प्राथमिक शालाओं में स्थानीय बोली-भाषाओं में पढ़ाई की होगी व्यवस्था – भूपेश

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आगामी शिक्षण सत्र से प्राथमिक शालाओं में स्थानीय बोली-भाषाओं में पढ़ाई की व्यवस्था करने का ऐलान किया है।

Update: 2020-01-26 14:02 GMT

जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आगामी शिक्षण सत्र से प्राथमिक शालाओं में स्थानीय बोली-भाषाओं में पढ़ाई की व्यवस्था करने का ऐलान किया है।

श्री बघेल ने आज यहां लालबाग परेड मैदान में आयोजित गणतंत्र दिवस के मुख्य समारोह में ध्वजारोहण कर परेड की सलामी लेने के बाद यह ऐलान करते हुए कहा कि आगामी शिक्षा सत्र से प्रदेश की प्राथमिक शालाओं में स्थानीय बोली-भाषाओं छत्तीसगढ़ी, गोंडी, हल्बी, भतरी, सरगुजिया, कोरवा, पांडो, कुडुख, कमारी आदि में पढ़ाई की व्यवस्था की जाएगी। सभी स्कूली बच्चों को संविधान के प्रावधानों से परिचित कराने के लिए प्रार्थना के समय संविधान की प्रस्तावना का वाचन, उस पर चर्चा जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जायेंगे। छत्तीसगढ़ की महान विभूतियों की जीवनी पर परिचर्चा जैसे आयोजन किए जाएंगे।

उन्होने कहा कि देश के ताजा हालात किसी से छिपे नहीं हैं। तमाम प्रतिगामी ताकतों और हरकतों के बीच छत्तीसगढ़ एक बार फिर यह साबित करने में सफल हुआ है कि हमें जोड़ना आता है, हमें रचना आता है, हमें बनाना आता है। तोड़ने-फोड़ने-बिगाड़ने में प्रदेश की जनता का कभी कोई विश्वास नहीं था। रचनात्मक सोच और कार्य ही हमारा रास्ता बनाते रहे हैं।

श्री बघेल ने कहा कि उनकी सरकार ने जनता से मिले अधिकार,जनता को ही सौंपने की दिशा में अनेक निर्णय लिए हैं। बड़ी पंचायतों के परिसीमन से 704 नई पंचायतें गठित हुई जिनमें से 496 अनुसूचित क्षेत्रों में है। हमने पेसा क्षेत्रों को अधिकार और विकास की नई रोशनी देने के लिए उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है। ग्राम पंचायतों से विकेन्द्रीकरण की शुरूआत की है, तो नए जिले ‘गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही’ के गठन का निर्णय भी लिया गया।

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