केसी त्यागी ने थामा RLD का दामन: JDU से इस्तीफे के बाद जयंत चौधरी के साथ नई पारी की शुरुआत

केसी त्यागी ने हाल ही में JDU से इस्तीफा दिया था। उन्होंने पार्टी छोड़ने की वजह बताते हुए कहा था कि संगठन में संवाद की कमी है और विस्तार की संभावनाएं सीमित हो गई हैं। लंबे समय तक पार्टी के प्रमुख प्रवक्ता और रणनीतिकार रहे त्यागी का यह फैसला राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ था।

Update: 2026-03-22 09:58 GMT

नई दिल्‍ली: KC Tyagi Joins RLD: जनता दल यूनाइटेड (JDU) के वरिष्ठ और लंबे समय तक पार्टी की रणनीति का अहम चेहरा रहे केसी त्यागी ने अब अपने राजनीतिक सफर की नई शुरुआत कर दी है। उन्होंने राष्ट्रीय लोकदल (RLD) का दामन थाम लिया है। पार्टी अध्यक्ष जयंत चौधरी की मौजूदगी में उन्हें औपचारिक रूप से RLD में शामिल कराया गया। यह कदम ऐसे समय पर आया है जब उत्तर प्रदेश की राजनीति 2027 विधानसभा चुनाव की ओर बढ़ रही है।

JDU से दूरी, संवाद की कमी बना कारण

केसी त्यागी ने हाल ही में JDU से इस्तीफा दिया था। उन्होंने पार्टी छोड़ने की वजह बताते हुए कहा था कि संगठन में संवाद की कमी है और विस्तार की संभावनाएं सीमित हो गई हैं। लंबे समय तक पार्टी के प्रमुख प्रवक्ता और रणनीतिकार रहे त्यागी का यह फैसला राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ था। उनके इस्तीफे के बाद से ही यह कयास लगाए जा रहे थे कि वह किसी नए राजनीतिक मंच से जुड़ सकते हैं। RLD द्वारा दिया गया निमंत्रण इस दिशा में निर्णायक साबित हुआ।

RLD में शामिल होते ही जयंत चौधरी की तारीफ

RLD में शामिल होने के बाद केसी त्यागी ने जयंत चौधरी के नेतृत्व की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि वह किसी पद या चुनाव लड़ने की इच्छा से पार्टी में नहीं आए हैं, बल्कि उनका उद्देश्य जयंत चौधरी को मजबूत करना है। त्यागी ने कहा, “मैं लोकसभा और राज्यसभा दोनों का सदस्य रह चुका हूं। अब मैं सांसद या विधायक बनने नहीं आया हूं। मैं जयंत चौधरी को चौधरी चरण सिंह जैसा बनते देखना चाहता हूं।” उन्होंने आगे कहा कि वह ऐसा दिन देखना चाहते हैं जब जयंत चौधरी राष्ट्रीय राजनीति में इतनी मजबूत स्थिति में हों कि प्रधानमंत्री पद के चयन में उनकी निर्णायक भूमिका हो, जैसा कि कभी चौधरी चरण सिंह के समय हुआ था।

मुस्लिम प्रतिनिधित्व पर भी दिया जोर

अपने बयान में केसी त्यागी ने राष्ट्रीय लोकदल को मुसलमानों की प्रतिनिधि पार्टी भी बताया। उन्होंने कहा कि आज़ाद भारत में उत्तर प्रदेश में जितने मुस्लिम सांसद चौधरी चरण सिंह के दौर में बने, उतने किसी अन्य नेता के समय में नहीं बने। त्यागी ने स्पष्ट किया कि वह अपने अनुभव और शेष राजनीतिक समय को RLD और जयंत चौधरी को मजबूत करने में लगाना चाहते हैं। उन्होंने यह भी साफ किया कि वह पार्टी में किसी पद की अपेक्षा से नहीं आए हैं।


RLD को मजबूत करने की रणनीति

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर भी केसी त्यागी ने अपनी सोच स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि वह चाहते हैं कि अगले चुनाव तक RLD इतनी मजबूत स्थिति में पहुंच जाए कि मुख्यमंत्री पद को लेकर निर्णय लेने में जयंत चौधरी की अहम भूमिका हो। उनके इस बयान से साफ है कि वह RLD को सिर्फ एक क्षेत्रीय दल के रूप में नहीं, बल्कि राज्य की सत्ता में निर्णायक ताकत के रूप में देखना चाहते हैं।

RLD का निमंत्रण बना टर्निंग पॉइंट

JDU से इस्तीफा देने के बाद RLD ने तुरंत केसी त्यागी को पार्टी में शामिल होने का न्योता दिया था। इसके बाद से ही उनके RLD में शामिल होने की संभावना जताई जा रही थी। अंततः उन्होंने इस प्रस्ताव को स्वीकार करते हुए नई राजनीतिक पारी की शुरुआत की। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है that त्यागी का अनुभव और संगठनात्मक समझ RLD के लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकती है, खासकर ऐसे समय में जब पार्टी अपने विस्तार की कोशिश कर रही है।

1989 में बने थे सांसद

केसी त्यागी, जिनका पूरा नाम किशन चंद त्यागी है, उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने 1970 के दशक में राजनीति में कदम रखा और करीब पांच दशकों तक सक्रिय राजनीति में अपनी मजबूत पहचान बनाई। वह 1989 में पहली बार हापुड़ लोकसभा सीट से सांसद चुने गए थे। उन्होंने कांग्रेस के उम्मीदवार बुध प्रिया मौर्य को 33,254 वोटों से हराया था। इसके बाद उन्होंने कई अहम राजनीतिक भूमिकाएं निभाईं और राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई। उन्हें बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का करीबी भी माना जाता रहा है, जिससे उनकी JDU में मजबूत पकड़ का अंदाजा लगाया जा सकता है।

UP की राजनीति में नए समीकरणों के संकेत

केसी त्यागी का RLD में शामिल होना उत्तर प्रदेश की राजनीति में नए समीकरणों के संकेत दे रहा है। यह कदम न सिर्फ RLD को अनुभव का लाभ देगा, बल्कि विपक्षी राजनीति में भी नई हलचल पैदा कर सकता है। अब सभी की नजर इस बात पर होगी कि केसी त्यागी का अनुभव और जयंत चौधरी का नेतृत्व मिलकर RLD को 2027 के चुनावों में किस मुकाम तक पहुंचा पाता है।

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