50 लाख श्रद्घालुओं ने संगम में लगाई डुबकी

इलाहाबाद । उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद में गंगा, यमुना एवं अदृश्य सरस्वती के त्रिवेणी संगम तट पर पौष पूर्णिमा स्नान से माघ मेले की शुरुआत के साथ ही आज लाखों श्रद्धालुओं ने संगम में डुबकी लगाई।;

Update: 2017-01-13 01:16 GMT

पौष पूर्णिमा स्नान से हुआ माघ मेले का आगाज
इलाहाबाद । उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद में गंगा, यमुना एवं अदृश्य सरस्वती के त्रिवेणी संगम तट पर पौष पूर्णिमा स्नान से माघ मेले की शुरुआत के साथ ही आज लाखों श्रद्धालुओं ने संगम में डुबकी लगाई। देश के कोने कोने से पहुंचे माघ मेले के पहले स्नान पर लाखों श्रद्धालुओं ने गंगा, यमुना एवं अदृश्य सरस्वती के पवित्र संगम में आस्था की डुबकी लगाई। मेला प्रशासन ने 50 लाख श्रद्धालुओं के स्नान करने अनुमान लगाया है।

 दूसरा स्नान शनिवार 14 जनवरी मकर संक्रांति के अवसर पर 65 लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है। मेले में विभिन्न संस्कृतियों, भाषाओं और विविधताओं का संगम दिखाई पड़ रहा है। कड़ाके की ठंड और शीतलहरी पर आस्था का विश्वास भारी पड़ रहा है। त्रिवेणी के संगम तट पर सायं-सायं करती तेज हवा और कड़ाके की ठंड में पतित पावनी के जल में भोर के चार बजे से ही श्रद्धालु, कल्पवासी, तीर्थयात्री और सांधु-संतों ने ‘‘हर हर गंगे, ऊं नम: शिवाय, श्री राम जयराम जय जय राम’’ का उच्चारण करते हुए स्नान शुरू कर दिया। कल्पवास करने वाले साधु-संत, सन्यासी, विकलांग और गृहस्थ स्नान कर घाट पर बैठे पण्डे और पुरोहितों को दान-दक्षिणा, पूजन-अर्चन के बाद मोह-माया से दूर एक माह तक व्रत, भजन, पूजन और प्रवचन के लिए अपने तम्बुओं में तल्लीन हो जाते हैं। संगम तट पर श्रद्धालुओं के स्नान करने के लिए तैयार कराए गए 17 घाटों पर भीड़ लगी हुई है। भोर में स्नान करने वालों की भीड़ कम थी लेकिन दिन चढऩे के साथ ही स्नान करने वालों की भीड़ बढ़ती गई। डुबकी लगाने वालों में महिलाएं, बच्चे और बूढ़े और विकलांग भी शामिल हैं। स्नान के बाद श्रद्धालु घाट पर बैठे पण्डे और पुरोहितों को चावल, आटा, नमक, दाल, तिल, आदि का दान किया। प्राचीन काल से संगम तट पर जुटने वाले माघ मेले की जीवंतता में आज भी कोई कमी नहीं आई है। मेले में आस्था और श्रद्धा से सराबोर पुरानी परम्पराओं के साथ आधुनिकता के रंगबिरंगे नजारे दिखाई पड़ रहे हैं। भारतीय संस्कृति और आध्यात्म से प्रभावित कई विदेशी भी इस दौरान ‘पुण्य लाभ’ के लिए संगम स्नान करते दिखाई दे रहे हैं। सभी कल्पवासी अपने-अपने शिविरों में बस चुके हैं। मेला क्षेत्र में चारों ओर ‘ऊं नम: शिवाय’ ‘जय-जय राम जय सिया राम’ के मधुर संगीत आनंदित कर रहे हैं। एक तरफ जहां नदियों का संगम है वहीं दूसरी तरफ तम्बुओं के अंदर से आध्यत्म की बयार बह रही है। चारों ओर धार्मिक अनुष्ठानों के मंत्रोच्चार और हवन में प्रवाहित की जा रही सामग्रियों की भीनी -भीनी खुशबू मेला क्षेत्र के वातावरण को पवित्र और सुगन्धित कर रही है। भारत ही नहीं बल्कि दुनियाभर में प्रसिद्ध है।

 

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