नई दिल्ली: Tanvi Parniyani Death: राजस्थान के कोटा निवासी मुकेश परनियानी की बेटी तन्वी का करीब 14 साल लंबा इलाज आखिरकार उसकी मौत के साथ खत्म हो गया। मुकेश के मुताबिक, वह अक्टूबर 2012 में करीब दो साल की गंभीर रूप से बीमार बेटी को लेकर पहली बार दिल्ली स्थित एम्स पहुंचे थे। उन्हें उम्मीद थी कि देश के बड़े अस्पताल में इलाज मिलने के बाद उनकी बेटी सामान्य जीवन जी सकेगी। परिवार का कहना है कि वर्षों तक जांच, परामर्श और सर्जरी की उम्मीद के बीच इलाज चलता रहा, लेकिन ऑपरेशन नहीं हो सका। तन्वी की मौत 1 सितंबर 2026 को एम्स में हुई। पिता ने उपचार में कथित देरी को लेकर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष जांच और जिम्मेदारी तय करने की मांग की है। उनके आरोपों के बाद एम्स ने मामले की जांच के लिए समिति गठित कर दी है।
जन्मजात हृदय बीमारी से जूझ रही थी तन्वी
एम्स के अनुसार, तन्वी को जन्म से ही गंभीर हृदय संबंधी समस्या थी। चिकित्सकीय रिकॉर्ड में उसके दिल के निचले हिस्से के बीच छेद यानी वेंट्रिकुलर सेप्टल डिफेक्ट (VSD) और फेफड़ों तक रक्त पहुंचाने वाले रास्ते के बंद होने यानी पल्मोनरी एट्रेशिया का उल्लेख है। ऐसी जटिल स्थिति में शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाने के कारण कमजोरी और सांस संबंधी परेशानियां हो सकती हैं। मुकेश का कहना है कि 2012 से कई चरणों में उसकी जांच हुई। वर्ष 2013 में सर्जरी के लिए उसका मूल्यांकन भी किया गया। परिवार के अनुसार, 2014 में सर्जरी के लिए रकम और जरूरी दस्तावेज जमा कराए गए तथा ऑपरेशन की उम्मीद बनी। हालांकि, बाद में सर्जरी की तारीख आगे बढ़ती रही।
पिता का आरोप- तारीखें मिलती रहीं, ऑपरेशन नहीं हुआ
मुकेश के मुताबिक, सितंबर 2015 में बेटी को लेकर एम्स पहुंचने पर उन्हें बताया गया कि ऑपरेशन दीपावली के बाद होगा। इसके बाद भी परिवार अस्पताल से संपर्क करता रहा। उनका आरोप है कि कई बार जांच और परामर्श के बावजूद सर्जरी नहीं हुई। इलाज में देरी से परेशान होकर उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय में भी शिकायत की। मुकेश का दावा है कि शिकायत के बाद अस्पताल से संपर्क किया गया और सर्जरी के लिए बुलाया गया, लेकिन इसके बाद भी ऑपरेशन आगे नहीं बढ़ सका। परिवार के अनुसार, 2018 में दोबारा जांच कराई गई। इसके बाद चिकित्सकीय प्रबंधन यानी दवाओं और निगरानी के जरिए इलाज जारी रखने की बात कही गई।
2018 के बाद सर्जरी को बताया गया जटिल
एम्स के हृदय-रक्तवाहिका एवं वक्ष शल्य चिकित्सा विभाग के चिकित्सक डॉ. वी. देवगौरू के अनुसार, तन्वी की जटिल हृदय संरचना को देखते हुए 2018 में सुधारात्मक सर्जरी को संभव नहीं माना गया। इसके बाद उसका मेडिकल मैनेजमेंट किया गया। हालांकि, परिवार के पास 31 जनवरी 2014 का एक दस्तावेज भी है, जिसमें ‘यूनिफोकलाइजेशन एंड कंड्यूट’ सर्जरी की सलाह और अनुमानित खर्च दर्ज होने की बात कही गई है। यही अंतर अब जांच का अहम हिस्सा होगा कि 2014 में सर्जरी की सलाह से 2018 में सर्जरी को अनुपयुक्त मानने तक तन्वी के उपचार में क्या परिस्थितियां रहीं।
अगस्त में बिगड़ी हालत, AIIMS में हुई मौत
अगस्त 2026 में तन्वी की तबीयत बिगड़ने के बाद उसे 24 अगस्त को एम्स में भर्ती कराया गया। परिवार के अनुसार, उसे आगे की गंभीर चिकित्सा जांच के लिए अस्पताल लाया गया था। 31 अगस्त को जांच के बाद उसकी हालत बिगड़ गई। एम्स के अनुसार, 1 सितंबर की सुबह उसकी स्थिति गंभीर हुई और चिकित्सकीय प्रयासों के बावजूद उसे बचाया नहीं जा सका। अस्पताल ने मौत के घटनाक्रम से जुड़े चिकित्सकीय विवरण भी दर्ज किए हैं।
जांच समिति करेगी पूरे इलाज की समीक्षा
पिता की शिकायत और आरोपों के बाद एम्स के कार्यकारी निदेशक निखिल टंडन ने जांच समिति गठित की है। समिति तन्वी के पूरे चिकित्सकीय रिकॉर्ड, जांच रिपोर्ट, विशेषज्ञों की राय, उपचार की प्रक्रिया और मौत से जुड़े घटनाक्रम की समीक्षा करेगी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट को भी जांच का हिस्सा बनाया जाएगा।
कमेटी और पोस्टमार्टम के नतीजों का इंतजार
एम्स ने कहा कि वह दुख में डूबे परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करता है और मरीज की सुरक्षा, पारदर्शिता, सबूतों पर आधारित क्लिनिकल फैसले लेने और जवाबदेही के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराता है. संस्थान मरीज की मौत की परिस्थितियों के बारे में कोई भी अंतिम निष्कर्ष निकालने से पहले कमेटी और पोस्टमार्टम के नतीजों का इंतजार करेगा। अब जांच का सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि तन्वी के मामले में शुरुआती सर्जरी की सलाह के बाद उपचार की दिशा क्यों बदली और वर्षों के दौरान उसके इलाज से जुड़े फैसले किन चिकित्सकीय परिस्थितियों में लिए गए। समिति की रिपोर्ट से इन सवालों पर स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।