आईयूसी बेड आरक्षित रखने के दिल्ली सरकार के आदेश को एएचपीआई ने दी चुनौती
एसोसिएशन ऑफ हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स ऑफ इंडिया (एएचपीआई) ने दिल्ली सरकार के उस आदेश के खिलाफ गुरुवार को दिल्ली उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की
नई दिल्ली। एसोसिएशन ऑफ हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स ऑफ इंडिया (एएचपीआई) ने दिल्ली सरकार के उस आदेश के खिलाफ गुरुवार को दिल्ली उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की, जिसमें 33 निजी अस्पतालों को अपने यहां मौजूद कुल आईसीयू बेडों में से 80 प्रतिशत कोविड-19 के मरीजों के लिए आरक्षित करने को कहा गया है। एएचपीआई के निदेशक गिरधर जे. ज्ञानी ने कहा कि याचिका इस आधार पर दायर की गई है कि इस आदेश से कोविड के अलावा अन्य गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों से स्वास्थ्य सुविधाएं छीन ली जाएंगी।
उन्होंने कहा, "अस्सी फीसदी, सौ फीसदी होने के ही बराबर है। आईसीयू बेडों में कमी होने की वजह से गैर कोविड-19 मरीजों को ट्रीटमेंट नहीं मिल पाएगा। इससे उन रोगियों की हालत काफी बिगड़ जाएगी, जो कैंसर जैसी घातक बीमारियों से पीड़ित हैं या जिन्हें महीनों से अपनी सर्जरी होने का इंतजार रहा है।"
वह आगे कहते हैं, "आखिरकार इन्हें ही परेशानी झेलनी होगी या फिर इनकी जान भी जा सकती है, क्योंकि अपने उपचार के लिए शायद से महीनों से प्रतीक्षारत रहे होंगे।"
एएचपीआई ने इसकी आलोचना करते हुए आदेश को तत्काल निरस्त किए जाने की मांग की है।
यह भी कहा है कि अगर सरकार ने मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान आदेश वापस लेने की घोषणा नहीं की, तो कानून मदद ली जाएगी।