चुनाव के बाद दिल्ली विधानसभा में फिर दिखेंगे केजरीवाल और सिसोदिया, जानिए वजह

शराब नीति मामले में अदालत से बड़ी राहत मिलने के बाद यह पहला मौका होगा जब केजरीवाल और सिसोदिया दिल्ली विधानसभा परिसर में कदम रखेंगे। हालांकि इस बार उनकी भूमिका पहले से अलग होगी, क्योंकि दिल्ली में अब भाजपा की सरकार है और आम आदमी पार्टी सत्ता से बाहर है।

Update: 2026-03-06 09:12 GMT
नई दिल्ली: दिल्ली की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल शुक्रवार को दिल्ली विधानसभा पहुंचेंगे। उनके साथ पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष राम निवास गोयल और आप नेता राखी बिडलान भी मौजूद रहेंगे। शराब नीति मामले में अदालत से बड़ी राहत मिलने के बाद यह पहला मौका होगा जब केजरीवाल और सिसोदिया दिल्ली विधानसभा परिसर में कदम रखेंगे। हालांकि इस बार उनकी भूमिका पहले से अलग होगी, क्योंकि दिल्ली में अब भाजपा की सरकार है और आम आदमी पार्टी सत्ता से बाहर है।

इन नेताओं के विधानसभा पहुंचने की मुख्य वजह ‘फांसी घर’ विवाद से जुड़े मामले में विधानसभा की विशेष प्रिविलेज कमेटी के सामने पेश होना है। इस मामले को लेकर पहले भी राजनीतिक बयानबाजी तेज रही है और अब केजरीवाल की पेशी के साथ यह विवाद फिर सुर्खियों में आ गया है।

क्या है ‘फांसी घर’ विवाद?

दिल्ली विधानसभा की एक विशेष प्रिविलेज कमेटी विधानसभा परिसर में कथित ‘फांसी घर’ के निर्माण और उस पर हुए खर्च की जांच कर रही है। आरोप है कि वर्ष 2022–23 के दौरान विधानसभा परिसर में एक ऐसे ढांचे पर लगभग 1.4 करोड़ रुपये खर्च किए गए, जिसका अस्तित्व और उद्देश्य स्पष्ट नहीं है। भाजपा नेताओं का आरोप है कि विधानसभा के नवीनीकरण के दौरान इस कमरे को लेकर कई सवाल उठे थे और इस पर हुए खर्च का स्पष्ट हिसाब नहीं दिया गया। इसी मामले की जांच के तहत प्रिविलेज कमेटी ने अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, राम निवास गोयल और राखी बिडलान को तलब किया है। कमेटी ने पहले भी इन नेताओं को बुलाया था, लेकिन उनकी अनुपस्थिति पर सवाल उठे थे। अब अदालत से राहत मिलने के बाद केजरीवाल ने कमेटी के सामने पेश होने का फैसला किया है।

तीन बजे होगी पेशी

सूत्रों के मुताबिक शुक्रवार को दोपहर तीन बजे प्रिविलेज कमेटी के सामने अरविंद केजरीवाल की पेशी तय है। मनीष सिसोदिया भी उनके साथ मौजूद रहेंगे। सिसोदिया को हाल ही में अदालत से शराब नीति मामले में सभी आरोपों से बरी किया गया है, जिसके बाद आम आदमी पार्टी इसे अपनी राजनीतिक जीत के रूप में पेश कर रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस पेशी के दौरान विधानसभा परिसर में सियासी गर्मी बढ़ सकती है।

बदले हालात में विधानसभा वापसी

यह घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि 2025 के दिल्ली विधानसभा चुनावों के बाद राजधानी की राजनीति पूरी तरह बदल चुकी है। अरविंद केजरीवाल, जो लंबे समय तक दिल्ली के मुख्यमंत्री रहे और विधानसभा के सबसे प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते थे, अब न तो सरकार में हैं और न ही विपक्ष की औपचारिक भूमिका में। दरअसल, 2025 के चुनाव में केजरीवाल और मनीष सिसोदिया दोनों ही चुनाव हार गए थे, जिसके बाद भाजपा ने दिल्ली में सरकार बनाई। ऐसे में विधानसभा परिसर में उनकी वापसी को राजनीतिक रूप से काफी अहम माना जा रहा है।

शक्ति प्रदर्शन की तैयारी

आम आदमी पार्टी के सूत्रों के अनुसार, केजरीवाल की पेशी के दौरान पार्टी के कई कार्यकर्ता विधानसभा के बाहर जुट सकते हैं। इसे पार्टी के शक्ति प्रदर्शन के रूप में भी देखा जा रहा है। आप नेताओं का कहना है कि यह मामला पूरी तरह से राजनीतिक है और भाजपा सरकार जांच के नाम पर राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश कर रही है।

शराब नीति मामले में अदालत से मिली राहत

अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया हाल ही में दिल्ली शराब नीति मामले में अदालत से बड़ी राहत मिलने के बाद फिर सक्रिय राजनीति में नजर आ रहे हैं। 27 फरवरी को राउज एवेन्यू कोर्ट ने अपने विस्तृत आदेश में कहा था कि आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं हैं। करीब 500 पन्नों के फैसले में अदालत ने दोनों नेताओं को बरी कर दिया। इस फैसले के बाद आम आदमी पार्टी ने इसे राजनीतिक साजिश की हार बताया और भाजपा तथा केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। 

जंतर-मंतर रैली में केजरीवाल का हमला

अदालत से राहत मिलने के बाद अरविंद केजरीवाल ने हाल ही में जंतर-मंतर पर एक बड़ी रैली भी की थी। इस दौरान उन्होंने केंद्र सरकार और भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा था, अगर हिम्मत है तो दिल्ली में फिर से चुनाव कराकर दिखाइए। केजरीवाल ने दावा किया था कि जनता सच्चाई जान चुकी है और अगर दोबारा चुनाव हुए तो आप फिर से मजबूती से वापसी करेगी। 

भाजपा और आप आमने-सामने

‘फांसी घर’ विवाद को लेकर भाजपा और आम आदमी पार्टी के बीच तीखा राजनीतिक टकराव देखने को मिल रहा है। भाजपा का कहना है कि विधानसभा के नवीनीकरण और उससे जुड़े खर्च में गंभीर अनियमितताओं की जांच जरूरी है। वहीं आम आदमी पार्टी इसे राजनीतिक प्रतिशोध का मामला बता रही है।

लाइव स्ट्रीमिंग की चुनौती

आप ने इस मामले को लेकर भाजपा सरकार को एक खुली चुनौती भी दी है। दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आतिशी ने कहा है कि अगर भाजपा सरकार में हिम्मत है तो अरविंद केजरीवाल की प्रिविलेज कमेटी के सामने होने वाली पेशी की पूरी कार्यवाही लाइव स्ट्रीमिंग के जरिए जनता को दिखानी चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर ऐसा होता है तो दिल्ली की जनता को खुद पता चल जाएगा कि भाजपा सरकार के पास जनता के मुद्दों से ज्यादा राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप में रुचि है।

‘गुप्त कमरे’ का दावा

आतिशी ने यह भी कहा कि आम आदमी पार्टी की सरकार के दौरान जब दिल्ली विधानसभा का नवीनीकरण किया गया था, तब एक गुप्त कमरा मिला था। उनके अनुसार उस कमरे में रस्सियां और कांच की गोलियां जैसी चीजें मिली थीं। आप का दावा है कि अंग्रेजों के शासनकाल में इस कमरे का इस्तेमाल गुप्त रूप से मौत की सजा देने के लिए किया जाता था। हालांकि भाजपा सरकार इस दावे को खारिज कर रही है।

राजनीतिक टकराव और तेज होने के आसार

दिल्ली विधानसभा में केजरीवाल की पेशी को केवल एक कानूनी प्रक्रिया नहीं, बल्कि बड़े राजनीतिक घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस मुद्दे को लेकर आप और भाजपा के बीच टकराव और तेज हो सकता है। एक ओर आम आदमी पार्टी इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बता रही है, वहीं भाजपा इसे वित्तीय अनियमितताओं की जांच का मामला बता रही है। ऐसे में दिल्ली की राजनीति में यह विवाद आने वाले दिनों में नई बहस और सियासी मुकाबले को जन्म दे सकता है।

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