बकाया 49 सौ करोड़ मिलने पर सुलझेगी समस्या
नई दिल्ली ! वेतन न मिलने के चलते पर्यावरण सहायकों की काम रोको हड़ताल (टूल डाउन) से जहां पूर्वी दिल्ली नगर निगम इलाके की सफाई व्यवस्था चरमरा गई है।;
पूर्वी निगम अपने खर्चों से संबंधित खातों की जांच कराने को तैयार
नई दिल्ली ! वेतन न मिलने के चलते पर्यावरण सहायकों की काम रोको हड़ताल (टूल डाउन) से जहां पूर्वी दिल्ली नगर निगम इलाके की सफाई व्यवस्था चरमरा गई है। ट्विटर के जरिए लोगों से मुखातिब होते हुए मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सरकारी पैसा पार्षदों की जेब में जाने का आरोप लगाया तो वहीं, उपमुख्यमंत्री ने अपने पूर्ववर्ती सरकारों से ज्यादा पैसा निगम को देने का दावा किया है। इन बयानों के खिलाफ मंगलवार को आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में महापौर सत्या शर्मा ने चुनौती देते हुए कहा कि वे पिछले साढ़े चार साल में किए गए तमाम खर्चों से संबंधित खातों की जांच किसी तीसरी एजेंसी से कराने को तैयार है।
क्या, दिल्ली सरकार भी अपने दो साल के खर्च की जांच कराएगी। उधर, नेता सदन संजय जैन ने कहा कि सीएम और डिप्टी सीएम भ्रामक बयानबाजी के जरिए जनता को गुमराह कर रहे हैं। महापौर ने कहा कि महज बदनाम करने के लिए आरोप लगाना गलत है, अगर मुख्यमंत्री के बयान में सच्चाई है तो वे इसे साबित भी करें। उन्होंने बताया कि इस बाबत हमने दिल्ली के उपराज्यपाल से मुलाकात का समय भी मांगा है। उनसे मिलकर अपना पक्ष रखेंगे। साथ ही उन्होंने हड़ताली कर्मियों से काम पर लौटने की अपील भी की। वहीं, स्थायी समिति के अध्यक्ष जितेंद्र सिंह जीतू ने कहा कि पूर्वी दिल्ली नगर निगम की आर्थिक समस्या का समाधान चौथे दिल्ली वित्त आयोग (डीएफसी-4) की सिफारिशें लागू करने से हो सकता है। उन्होंने बताया कि बीते पांच सालों में निगम को सरकार से 6640 करोड़ रुपये का भुगतान मिलना था लेकिन पांच सालों में महज 1711 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। लिहाजा दिल्ली सरकार को अपने आयोग की सिफारिशों के मुताबिक बकाया 4900 करोड़ रुपए जारी कर देने चाहिए। बकाया राशि मिलने पर निगम कर्मियों को न सिर्फ अगले कई सालों तक वेतन संबंधी परेशानी से छुटकारा मिल जाएगा। बल्कि फण्ड की कमी के चलते लंबित पड़े विकास कार्यों में भी तेजी आ जाएगी। उधर, महेन्द्र आहूजा ने कहा कि सरकार ने जो पैसा निगम को दिया है वो नॉन प्लान (गैर योजना मद) का है। जबकि उपमुख्यमंत्री इसे वेतन भुगतान का पैसा बता रहे हैं।
सरकार ने किस मद में कितना पैसा दिया है इसका ब्यौरा भी दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, सरकार ने ऐसी नौबत ला दी है कि निगमकर्मियों को वेतन पाने के लिए प्रत्येक तीन या चार माह बाद हड़ताल का सहारा लेना पड़ता है। जीतू ने कहा कि एकीकृत निगम के दौरान भी बजट खर्च 26 प्रतिशत और बजट आमदनी महज 16 प्रतिशत थे, तब भी निगम 10 प्रतिशत के घाटे में थी। वहीं, तत्कालीन दिल्ली सरकार ने भी पूर्वी निगम का गठन 400 करोड़ रुपए के घाटे के साथ किया जो बाद के सालों में लगातार बढ़ता ही चला गया। इसके चलते भी निगम के आर्थिक हालात खऱाब हो गए हैं। इस दौरान उप-महापौर राजकुमार ढिल्लों भी उपस्थित थे।