आरबीआई के हस्तक्षेप से 22 पैसे मजबूत हुआ रुपया

नई दिल्ली, भारतीय रुपया सोमवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 22 पैसे मजबूत होकर 94.75 पर कारोबार करता दिखाई दिया।;

By :  IANS
Update: 2026-10-19 06:31 GMT

नई दिल्ली, भारतीय रुपया सोमवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 22 पैसे मजबूत होकर 94.75 पर कारोबार करता दिखाई दिया। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से दबाव बने रहने के बावजूद भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के हस्तक्षेप ने घरेलू मुद्रा को सहारा दिया।

इससे पहले दिन में रुपया डॉलर के मुकाबले अपने पिछले बंद स्तर 94.97 की तुलना में 8 पैसे मजबूत होकर 94.89 पर खुला था।

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, रुपया फिलहाल 95 प्रति डॉलर के स्तर के आसपास बना हुआ है, जिसे आरबीआई की एक तरह की 'सॉफ्ट डिफेंस लाइन' माना जा रहा है। उनका कहना है कि केंद्रीय बैंक द्वारा लगातार डॉलर की बिक्री किए जाने से रुपए में अधिक कमजोरी आने से रोका जा रहा है।

पिछले सप्ताह रुपया लगभग चार वर्षों का अपना सर्वश्रेष्ठ साप्ताहिक प्रदर्शन दर्ज करने में सफल रहा था। केंद्रीय बैंक के समर्थन और स्पॉट मार्केट में हस्तक्षेप से घरेलू मुद्रा को मजबूती मिली थी।

आरबीआई ने रुपए को समर्थन देने के लिए विदेशी मुद्रा बाजार में अपनी सक्रियता बढ़ाई है। रुपए पर कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और पूंजी निकासी का लगातार दबाव बना हुआ है।

बाजार विशेषज्ञों ने बताया कि विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने अक्टूबर में 16 अक्टूबर तक कुल 54,636 करोड़ रुपए की बिकवाली की है, जो सितंबर के पूरे महीने की तुलना में अधिक है।

हालांकि, पिछले कुछ दिनों में एफआईआई की बिकवाली की रफ्तार कम हुई है और 16 अक्टूबर को वे मामूली शुद्ध खरीदार भी बने थे।

विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिकी 10 वर्षीय बॉन्ड यील्ड का 5.3 प्रतिशत से ऊपर के स्तर से घटकर 5.08 प्रतिशत पर आना और रुपए का 95 प्रति डॉलर से नीचे मजबूत होना, एफआईआई के रुख में अस्थायी बदलाव के प्रमुख कारण हैं।

उन्होंने कहा कि यह बदलाव फिलहाल रणनीतिक (टैक्टिकल) अधिक और संरचनात्मक (स्ट्रक्चरल) कम दिखाई देता है।

एफआईआई अभी भी वित्तीय और तेल क्षेत्र के शेयरों में बिकवाली कर रहे हैं, जबकि डिजिटल प्लेटफॉर्म, मनोरंजन, रेस्तरां और हेल्थकेयर जैसी उपभोक्ता सेवा कंपनियों में उनकी खरीदारी देखने को मिली है।

पिछले सप्ताह निफ्टी में दर्ज 2.77 प्रतिशत की तेज बढ़त के कारण एफआईआई को कुछ शॉर्ट कवरिंग भी करनी पड़ी, जिससे बैंकिंग शेयरों को मजबूती मिली। बैंकिंग शेयर हाल के समय में विदेशी निवेशकों की बिकवाली का सबसे अधिक दबाव झेल रहे थे।

इस बीच, कच्चे तेल की कीमतें बाजार के लिए अब भी एक महत्वपूर्ण चिंता बनी हुई हैं। शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड मई के बाद पहली बार 110 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया था। हालांकि सोमवार को इसमें 1 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई और यह करीब 108 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर कारोबार करता दिखाई दिया।

विश्लेषकों के अनुसार, कच्चे तेल की कीमतों में यह नरमी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा रूस से जुड़े नए प्रतिबंधों और रूसी उत्पादों पर प्रस्तावित शुल्कों में छूट देने के फैसले के बाद आई। इससे वैश्विक बाजार में रूसी ईंधन आपूर्ति बढ़ने की संभावना बनी है।

Tags:    

Similar News