नई दिल्लीः Delhi Excise Policy Case: दिल्ली की चर्चित आबकारी नीति मामले में आम आदमी पार्टी के प्रमुख नेताओं को मिली राहत पर अब दिल्ली हाई कोर्ट में फिर सुनवाई होगी। अदालत ने सोमवार को स्पष्ट किया कि वह सीबीआई द्वारा दायर उस चुनौती याचिका पर 16 जुलाई को सुनवाई करेगा, जिसमें ट्रायल कोर्ट द्वारा अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, दुर्गेश पाठक और अन्य आरोपियों को बरी किए जाने के फैसले को चुनौती दी गई है।
अदालत में दाखिल हुए वकालतनामे
मामले की सुनवाई जस्टिस मनोज जैन की बेंच के समक्ष हुई। अदालत ने कहा कि संबंधित नेताओं की ओर से अब वकालतनामे दाखिल कर दिए गए हैं। इससे पहले तक इन नेताओं की ओर से कोई कानूनी प्रतिनिधि अदालत में मौजूद नहीं था। पिछली सुनवाई के दौरान स्थिति अलग रही थी, क्योंकि मामले की सुनवाई कर रही पूर्व बेंच के खिलाफ आम आदमी पार्टी नेताओं ने खुला विरोध जताया था। उस समय न तो आरोपी नेता अदालत में पेश हुए थे और न ही उनके वकील सुनवाई में शामिल हुए थे।
वकीलों की हड़ताल के कारण टली सुनवाई
सोमवार को भी अदालत में सुनवाई कुछ समय के लिए प्रभावित रही, क्योंकि दिल्ली हाई कोर्ट में वकीलों की हड़ताल थी। जस्टिस मनोज जैन ने वकीलों का इंतजार किया, लेकिन स्थिति सामान्य न होने पर मामले की अगली तारीख 16 जुलाई तय कर दी। इस दौरान अदालत ने यह भी संकेत दिया कि वह मामले को नियमित प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ाएगी।
कैसे बदली बेंच?
यह मामला हाल ही में जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की बेंच से ट्रांसफर होकर जस्टिस मनोज जैन के पास पहुंचा है। दरअसल, जस्टिस शर्मा ने 14 मई को अरविंद केजरीवाल और अन्य AAP नेताओं के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू की थी। यह कार्रवाई सोशल मीडिया पर किए गए कुछ कथित अपमानजनक पोस्ट को लेकर शुरू हुई थी। अदालत का मानना था कि इन पोस्ट के जरिए न्यायपालिका की गरिमा को प्रभावित करने की कोशिश की गई।
AAP नेताओं ने लगाया था पक्षपात का आरोप
आम आदमी पार्टी के नेताओं ने जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा पर पक्षपात का आरोप लगाया था। उन्होंने अदालत से अनुरोध किया था कि वह इस मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लें। बाद में AAP नेतृत्व ने सार्वजनिक तौर पर कहा कि वे “सत्याग्रह” का रास्ता अपनाएंगे। इसी के तहत उन्होंने अदालत में पेश न होने और अपने वकीलों को भी सुनवाई में न भेजने का फैसला किया था। इस घटनाक्रम के बाद मामला दूसरी बेंच को ट्रांसफर कर दिया गया।
CBI ने मांगी थी जल्द सुनवाई
हालिया सुनवाई के दौरान सीबीआई की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता अदालत में उपस्थित हुए। उन्होंने अनुरोध किया कि गर्मियों की छुट्टियों से पहले मामले की जल्द सुनवाई की जाए और समयबद्ध कार्यक्रम तय किया जाए। हालांकि, अदालत ने इस मांग को स्वीकार नहीं किया। जस्टिस मनोज जैन ने कहा कि अदालत फिलहाल उन मामलों को प्राथमिकता दे रही है जो “जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता” से जुड़े हैं। साथ ही आगामी बकरीद अवकाश का भी हवाला दिया गया।
ट्रायल कोर्ट के फैसले पर टिकी नजर
पूरा विवाद 27 फरवरी को ट्रायल कोर्ट द्वारा दिए गए उस फैसले से जुड़ा है, जिसमें अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और अन्य 21 आरोपियों को आबकारी नीति मामले में बरी कर दिया गया था। सीबीआई ने इस फैसले को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट का रुख किया है। एजेंसी का कहना है कि ट्रायल कोर्ट ने उपलब्ध साक्ष्यों का सही मूल्यांकन नहीं किया। अब 16 जुलाई को होने वाली सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं, क्योंकि इससे यह तय होगा कि हाई कोर्ट ट्रायल कोर्ट के फैसले को बरकरार रखता है या मामले में आगे कानूनी कार्रवाई का रास्ता खुलता है।