दिल्ली जिमखाना क्लब खाली करने के आदेश पर बोले तारिक अनवर, सौ साल पुरानी विरासत को बंद करना अनुचित
दिल्ली में केंद्र सरकार द्वारा दिल्ली जिमखाना क्लब को 5 जून तक परिसर खाली करने के आदेश पर कांग्रेस सांसद तारिक अनवर ने प्रतिक्रिया दी है;
नई दिल्ली। दिल्ली में केंद्र सरकार द्वारा दिल्ली जिमखाना क्लब को 5 जून तक परिसर खाली करने के आदेश पर कांग्रेस सांसद तारिक अनवर ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सरकार के फैसले को जल्दबाजी में लिया गया बताया।
कांग्रेस सांसद तारिक अनवर ने कहा कि जिमखाना क्लब का लगभग सौ साल पुराना इतिहास है और इससे समाज के विभिन्न वर्गों के लोग जुड़े हुए हैं। यह क्लब केवल एक सामाजिक संस्था नहीं, बल्कि देश की प्रशासनिक और सामाजिक विरासत का हिस्सा है। यहां बड़ी संख्या में सेवानिवृत्त अधिकारी, कर्मचारी और समाज के अन्य वर्गों के लोग आते हैं और यह उनके लिए संवाद और सामाजिक गतिविधियों का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है।
उन्होंने सवाल उठाया कि अचानक नोटिस जारी कर क्लब को खाली कराने का फैसला क्यों लिया गया और क्या वास्तव में इसे सुरक्षा कारणों से उचित ठहराया जा सकता है। सिर्फ सुरक्षा के नाम पर इतने पुराने संस्थान को बंद करना सही नहीं है। सरकार को इस मुद्दे पर सभी पक्षों से बातचीत करनी चाहिए थी और कोई संतुलित समाधान निकालना चाहिए था।
इसी दौरान कर्नाटक में चल रहे सत्ता संघर्ष को लेकर भी तारिक अनवर ने प्रतिक्रिया दी। मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री को कांग्रेस हाईकमान द्वारा तलब किए जाने पर उन्होंने कहा कि अब फैसला पार्टी नेतृत्व को ही करना है। इस मामले को लंबे समय तक टाला नहीं जा सकता और हाईकमान को जल्द कोई स्पष्ट निर्णय लेना होगा।
वहीं, असम विधानसभा में यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) विधेयक पेश किए जाने पर भी उन्होंने अपनी राय रखी। तारिक अनवर ने कहा कि यदि सरकार कोई ऐसा कानून बनाती है जो लोगों की सुरक्षा और हित में हो, तो उस पर आपत्ति करने का सवाल नहीं उठता। हालांकि, उन्होंने संकेत दिया कि किसी भी कानून को लागू करने से पहले व्यापक चर्चा और सहमति जरूरी है।
इसके अलावा, कांग्रेस सांसद ने बढ़ती महंगाई और ईंधन की कीमतों को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि डीजल, पेट्रोल, गैस और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में लगातार वृद्धि हो रही है, जिससे आम जनता पर भारी बोझ पड़ रहा है।
तारिक अनवर ने आरोप लगाया कि चुनावों के दौरान सरकार ने जानबूझकर कीमतों को नियंत्रित रखा ताकि उसका असर चुनाव परिणामों पर न पड़े। उन्होंने कहा कि अब हालात बेकाबू होते जा रहे हैं। विपक्ष पिछले कई महीनों से सरकार को इस संभावित संकट को लेकर आगाह करता रहा, लेकिन सरकार ने समय रहते कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया।