Delhi: जस्टिस स्वर्ण कांता की कोर्ट में अब पेश नहीं होंगे अरविंद केजरीवाल, बोले- न्याय मिलने की उम्मीद टूटी

केजरीवाल ने अपने पत्र में लिखा कि उन्हें अब जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की अदालत से न्याय मिलने की कोई उम्मीद नहीं बची है। उन्होंने कहा, “मेरी जस्टिस स्वर्ण कांता जी से न्याय मिलने की उम्मीद टूट गई है। इसलिए मैंने महात्मा गांधी के सत्याग्रह के रास्ते पर चलने का फैसला किया है।;

Update: 2026-04-27 05:25 GMT

नई दिल्‍ली: आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने एक बड़ा और विवादास्पद फैसला लेते हुए जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की अदालत में पेश न होने का ऐलान किया है। उन्होंने इस संबंध में जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा को एक पत्र लिखकर स्पष्ट कर दिया है कि अब वह न तो व्यक्तिगत रूप से और न ही अपने वकील के माध्यम से उनकी अदालत में पेश होंगे। अपने इस निर्णय के पीछे केजरीवाल ने न्याय मिलने की उम्मीद टूटने का हवाला दिया है।

‘सत्याग्रह का रास्ता अपनाऊंगा’

केजरीवाल ने अपने पत्र में लिखा कि उन्हें अब जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की अदालत से न्याय मिलने की कोई उम्मीद नहीं बची है। उन्होंने कहा, “मेरी जस्टिस स्वर्ण कांता जी से न्याय मिलने की उम्मीद टूट गई है। इसलिए मैंने महात्मा गांधी के सत्याग्रह के रास्ते पर चलने का फैसला किया है। यह फैसला मैंने अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनकर लिया है।” हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि वह कानूनी विकल्प पूरी तरह बंद नहीं कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा के फैसले के खिलाफ अपील करने के लिए वह सुप्रीम कोर्ट जाने का अधिकार सुरक्षित रखते हैं।

हाईकोर्ट से मिली थी निराशा

दरअसल, यह पूरा मामला दिल्ली के कथित शराब घोटाले से जुड़ा हुआ है। इस मामले में केजरीवाल ने जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए केस को किसी दूसरी बेंच में ट्रांसफर करने की मांग की थी। उन्होंने अपनी याचिका में कहा था कि उन्हें निष्पक्ष सुनवाई को लेकर संदेह है। लेकिन दिल्ली हाईकोर्ट ने उनकी इस मांग को खारिज कर दिया। सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने भी इस मुद्दे पर टिप्पणी करते हुए कहा कि जज बदलने का पर्याप्त आधार नहीं है। इसके बाद केजरीवाल को अदालत से राहत नहीं मिली और उनकी याचिका खारिज कर दी गई।


वीडियो संदेश में जताई नाराजगी

हाईकोर्ट के फैसले के बाद केजरीवाल ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि उन्हें एक “झूठे केस” में फंसाया गया और जेल भेजा गया। केजरीवाल ने कहा, “मुझे एक झूठे केस में फंसाकर जेल भेजा गया। एक चुनी हुई सरकार को गलत तरीके से गिराया गया। हमें कई महीनों तक जेल में रखा गया, लेकिन आखिरकार सच की जीत हुई।” उन्होंने दावा किया कि अदालत ने उन्हें निर्दोष करार दिया और सीबीआई की जांच पर भी सवाल उठाए।

जांच एजेंसियों पर उठाए सवाल

अपने बयान में केजरीवाल ने यह भी कहा कि निचली अदालत ने सीबीआई की जांच पर गंभीर सवाल उठाए थे और जांच अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि जैसे ही यह फैसला आया, सीबीआई ने तुरंत हाईकोर्ट में इसे चुनौती दे दी। उनका कहना है कि इसके बाद यह मामला जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की अदालत में पहुंचा, जिससे उनके मन में निष्पक्षता को लेकर संदेह और बढ़ गया।

जज की निष्पक्षता पर सवाल

केजरीवाल ने अपने बयान में जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जज साहिबा ने स्वयं यह स्वीकार किया है कि वे एक ऐसे संगठन के मंचों पर जाती रही हैं, जो एक खास विचारधारा से जुड़ा हुआ है। केजरीवाल ने कहा, “आरएसएस की जिस विचारधारा वाली सरकार ने मुझ पर झूठे आरोप लगाकर मुझे जेल भेजा, जज साहिबा उस विचारधारा से जुड़े संगठन अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद के कार्यक्रमों में शामिल होती रही हैं। मैं और आम आदमी पार्टी उस विचारधारा के घोर विरोधी हैं। ऐसे में क्या उनके सामने मुझे न्याय मिल सकता है?”

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