तरणजीत सिंह संधू बने दिल्ली के 23वें उपराज्यपाल, हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने दिलाई शपथ, अमित शाह से मुलाकात की

नई जिम्मेदारी संभालने के बाद संधू ने कहा कि राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली को दुनिया की अन्य प्रमुख राजधानियों के साथ प्रतिस्पर्धा करने के लिए तैयार होना चाहिए। उन्होंने कहा, “दिल्ली हमारी राजधानी है और हमें इसे विश्व की अन्य राजधानियों के बराबर खड़ा करना होगा। हमें सबके साथ आगे बढ़ना है और हमारा ध्यान विकास पर केंद्रित होना चाहिए।”

Update: 2026-03-11 09:09 GMT
नई दिल्ली। पूर्व राजनयिक और भारतीय विदेश सेवा (आईएफएस) के वरिष्ठ अधिकारी रहे तरणजीत सिंह संधू ने बुधवार को दिल्ली के 23वें उपराज्यपाल के रूप में पद और गोपनीयता की शपथ ली। यह शपथ ग्रहण समारोह दिल्ली के लोक निवास में आयोजित किया गया, जहां दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय ने उन्हें शपथ दिलाई। समारोह में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता समेत कई गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे। संधू ने इस पद पर विनय कुमार सक्सेना का स्थान लिया है। सक्सेना को हाल ही में लद्दाख का उपराज्यपाल नियुक्त किया गया है।

अमित शाह से की मुलाकात

शपथ ग्रहण के बाद तरनजीत सिंह संधू ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच शासन, लोक सेवा और प्रशासन से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। संधू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि गृह मंत्री अमित शाह से उनके आवास पर मुलाकात करना उनके लिए सम्मान की बात थी। उन्होंने बताया कि इस बैठक में आपसी हितों से जुड़े विषयों और लोक सेवा तथा शासन से संबंधित मुद्दों पर सार्थक बातचीत हुई।

दिल्ली को वैश्विक स्तर पर विकसित करने पर जोर

नई जिम्मेदारी संभालने के बाद संधू ने कहा कि राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली को दुनिया की अन्य प्रमुख राजधानियों के साथ प्रतिस्पर्धा करने के लिए तैयार होना चाहिए। उन्होंने कहा, दिल्ली हमारी राजधानी है और हमें इसे विश्व की अन्य राजधानियों के बराबर खड़ा करना होगा। हमें सबके साथ आगे बढ़ना है और हमारा ध्यान विकास पर केंद्रित होना चाहिए। उनका मानना है कि दिल्ली को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी और आधुनिक शहर बनाने के लिए समन्वित प्रयासों की आवश्यकता है।

प्रधानमंत्री और गृह मंत्री का जताया आभार

उपराज्यपाल नियुक्त किए जाने के बाद संधू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि उन्हें दिल्ली की जनता की सेवा करने का अवसर देने के लिए वह प्रधानमंत्री के आभारी हैं। संधू ने लिखा कि प्रधानमंत्री का नेतृत्व और दूरदर्शी मार्गदर्शन उनके लिए हमेशा प्रेरणा का स्रोत रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि गृह मंत्री अमित शाह के विश्वास और मार्गदर्शन के लिए वह कृतज्ञ हैं। संधू ने आश्वासन दिया कि वह समर्पण, निष्ठा और विनम्रता के साथ दिल्ली और देश की सेवा के लिए प्रतिबद्ध रहेंगे।

समृद्ध पारिवारिक पृष्ठभूमि

तरणजीत सिंह संधू का जन्म 23 जनवरी 1963 को पंजाब के अमृतसर में हुआ था। वह एक प्रतिष्ठित और शिक्षित परिवार से संबंध रखते हैं। उनके दादा तेजा सिंह समुंद्री शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) के संस्थापकों में से एक थे और स्वतंत्रता संग्राम से भी जुड़े रहे। वहीं उनके पिता बिशन सिंह समुंद्री गुरु नानक देव विश्वविद्यालय के संस्थापक कुलपति थे, जिन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

लंबा और प्रभावशाली राजनयिक करियर

तरणजीत सिंह संधू भारतीय विदेश सेवा के 1988 बैच के अधिकारी रहे हैं और उनका राजनयिक करियर काफी लंबा और प्रभावशाली रहा है। वह संयुक्त राज्य अमेरिका से जुड़े मामलों के विशेषज्ञ माने जाते हैं और वाशिंगटन डीसी स्थित भारतीय दूतावास में कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुके हैं। संधू फरवरी 2020 से जनवरी 2024 तक अमेरिका में भारत के राजदूत के रूप में तैनात रहे। इस दौरान उन्होंने भारत-अमेरिका संबंधों को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाई। इसके अलावा वह जुलाई 2005 से फरवरी 2009 तक संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन में भी कार्यरत रहे। यह अनुभव उन्हें अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और वैश्विक मुद्दों की गहरी समझ प्रदान करता है।

राजनीति में भी रखा कदम

राजनयिक सेवा से सेवानिवृत्त होने के बाद संधू ने 2024 में सक्रिय राजनीति में भी कदम रखा था। उन्होंने पंजाब के अमृतसर लोकसभा क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा था। हालांकि उस चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा, लेकिन अब उन्हें दिल्ली के उपराज्यपाल के रूप में महत्वपूर्ण प्रशासनिक जिम्मेदारी सौंपी गई है।

नई जिम्मेदारी की शुरुआत

दिल्ली के उपराज्यपाल का पद राष्ट्रीय राजधानी के प्रशासन में बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इस पद के माध्यम से केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार के बीच समन्वय स्थापित करने की जिम्मेदारी भी निभाई जाती है। राजनयिक और प्रशासनिक अनुभव के साथ तरनजीत सिंह संधू की नियुक्ति को राजधानी के शासन और विकास से जुड़ी चुनौतियों से निपटने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि वह अपने अनुभव और दृष्टिकोण के जरिए दिल्ली को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी और आधुनिक राजधानी बनाने की दिशा में किस तरह काम करते हैं।

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