हरियाणा में 1 अप्रैल से बढ़ सकते हैं कलेक्टर रेट, प्रॉपर्टी खरीदना होगा महंगा

हरियाणा में कलेक्टर रेट का समय-समय पर पुनर्निर्धारण किया जाता है, ताकि बाजार मूल्य के अनुरूप जमीन की सरकारी कीमत तय की जा सके। पिछले साल 1 अगस्त 2025 को कलेक्टर रेट में बदलाव किया गया था, जो 31 मार्च 2026 तक लागू रहेगा। अब नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत के साथ ही इन्हें फिर से संशोधित करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।

Update: 2026-03-22 07:45 GMT
चंडीगढ़ : Land Collector Rates Hike in Haryana: हरियाणा में जमीन और प्रॉपर्टी से जुड़े लेनदेन पर जल्द ही बड़ा असर पड़ सकता है। राज्य सरकार 1 अप्रैल से कलेक्टर रेट (सर्किल रेट) में बढ़ोतरी की तैयारी कर रही है। इसके लिए प्रदेश की 143 तहसीलों और उप-तहसीलों में नए सिरे से प्रस्ताव तैयार किए जा रहे हैं। शुरुआती संकेतों के मुताबिक, सोनीपत, गुरुग्राम, झज्जर और फरीदाबाद जैसे तेजी से विकसित हो रहे क्षेत्रों में कलेक्टर रेट में सबसे ज्यादा वृद्धि देखने को मिल सकती है।

हर साल होता है संशोधन, इस बार भी तैयारी तेज

हरियाणा में कलेक्टर रेट का समय-समय पर पुनर्निर्धारण किया जाता है, ताकि बाजार मूल्य के अनुरूप जमीन की सरकारी कीमत तय की जा सके। पिछले साल 1 अगस्त 2025 को कलेक्टर रेट में बदलाव किया गया था, जो 31 मार्च 2026 तक लागू रहेगा। अब नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत के साथ ही इन्हें फिर से संशोधित करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इससे पहले भी राज्य में कलेक्टर रेट में कई बार उल्लेखनीय बढ़ोतरी की गई है। अगस्त 2025 में जहां औसतन 5 प्रतिशत वृद्धि की गई थी, वहीं कुछ क्षेत्रों में यह बढ़ोतरी 80 प्रतिशत तक पहुंच गई थी। दिसंबर 2024 में भी 10 से 58 प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज की गई थी।

किन क्षेत्रों में ज्यादा बढ़ोतरी की संभावना?

सूत्रों के अनुसार, एनसीआर से सटे और तेजी से शहरीकरण वाले जिलों जैसे गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत और झज्जर में कलेक्टर रेट में अधिक बढ़ोतरी की संभावना है। इन क्षेत्रों में रियल एस्टेट की मांग लगातार बढ़ रही है, जिसके चलते बाजार दर और सरकारी दर के बीच अंतर बढ़ गया है। सरकार इस अंतर को कम करने के लिए रेट बढ़ाने की दिशा में कदम उठा रही है। हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि वृद्धि को संतुलित रखने की कोशिश की जाएगी, ताकि आम खरीदारों पर अचानक अधिक आर्थिक बोझ न पड़े।

प्रॉपर्टी खरीदना होगा महंगा

कलेक्टर रेट बढ़ने का सीधा असर प्रॉपर्टी खरीदने वालों पर पड़ेगा। दरअसल, स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन शुल्क कलेक्टर रेट के आधार पर तय किए जाते हैं। ऐसे में जैसे ही कलेक्टर रेट बढ़ेंगे, प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन का खर्च भी बढ़ जाएगा। इसका मतलब है कि घर, प्लॉट या जमीन खरीदने वाले लोगों को पहले की तुलना में ज्यादा रकम चुकानी पड़ेगी। खासकर मध्यम वर्ग और पहली बार घर खरीदने वालों के लिए यह बढ़ोतरी चुनौतीपूर्ण हो सकती है।

किसानों और विक्रेताओं को होगा फायदा

जहां एक ओर खरीदारों पर अतिरिक्त बोझ बढ़ेगा, वहीं दूसरी ओर जमीन बेचने वाले किसानों और प्रॉपर्टी मालिकों को इसका फायदा मिलेगा। कलेक्टर रेट बढ़ने से उनकी जमीन की न्यूनतम सरकारी कीमत बढ़ जाएगी, जिससे उन्हें बेहतर सौदा मिलने की संभावना रहेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में जमीन बेचने वालों को आर्थिक लाभ मिल सकता है।

सरकार के राजस्व में लगातार इजाफा

कलेक्टर रेट में वृद्धि का एक प्रमुख उद्देश्य सरकार के राजस्व को बढ़ाना भी होता है। पिछले तीन वित्तीय वर्षों के आंकड़े इस बात की पुष्टि करते हैं कि जमीन रजिस्ट्रियों से राज्य सरकार की आय में लगातार वृद्धि हुई है।

  • 2023-24: स्टांप ड्यूटी से ₹8883 करोड़, रजिस्ट्रेशन से ₹600 करोड़
  • 2024-25: स्टांप ड्यूटी से ₹10,313 करोड़, रजिस्ट्रेशन से ₹667 करोड़
  • 2025-26: स्टांप ड्यूटी से ₹12,322 करोड़, रजिस्ट्रेशन से ₹777 करोड़
इन आंकड़ों से साफ है कि कलेक्टर रेट में बढ़ोतरी से सरकारी खजाने को बड़ा फायदा हुआ है और यही रुझान आगे भी जारी रहने की संभावना है।

संतुलन बनाने की चुनौती

हालांकि सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वह राजस्व बढ़ाने और आम जनता पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ के बीच संतुलन बनाए। यदि कलेक्टर रेट बहुत ज्यादा बढ़ाए जाते हैं, तो इससे प्रॉपर्टी बाजार में मंदी भी आ सकती है, क्योंकि खरीदार पीछे हट सकते हैं। इसी वजह से अधिकारी यह दावा कर रहे हैं कि इस बार वृद्धि को “संतुलित” रखा जाएगा, ताकि बाजार की गति भी बनी रहे और राजस्व भी प्रभावित न हो।

रियल एस्टेट बाजार पर होगा असर

हरियाणा में 1 अप्रैल से प्रस्तावित कलेक्टर रेट वृद्धि का असर रियल एस्टेट बाजार पर व्यापक रूप से पड़ेगा। जहां इससे प्रॉपर्टी खरीदना महंगा होगा, वहीं जमीन बेचने वालों और सरकार के राजस्व को लाभ मिलेगा। अब नजर इस बात पर है कि सरकार वृद्धि को किस स्तर तक सीमित रखती है और इसका आम जनता पर कितना प्रभाव पड़ता है।

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