कांग्रेस के बागी विधायकों की पत्रकार वार्ता से फिर शुरू हुआ आरोप प्रत्यारोप का दौर

विधायक पद से त्यागपत्र देने वाले मध्यप्रदेश कांग्रेस के लगभग 20 विधायकों द्वारा आज बंगलूर में मीडिया के समक्ष आकर कमलनाथ सरकार पर आरोप लगाने के बाद राज्य के नेताओं की प्रतिक्रियाएं आने लगी हैं।

Update: 2020-03-17 12:15 GMT

भोपाल। विधायक पद से त्यागपत्र देने वाले मध्यप्रदेश कांग्रेस के लगभग 20 विधायकों द्वारा आज बंगलूर में मीडिया के समक्ष आकर कमलनाथ सरकार पर आरोप लगाने के बाद राज्य के नेताओं की प्रतिक्रियाएं आने लगी हैं।

विधानसभा में विपक्ष के नेता गोपाल भार्गव ने कहा कि कांग्रेस के विधायकों ने मीडिया के समक्ष साफतौर पर कांग्रेस सरकार पर आरोप लगाए हैं। इससे हमारी (भाजपा की) बात पुष्ट हाे रही है कि राज्य में सत्तारूढ़ दल कांग्रेस के पास अब बहुमत नहीं है। अब उसे सरकार में रहने का हक भी नहीं है।

श्री भार्गव ने कहा कि कांग्रेस विधायकों ने साफतौर पर कहा है कि उन्हें बंधक नहीं बनाया गया है। वे स्वेच्छा से आए हैं। ये विधायक बंगलूर से मध्यप्रदेश भी आना चाहते हैं और उन्होंने इसके लिए केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल की सुरक्षा की मांग की है। उन्होंने कहा कि राज्य की कमलनाथ सरकार बहुमत साबित करने से भी बच रही है, क्योंकि उनके पास बहुमत नहीं है।

दूसरी ओर राज्य के जनसंपर्क मंत्री पी सी शर्मा ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि इन विधायकों को भोपाल में आकर अपनी बात करना चाहिए। उन्हाेंने आरोप दोहराया कि इन विधायकों को बंगलूर में बंधक बनाया गया है। हालाकि केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल की सुरक्षा मुहैया कराने संबंधी सवालों का वे जवाब स्पष्ट जवाब नहीं दे पाए।

बंगलूर में पिछले कुछ दिनों से मौजूद लगभग 22 कांग्रेस विधायकों ने आज मीडिया के समक्ष आकर कमलनाथ सरकार पर जमकर आरोप लगाए। इन विधायकों ने कहा कि श्री कमलनाथ ने शुरू से ही उनकी उपेक्षा की और सारे काम छिंदवाड़ा में ही कराए। सरकार ने कांग्रेस के वचनपत्र के अनुरूप भी कदम नहीं उठाए। इन विधायकों ने कहा कि वे अपने नेता श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ हैं और उन्हें बंगलूर में बंधक भी नहीं बनाया गया है।

अलबत्ता कुछ विधायकों ने यह जरुर कहा कि वे भाजपा में जाने के बारे में विचार करेंगे। इन 22 विधायकों में से छह के त्यागपत्र विधानसभा अध्यक्ष एन पी प्रजापति ने स्वीकार कर लिए हैं। शेष विधायकों के बारे में मंगलवार सुबह तक निर्णय नहीं हो सका।

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