दिल्ली गैस चैंबर बनने की ओर, 22 इलाकों में AQI 400 के पार

राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण लगातार गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है। गुरुवार को लगातार चौथे दिन शहर की हवा "बहुत खराब" श्रेणी में दर्ज की गई;

By :  Deshbandhu
Update: 2026-11-05 17:11 GMT

दिल्ली की हवा हुई और जहरीली, जहांगीरपुरी बना सबसे प्रदूषित इलाका

  • लगातार चौथे दिन 'बहुत खराब' हवा, राजधानी में सांस लेना हुआ मुश्किल
  • दिवाली से पहले बढ़ा प्रदूषण का संकट, दिल्ली में AQI खतरनाक स्तर पर
  • सांसों पर स्मॉग का पहरा, दिल्ली के कई इलाकों में AQI गंभीर श्रेणी में

नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण लगातार गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है। गुरुवार को लगातार चौथे दिन शहर की हवा "बहुत खराब" श्रेणी में दर्ज की गई। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के मुताबिक, शाम 4 बजे दिल्ली का औसत एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 369 दर्ज किया गया।

पिछले कुछ दिनों में प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ा है। सोमवार को AQI 324, मंगलवार को 350, बुधवार को 377 और गुरुवार को 369 रिकॉर्ड किया गया। विशेषज्ञों का अनुमान है कि दिवाली से पहले आने वाले दिनों में हवा की गुणवत्ता और खराब हो सकती है।

22 इलाकों में AQI 400 से ऊपर

दिल्ली के कई इलाकों में प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। शहर के 59 मॉनिटरिंग स्टेशनों में से 18 स्टेशनों पर AQI "गंभीर" श्रेणी में दर्ज किया गया। सबसे ज्यादा प्रदूषण जहांगीरपुरी और पंजाबी बाग में रिकॉर्ड किया गया, जहां AQI 456 तक पहुंच गया।

इसके अलावा रोहिणी, आईआईटी दिल्ली, डीटीयू, नरेला, विवेक विहार, अलीपुर, आरके पुरम और मुंडका समेत कई क्षेत्रों में AQI 400 से ऊपर दर्ज किया गया।

अगले कुछ दिन और मुश्किल भरे

वायु गुणवत्ता पूर्वानुमान प्रणाली के अनुसार, शुक्रवार से रविवार के बीच दिल्ली की हवा "गंभीर" श्रेणी में पहुंच सकती है। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि अगले कई दिनों तक प्रदूषण का स्तर बहुत खराब से गंभीर श्रेणी के बीच बना रह सकता है।

पराली और वाहनों का असर

विशेषज्ञों के अनुसार, दिल्ली के प्रदूषण में पराली जलाने का भी योगदान बना हुआ है। हालांकि इसके स्तर में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। दूसरी ओर, वाहनों से निकलने वाला धुआं और स्थानीय प्रदूषण स्रोत आने वाले दिनों में हवा की गुणवत्ता को और प्रभावित कर सकते हैं।

धीमी हवाएं बढ़ा सकती हैं परेशानी

पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि मौसम में बदलाव और हवाओं की रफ्तार कम होने से प्रदूषक तत्व वातावरण में फंस सकते हैं। इसके चलते वाहन, उद्योग, निर्माण गतिविधियां, कचरा जलाने और पटाखों से निकलने वाला धुआं लंबे समय तक हवा में बना रह सकता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह

प्रदूषण के बढ़ते स्तर को देखते हुए डॉक्टरों ने बच्चों, बुजुर्गों और सांस संबंधी बीमारियों से जूझ रहे लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। लोगों से अनावश्यक रूप से बाहर निकलने से बचने, मास्क का इस्तेमाल करने और सुबह-शाम खुले वातावरण में ज्यादा समय न बिताने की अपील की गई है।

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