नई दिल्ली: अयोध्या राम मंदिर से जुड़े कथित चंदा चोरी मामले की जांच को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा निर्देश दिया है। अदालत ने मामले की जांच की निगरानी करने से इनकार कर दिया है, लेकिन जांच को निष्पक्ष, पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए विशेष जांच टीम (SIT) में एक चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) और फॉरेंसिक ऑडिटर को शामिल करने का आदेश दिया है। मुख्य न्यायाधीश (CJI) की पीठ ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट सीधे जांच की निगरानी नहीं करेगा, लेकिन यह सुनिश्चित किया जाएगा कि जांच प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे और सभी पहलुओं की निष्पक्ष तरीके से पड़ताल हो।
SIT में शामिल होंगे वरिष्ठ पुलिस अधिकारी
सुप्रीम कोर्ट ने बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से सुझाए गए अधिकारियों के नामों के आधार पर SIT का गठन किया जा रहा है। इस विशेष जांच टीम का नेतृत्व एस किरण कर रहे हैं। SIT में डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल (DIG), इंस्पेक्टर जनरल (IG) और सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (SP) स्तर के अधिकारी भी शामिल किए गए हैं। अदालत ने कहा कि वित्तीय लेन-देन से जुड़े मामले को देखते हुए टीम में विशेषज्ञों को शामिल करना जरूरी है। इसी क्रम में एक चार्टर्ड अकाउंटेंट और फॉरेंसिक ऑडिटर को भी जांच टीम का हिस्सा बनाया गया है, ताकि चंदे से जुड़े दस्तावेजों, रसीदों और वित्तीय रिकॉर्ड की तकनीकी जांच की जा सके।
सुप्रीम कोर्ट ने निगरानी की मांग ठुकराई
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से सुप्रीम कोर्ट से जांच की निगरानी करने की मांग की गई थी। हालांकि, CJI ने इस मांग को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने कहा कि जांच एजेंसियों को अपना काम करने दिया जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वह जांच की निगरानी नहीं करेगा, लेकिन यह जरूर सुनिश्चित करेगा कि जांच सही दिशा में और निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़े। कोर्ट ने SIT को जांच की प्रगति की स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद होगी।
चंदे की रसीदें वेबसाइट पर अपलोड करने की मांग
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता देवदत्त कामत ने कहा कि देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने राम मंदिर निर्माण के लिए 100 रुपये, 500 रुपये और अन्य राशि का योगदान दिया था। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ मामलों में दान की राशि कथित रूप से ट्रस्ट तक नहीं पहुंची। उन्होंने मांग की कि ट्रस्ट की सभी रसीदों को वेबसाइट पर सार्वजनिक किया जाए, जिससे पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे। इस पर CJI ने कहा कि SIT को अपनी जांच पूरी करने और रिपोर्ट पेश करने का मौका दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जाएंगे।
पहले भी SIT जांच पर हुई थी चर्चा
इस मामले में पिछली सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से कहा था कि वह नई SIT के गठन के लिए अधिकारियों के नाम सुझाए। राज्य सरकार ने इसके बाद अधिकारियों के नाम अदालत के सामने रखे। यूपी सरकार की ओर से गठित SIT पहले ही मामले में अपनी प्रगति रिपोर्ट अदालत में पेश कर चुकी है। सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल ने कहा था कि SIT गठन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और आगे के निर्देश अदालत के अनुसार लागू किए जाएंगे।
तीन सदस्यीय SIT की निगरानी पर भी हुआ था विचार
इससे पहले 20 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि राज्य सरकार को इस बात पर विचार करना चाहिए कि चल रही पुलिस जांच को उसी तीन सदस्यीय SIT की निगरानी में रखा जाए, जिसने कथित धोखाधड़ी के शुरुआती सबूत जुटाए थे। अब अदालत ने जांच को और मजबूत बनाने के लिए वित्तीय विशेषज्ञों को SIT में शामिल करने का निर्देश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि मामले में निष्पक्ष जांच और पारदर्शिता सबसे महत्वपूर्ण है।