खैर, भाजपा और चीन अब भाई-भाई हैं, ये बात तो भाजपा ने ही साबित कर दी है। इधर चीन ने अपने अतिक्रमण वाले चरित्र को बरकरार रखते हुए जम्मू-कश्मीर की शक्सगाम घाटी पर अपने क्षेत्रीय दावे को दोहराया है। चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने कहा कि यह क्षेत्र चीन का हिस्सा है और 1960 के दशक में पाकिस्तान के साथ सीमा समझौते के तहत यह वैध है। उन्होंने भारत की आपत्तियों को खारिज करते हुए कहा कि चीन और पाकिस्तान को संप्रभु देशों के रूप में सीमा निर्धारण का अधिकार है। इस पर भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि शक्सगाम घाटी भारतीय क्षेत्र है और 1963 का चीन-पाकिस्तान सीमा समझौता अवैध और अमान्य है। बता दें कि पाकिस्तान ने 1963 में अवैध रूप से कब्जे वाले क्षेत्रों से 5,180 वर्ग किमी भूमि चीन को सौंप दी थी। यानी जिस जमीन पर पाकिस्तान ने जबरन हक जमा रखा है, उसे उसने चीन को सौंपा है और अब दोनों इसे सही बता रहे हैं। लेकिन ये मोदी सरकार की कमजोरी ही है कि जुबानी जमाखर्च से बात आगे नहीं बढ़ रही है। चीन अब शक्सगाम घाटी में सड़क और सैन्य बुनियादी ढांचा विकसित कर रहा है। जो भारत की सुरक्षा के लिए सही नहीं है।
सवाल ये है कि क्या गलवान के बाद जैसे मोदी सरकार चुपके से चीन के सामने झुक गई, क्या अब भी वैसा ही होगा। गलवान और पहलगाम के शहीदों के परिजनों पर इस समय क्या बीत रही होगी, ये कल्पना नहीं की जा सकती है। वे तो इसी भरोसे में थे कि भाजपा और नरेन्द्र मोदी जिस तरह भारत माता के लिए अपनी श्रद्धा दिखाते हैं, कम से कम उसकी खातिर ही दुश्मन देश के सामने कायरों की तरह झुकते नहीं।
पाठकों को याद दिला दें कि 2020 में भाजपा ने चीनी सामानों के बहिष्कार की मुहिम चलाई थी और उसे राष्ट्रवाद से जोड़ दिया था। अभी कुछ महीने पहले ही नरेन्द्र मोदी ने छोटी-छोटी आंखों वाले गणेश जी नहीं चाहिए, जैसा बयान दिया था। लेकिन हकीकत ये है कि 2020-21 में चीन से हमारा आयात 45 प्रतिशत तक बढ़कर 94.57 बिलियन डॉलर पहुंचा था। भारत-चीन के बीच कुल व्यापार 2020-21 में 86.39 बिलियन डॉलर था जो 2021-22 में बढ़कर 115.83 बिलियन डॉलर हो गया। तो फिर बहिष्कार की बात झूठी ही निकली। अब धीरे-धीरे राष्ट्रवाद का झूठ भी सामने आ रहा है।