75.3 प्रतिशत मृतक 60 साल से ऊपर के, एचसीक्यू के साइड इफेक्ट का शोध जारी : सरकार

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने शनिवार को कहा कि कोरोनावायरस महामारी से मरने वाले 75.3 प्रतिशत लोग 60 वर्ष के ऊपर के हैं

Update: 2020-04-18 23:54 GMT

नई दिल्ली। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने शनिवार को कहा कि कोरोनावायरस महामारी से मरने वाले 75.3 प्रतिशत लोग 60 वर्ष के ऊपर के हैं। मंत्रालय ने कहा कि भारत में कोरोनावायरस से मृत्युदर करीब 3.3 प्रतिशत है और हाइड्रोक्लोरोक्वीन(एचसीक्यू) के साइड-इफेक्ट के बारे में शोध जारी है।

स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने कहा कि कोरोनावायरस की वजह से देश में मृत्यु दर 3.3 प्रतिशत है।

मृतकों के आयु वर्ग की विस्तृत जानकारी देते हुए अग्रवाल ने कहा, "14.4 प्रतिशत लोग 0 से 45 वर्ष के उम्र के हैं। 10.3 प्रतिशत लोग 45-60 वर्ष के हैं। 33.1 प्रतिशत लोग 60-75 वर्ष के हैं। 42.2 प्रतिशत लोग 75 वर्ष और इससे अधिक उम्र के हैं। कोरोना संक्रमण से लोगों का रिकवरी रेट 13.85 प्रतिशत है।"

आईसीएमआर के वैज्ञानिक डॉ. रमन आर. गंगाखेड़कर ने एससीक्यू साइड-इफेक्ट के बारे में पूछे गए सवाल के जवाब में कहा, "इस बारे में कोहर्ट स्टडी हुई है, जबकि अभी तक कोई ट्रायल स्टडी नहीं हुई है, क्योंकि ट्रायल के लिए सबूत उपलब्ध नहीं है।"

उन्होंने कहा, "एससीक्यू के अध्ययन के लिए कम से कम 480 रोगियों की जरूरत होती है और इसके लिए कम से कम आठ हफ्ते या ढाई महीने के वक्त की जरूरत होती है। लॉकडाउन के समय में, स्टडी पर कार्य करना मुश्किल है। इसलिए हमने अन्य अध्ययन शुरू किया, जिसमें स्वास्थ्य कर्मियों ने एचसीक्यू के बारे में बात करना शुरू किया, क्योंकि उन्होंने इस बारे में सुना था कि इसपर अध्ययन शुरू होने वाला है। इन लोगों की औसत आयु 35 वर्ष थी। इसमें सबसे ज्यादा साइड-इफेक्ट के रूप में पेट में दर्द सामने आया, जोकि करीब 10 प्रतिशत है। करीब छह प्रतिशत लोगों ने मिचली की शिकायत दर्ज कराई। जबकि हाइपोग्लेसिमिया से पीड़ित लोग 1.3 प्रतिशत थे।"

उन्होंने कहा कि इन 22 प्रतिशत स्वास्थ्य कर्मियों को मधुमेह, ब्लड प्रेशर, स्वास्थ्य संबंधी बीमारी और कॉरोनरी वस्कुलर बीमारी थी।

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