मध्यप्रदेश में फर्जी मतदाता मामले में कांग्रेस की याचिका पर फैसला सुरक्षित

सर्वोच्च न्यायालय ने मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी (एमपीसीसी) के अध्यक्ष कमलनाथ द्वारा प्रदेश में भारी तादाद में फर्जी मतदाता होने का दावा करते हुए दायर याचिका पर सोमवार को फैसला सुरक्षित रख लिया

Update: 2018-10-08 22:54 GMT

नई दिल्ली। सर्वोच्च न्यायालय ने मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी (एमपीसीसी) के अध्यक्ष कमलनाथ द्वारा प्रदेश में भारी तादाद में फर्जी मतदाता होने का दावा करते हुए दायर याचिका पर सोमवार को फैसला सुरक्षित रख लिया। प्रदेश में नवंबर में विधानसभा चुनाव होने जा रहा है और कमलनाथ का दावा है कि वहां मतदाता सूची में भारी संख्या में फर्जी मतदाता मौजूद हैं। 

कांग्रेस नेता ने टेक्स्ट के रूप में मतदाता सूची मुहैया करवाने की मांग करते हुए शीर्ष अदालत में याचिका दायर की है। उनका कहना है कि टेक्स्ट रूप में मतदाता सूची उपलब्ध होने से फर्जी मतदाताओं की पहचान की जा सकती है। 

कांग्रेस नेता ने कहा कि वह राज्य की मतदाता सूची में करीब 60 लाख फर्जी मतदाताओं की पहचान कर चुके हैं। 

निर्वाचन आयोग (ईसी) ने हालांकि कमलनाथ के तर्क का प्रतिवाद करते हुए न्यायमूर्ति ए. के. सीकरी और न्यायमूर्ति अशोक भूषण की पीठ को बताया कि मतदाता सूची से 24 मतदाताओं का नाम कांग्रेस द्वारा मसले की जानकारी उन्हें देने के बाद नहीं हटाया गया बल्कि आयोग द्वारा मतदाता सूची की जांच के माध्यम से हटाया गया।

मतदाता सूची में भारी तादाद में फर्जी मतदाताओं के मौजूद होने के बारे में कांग्रेस ने आयोग को तीन जून को जानकारी दी थी। 

निर्वाचन आयोग की ओर से अदालत में पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस उस दस्तावेज पर विश्वास करती है जिसके बारे में वह जानती है कि वह सही नहीं है। उन्होंने पीठ को बताया कि यह भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 193 के तहत जानबूझकर भ्रामक दस्तावेज पेश करने का मामला बनता है। 

आयोग ने मतदाताओं की निजता का अधिकार का हवाला देते हुए टेक्स्ट रूप में मतदाता सूची मुहैया नहीं करने के अपने फैसले का बचाव किया।
 

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