कांग्रेस ने किया था धर्म के आधार पर देश का विभाजन : अमित शाह

गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्षी दल कांग्रेस पर धर्म के आधार पर देश के विभाजन का आरोप लगाते हुये आज लोकसभा में कहा कि यदि वह ऐसा नहीं करती तो सरकार को नागरिकता (संशोधन)विधेयक आज सदन में नहीं लाना पड़ता

Update: 2019-12-09 14:17 GMT

नयी दिल्ली । गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्षी दल कांग्रेस पर धर्म के आधार पर देश के विभाजन का आरोप लगाते हुये आज लोकसभा में कहा कि यदि वह ऐसा नहीं करती तो सरकार को नागरिकता (संशोधन) विधेयक आज सदन में नहीं लाना पड़ता।

Citizenship (Amendment) Bill 2019 in Lok Sabha. https://t.co/V8sumLvLiz

— Amit Shah (@AmitShah) December 9, 2019

शाह ने विधेयक सदन में पेश करने से पहले विपक्षी दलों की आपत्तियों को खारिज करते हुये कहा “जब आजादी मिली तब धर्म के आधार पर कांग्रेस पार्टी देश का विभाजन नहीं करती तो इस विधेयक की जरूरत नहीं होती।”

आजादी के वक्त अगर कांग्रेस ने धर्म के आधार पर देश का विभाजन न किया होता, तो ये बिल लाने की जरूरत ही नहीं पड़ती: गृह मंत्री श्री @AmitShah https://t.co/aiujfcTulz pic.twitter.com/Q8jJkaN7wv

— BJP (@BJP4India) December 9, 2019

उनके इतना कहते कांग्रेस तथा कई अन्य दलों के सदस्य अपने-अपने स्थान पर खड़े होकर जोर-जोर से कुछ बोलने लगे। इस पर श्री शाह ने अपना आरोप एक बार फिर दुहराते हुये कहा “हाँ, धर्म के आधार पर देश का विभाजन कांग्रेस पार्टी ने किया।”

उन्होंने कहा कि यह विधेयक तर्कसंगत वर्गीकरण के आधार पर लाया गया है। इसमें पाकिस्तान, बंगलादेश और अफगानिस्तान के हिंदू, बौद्ध, जैन, सिख, पारसी और ईसाई संप्रदायों के लोगों को भारतीय नागरिकता देने का विशेष प्रावधान इसलिए किया गया है क्योंकि ये तीनों देशों में संविधान के तहत इस्लाम को राष्ट्रीय धर्म घोषित किया गया है और वहाँ अन्य संप्रदायों के लोगों को प्रताड़ित किया जाता है।

गृह मंत्री ने कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच 1950 में नेहरू-लियाकत समझौता हुआ था जिसमें दोनों देशों ने अपने यहाँ अल्पसंख्यकों के संरक्षण का आश्वासन दिया था। हमारे यहाँ उसका पालन किया गया लेकिन पाकिस्तान और बाद में पाकिस्तान से बने बंगलादेश में उन पर अत्याचार किया गया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान और बंगलादेश में आज भी धार्मिक अल्पसंख्यकों पर अत्याचार जारी है। इसलिए “धार्मिक रूप से प्रताड़ित अल्पसंख्यकों को नागरिकता देने के लिए” यह विधेयक लाया गया है।

 शाह ने सदन को आश्वस्त किया कि इन देशों के मुसलमान भी कानून के आधार पर नागरिकता के लिए आवेदन कर सकते हैं और उनके आवेदनों पर भी प्रक्रिया के तहत विचार किया जायेगा।
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