शराब की होम डिलीवरी पर काम कर रही दिल्ली सरकार : सीआईएबीसी प्रमुख
देश में कई स्थानों पर लॉकडाउन प्रतिबंधों में ढील देने के साथ ही शराब की दुकानों को खोलने का फैसला लिया गया
नई दिल्ली। देश में कई स्थानों पर लॉकडाउन प्रतिबंधों में ढील देने के साथ ही शराब की दुकानों को खोलने का फैसला लिया गया। हालांकि दुकानों के बाहर लगी लंबी लाइनें, राज्य द्वारा वसूले जा रहे अतिरिक्त कर और महाराष्ट्र जैसे कुछ राज्यों में राज्य के आधे हिस्से में बिक्री की अनुमति नहीं देने से यह खुशी अल्पकालिक साबित हुई। वहीं सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि सरकार को शराब की होम डिलीवरी करने पर विचार करना चाहिए। ऐसे में शराब संगठन कंफेडरेशन ऑफ इंडियन अल्कोहोलिक बेवरेज कंपनीज (सीआईएबीसी) ने एक कदम आगे बढ़ाते हुए, सरकार को फूड डिलीवरी एप के माध्यम से हर तक शराब पहुंचाने का सुझाव दिया।
शराब संगठन के महानिदेशक विनोद गिरि ने आईएएनएस को दिए एक साक्षात्कार में कहा कि उनका मानना है कि अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली दिल्ली सरकार राष्ट्रीय राजधानी में ऐसे विकल्पों पर सक्रिय रूप से काम कर रही है। हालांकि, उन्होंने आगे कहा कि लगाया गया 70 फीसदी टैक्स काउंटर प्रोडक्टिव साबित हो सकता है।
सवाल-जवाब
सवाल : छत्तीसगढ़ में शराब की होम डिलीवरी शुरू हुई है। अब दिल्ली में भाजपा के एक प्रवक्ता ने भी दिल्ली के लिए यही मांग की है। क्या आपको लगता है कि ऐसा होगा?
जवाब : हमारा मानना है कि कोविड महामारी हमें जीने और व्यापार करने के तरीके को बदलने के लिए मजबूर कर रही है। मनुष्य से मनुष्य की सहभागिता को कम करना वायरस के खिलाफ रणनीति का एक अनिवार्य अंश है। यह चुनौती मादक पेय पदार्थों में और भी अधिक है, जहां ग्राहकों की बड़ी संख्या की मांग को पूरा करने के लिए आउटलेट की संख्या बहुत कम है। होम डिलीवरी सिस्टम एक महत्वपूर्ण पहल है, जिससे लोगों को आउटलेट से दूर रखने में मदद मिलेगी और कोरोना के खिलाफ लड़ाई में मदद मिलेगी। आज की तकनीक के मद्देनजर दुरुपयोग की बहुत कम गुंजाइश के साथ एक मजबूत प्रणाली को लागू करना काफी आसान है और हमें लगता है कि अधिक से अधिक सरकारें इस पर गंभीरता से विचार करेंगी।
जहां तक दिल्ली का मामला है हमारा मानना है कि सरकार सक्रिय रूप से ऐसे विकल्पों पर काम कर रही है, जिससे कि दुकानों से भार कम हो सके। हमें यह देखकर खुशी हुई कि विपक्ष के नेता ने भी इसका सुझाव दिया है।
सवाल : ऐसी रिपोर्ट है कि फूड डिलीवरी एप्स शराब की होम डिलीवरी के लिए एक हिस्सा प्राप्त करने की कोशिश कर रही है। आप क्या सोचते हैं?
