कोविड के बाद भारत का विदेशी निवेश, वैश्विक रुझान के विपरीत रही थी तेजी

नई दिल्ली, भारत का बाहरी देशों में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (आउटवर्ड एफडीआई) कोविड-19 के बाद के दौर में तेजी से बढ़ा है, जबकि इसके विपरीत दुनिया भर में विदेशी निवेश में गिरावट देखी जा रही है। मंगलवार को जारी बैंक ऑफ बड़ौदा की एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई।;

By :  IANS
Update: 2026-06-24 08:04 GMT

नई दिल्ली, भारत का बाहरी देशों में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (आउटवर्ड एफडीआई) कोविड-19 के बाद के दौर में तेजी से बढ़ा है, जबकि इसके विपरीत दुनिया भर में विदेशी निवेश में गिरावट देखी जा रही है। मंगलवार को जारी बैंक ऑफ बड़ौदा की एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई।

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत का आउटवर्ड एफडीआई वित्त वर्ष 2025 में बढ़कर 42 अरब डॉलर पहुंच गया, जो वित्त वर्ष 2024 में 25 अरब डॉलर था। इसके बाद वित्त वर्ष 2026 में यह और बढ़कर 47 अरब डॉलर हो गया। यह कोविड-19 के बाद भारतीय कंपनियों के विदेशी निवेश में तेज और मजबूत यू-आकार की रिकवरी को दर्शाता है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय कंपनियां अब प्रत्यक्ष स्वामित्व के जरिए विदेशी बाजारों में अपनी मौजूदगी बढ़ाना चाहती हैं। इससे यह साफ संकेत मिलता है कि भारतीय कंपनियां दूसरे देशों में विस्तार करने और वहां उपलब्ध अवसरों का लाभ उठाने के लिए अधिक सक्रिय हो रही हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, पूरी तरह स्वामित्व वाली सहायक कंपनियों (व्हॉली ओन्ड सब्सिडियरी) के जरिए निवेश का हिस्सा भी काफी बढ़ा है। इसके साथ ही आउटवर्ड एफडीआई में इक्विटी निवेश का हिस्सा वित्त वर्ष 2017 के 31 प्रतिशत से बढ़कर वित्त वर्ष 2026 में 42 प्रतिशत हो गया है।

बैंक ऑफ बड़ौदा की अर्थशास्त्री दिपन्विता मजूमदार ने कहा कि क्षेत्रवार आंकड़ों से पता चलता है कि वित्तीय सेवाओं का हिस्सा भारत के आउटवर्ड एफडीआई में सबसे बड़ा है।

उन्होंने कहा कि यह दर्शाता है कि भारतीय कंपनियां पारंपरिक पूंजी-आधारित विनिर्माण क्षेत्र की तुलना में ज्ञान आधारित और आईटी से जुड़ी सेवाओं को अधिक प्राथमिकता दे रही हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि गुजरात इंटरनेशनल फाइनेंस टेक-सिटी (गिफ्ट सिटी) का बढ़ता महत्व भी इस रुझान में अहम योगदान दे रहा है। साथ ही, विकसित अर्थव्यवस्थाओं में भारत के आउटवर्ड एफडीआई की हिस्सेदारी अभी अपेक्षाकृत कम है।

इस वजह से भविष्य में नए व्यापार और निवेश समझौतों के जरिए विदेशी निवेश बढ़ाने की काफी संभावनाएं मौजूद हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, गारंटी को छोड़कर भारत का आउटवर्ड एफडीआई वित्त वर्ष 2026 में 28 अरब डॉलर रहा। वहीं, विदेशी निवेश में सबसे तेज वृद्धि वित्त वर्ष 2025 में दर्ज की गई, जब यह वित्त वर्ष 2024 के 25 अरब डॉलर से बढ़कर 42 अरब डॉलर पर पहुंच गया।

भारत के आउटवर्ड एफडीआई में सिंगापुर की हिस्सेदारी सबसे अधिक 30 प्रतिशत रही। वित्त वर्ष 2017 से ही सिंगापुर अपनी मजबूत हिस्सेदारी बनाए हुए है। रिपोर्ट के अनुसार, इसके पीछे 2016 में हुए कर नियमों और संधि संशोधनों का प्रभाव हो सकता है।

सिंगापुर के अलावा, अमेरिका भी भारतीय कंपनियों के लिए प्रमुख निवेश गंतव्य बनकर उभरा है। अमेरिका में भारत के आउटवर्ड एफडीआई की हिस्सेदारी वित्त वर्ष 2017 के 9.9 प्रतिशत से बढ़कर वित्त वर्ष 2026 में 13.6 प्रतिशत हो गई है।

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