गुरुग्राम: सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षा सुधारों की मांग को लेकर चर्चा में रहे सोनम वांगचुक को आखिरकार गुरुग्राम स्थित मेदांता अस्पताल से छुट्टी मिल गई है। लंबे इलाज और चिकित्सकीय निगरानी के बाद अब उनकी सेहत में सुधार हुआ है। अस्पताल से छुट्टी मिलने की जानकारी स्वयं वांगचुक ने सोशल मीडिया पर साझा की। उन्होंने बताया कि घर लौटने से पहले वह महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देने राजघाट जाएंगे और इसके बाद अपने गृह राज्य लद्दाख के लिए रवाना होंगे। वांगचुक पिछले कुछ सप्ताह से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के कारण अस्पताल में भर्ती थे। चिकित्सकों की निगरानी में उनका उपचार चल रहा था और अब उनकी स्थिति स्थिर बताई जा रही है।
वीडियो संदेश में जताई खुशी
अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद सोनम वांगचुक ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा किया। वीडियो में वह अस्पताल के कमरे में कुर्सी पर बैठे दिखाई देते हैं और मुस्कुराते हुए अपनी सेहत में सुधार की जानकारी देते हैं। उन्होंने कहा, "आखिरकार वह दिन आ गया जब मुझे अस्पताल से छुट्टी मिल रही है। लद्दाख लौटने से पहले मैं राजघाट जाकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित करूंगा और उसके बाद अपने पहाड़ों की ओर वापस लौटूंगा। अब मैं पहले से काफी बेहतर महसूस कर रहा हूं।" उनके इस संदेश को सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में लोगों ने साझा किया और उनके शीघ्र स्वस्थ होने पर खुशी जताई।
डॉक्टरों और समर्थकों का जताया आभार
सोनम वांगचुक ने अपने वीडियो संदेश में मेदांता अस्पताल के चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों का विशेष रूप से धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि अस्पताल की पूरी टीम ने उनके उपचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों और स्टाफ की मेहनत तथा लोगों की शुभकामनाओं की बदौलत वह तेजी से स्वस्थ हो सके। इसके साथ ही उन्होंने उन सभी लोगों का भी आभार व्यक्त किया जिन्होंने आंदोलन के दौरान और अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान उनका समर्थन किया।
AND FINALLY....
— Sonam Wangchuk (@Wangchuk66) July 27, 2026
I'm being discharged from the hospital. Will be going to Rajghat to pay tribute to Mahatma Gandhi and then back to the mountains.
Thank you all and BIG THANK YOU to the wonderful team of doctors and staff at Medanta Hospital Gurgaon. pic.twitter.com/BBp5k6JY9X
26 दिनों तक रहे अनशन पर
सोनम वांगचुक छात्र आंदोलन के समर्थन में 28 जून को जंतर-मंतर पहुंचे थे। इसके बाद उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में सुधार और विभिन्न मांगों के समर्थन में भूख हड़ताल शुरू की। उनका अनशन लगातार 26 दिनों तक चला। अनशन के दौरान उनकी तबीयत बिगड़ने लगी, जिसके बाद 18 जुलाई को पुलिस उन्हें जंतर-मंतर से अस्पताल ले गई। शुरुआत में उन्हें दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर चिकित्सा सुविधा के लिए उन्हें गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल स्थानांतरित किया गया।
सरकार के आश्वासन के बाद खत्म किया अनशन
वांगचुक ने 24 जुलाई को अपना अनशन समाप्त किया। यह निर्णय सरकार की ओर से विभिन्न मांगों पर सकारात्मक पहल और बातचीत के आश्वासन के बाद लिया गया था। अनशन समाप्त होने के बाद भी चिकित्सकों ने उनकी कमजोर स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए कुछ दिनों तक अस्पताल में निगरानी में रखा। उपचार और पोषण संबंधी देखभाल के बाद उनकी स्थिति में लगातार सुधार हुआ और अब उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।
राजघाट से लद्दाख तक का सफर
अस्पताल से निकलने के बाद सोनम वांगचुक ने सबसे पहले राजघाट जाने की इच्छा जताई है। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी के सत्याग्रह और अहिंसा के विचार उनके आंदोलनों के लिए प्रेरणा रहे हैं, इसलिए वह घर लौटने से पहले गांधीजी को श्रद्धांजलि अर्पित करना चाहते हैं। इसके बाद वह अपने गृह राज्य लद्दाख लौटेंगे, जहां कुछ समय विश्राम करने के साथ-साथ आगामी सामाजिक और शैक्षणिक कार्यों की रूपरेखा तैयार करेंगे।