जवाब : समान ट्रेड स्पेस में प्रासंगिक टेक्नोलॉजी और स्थापित डिलीवरी सिस्टम की उनकी समझ को देखते हुए एप-आधारित फूड डिलिवरी कंपनियां एक अच्छी भूमिका निभा सकती हैं। हालांकि, बहुत कुछ उन मॉडलों पर निर्भर करेगा जिसे सरकार नियोजित करेगी, यानी कि क्या वे इस वर्तमान डिस्ट्रीब्यूशन प्रणाली के साथ जुड़ेंगे या नए सिरे को जोड़ेंगे।
सवाल : आधे महाराष्ट्र के जिले शराब बिक्री को मंजूरी नहीं दे रहे हैं। यह उनके राजस्व संग्रह को कितनी गंभीरता से प्रभावित कर सकता है?
जवाब : यह उद्योग के लिए चिंता की बात है। महाराष्ट्र एक बड़ा बाजार है। हम यह भी मानते हैं कि शटडाउन कोई समाधान नहीं हैं। शराब किसी भी अन्य लोकप्रिय उत्पाद से अलग नहीं है और अधिकारियों को किसी अन्य उत्पाद की तरह ही एहतियात के साथ इसकी बिक्री शुरू करनी चाहिए। यह हमारा अनुभव है कि बड़ी संख्या में आउटलेट खुले होने पर और ज्यादा देर तक खुले होने पर भीड़ जल्द खत्म होती है। इस बारे में गुरुग्राम का उदाहरण ले सकते हैं, जहां आउटलेट्स पर कोई भीड़ नहीं है और सामाजिक दूरी का भी पालन किया जा रहा है।
सवाल : एक वर्ग द्वारा यह तर्क दिया जा रहा है कि कई राज्य सरकारें राजस्व सृजन के लिए नागरिकों को नशे में धकेलने की कीमत पर शराब की दुकानें खोल रही हैं। क्या आप इसस सहमत हैं?
सवाल : शराब एक ऐसा उत्पाद है, जिसका व्यापार वैध रूप से किया जाता है। ये सभी दुकानें लॉकडाउन से पहले कानूनी रूप से ही शराब बेच रही थीं। अगर सरकारें लॉकडाउन में ढील देने के साथ अन्य आउटलेट के साथ-साथ शराब के आउटलेट खोलना शुरू कर देती हैं, तो इसमें तरजीह का सवाल कहां है? बल्कि सरकारें शराब की दुकानों पर बहुत अधिक गंभीर रही हैं, जो व्यापार के सीमित शुरूआत में स्पष्ट देखा जा सकता है। हमें यह ध्यान में रखना चाहिए कि शराब पर प्रतिबंध कई अन्य उत्पादों की तुलना में तीन सप्ताह अधिक लंबा था, इसलिए राज्य अगर शराब की दुकानों को खोलने को लेकर फैसला ले रही है तो इस पर कोई सवाल ही नहीं उठना चाहिए।
सवाल : क्या आपको लगता है कि दिल्ली में शराब पर शुल्क में 70 फीसदी की बढ़ोतरी का निर्णय काउंटरप्रोडक्टिव हो सकता है?
जवाब : हम समझते हैं कि सरकार को राजस्व की सख्त जरूरत है, लेकिन हमें लगता है कि समय के साथ इस तरह की वृद्धि काउंटरप्रो़क्टिव हो सकती है। दिल्ली की सीमा कई राज्यों के साथ लगती है, जहां कीमतें बहुत कम हैं। हमें डर है कि इस तरह के मूल्य अंतर से पड़ोसी राज्यों से शराब की अवैध तस्करी को बढ़ावा मिलेगा।
सवाल : क्या लॉकडाउन ने अवैध शराब बाजार को बढ़ावा दिया है?
जवाब : शराब पर किसी भी तरह के प्रतिबंध ने हमेशा से ही अवैध बाजार क बढ़ावा दिया है। यहां भी, शराब तस्करी और बरामदगी की कई खबरें आई हैं। स्थानीय रूप से बनाई गई अवैध शराब की भी खबरें आई हैं जो एक गंभीर स्वास्थ्य खतरा है। हमें उम्मीद है कि इसके व्यापार को जल्द से जल्द सामान्य कर दिया जाएगा, ताकि इस तरह की गैरकानूनी गतिविधियां रुकें।