Top
Begin typing your search above and press return to search.

बलूचिस्तान खनिज समझौते खारिज करे अमेरिका: बलोच एक्टिविस्ट

वाशिंगटन, बलोच अमेरिकन कांग्रेस के अध्यक्ष तारा चंद ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को पत्र लिखकर आग्रह किया है कि उनका प्रशासन बलूचिस्तान खनिज खनन (माइनिंग) समझौतों को अपनी तरफ से खारिज कर दे।

बलूचिस्तान खनिज समझौते खारिज करे अमेरिका: बलोच एक्टिविस्ट
X

वाशिंगटन, बलोच अमेरिकन कांग्रेस के अध्यक्ष तारा चंद ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को पत्र लिखकर आग्रह किया है कि उनका प्रशासन बलूचिस्तान खनिज खनन (माइनिंग) समझौतों को अपनी तरफ से खारिज कर दे। ये समझौते पाकिस्तानी अधिकारियों के माध्यम से ऐसे तरीके से किए गए हैं, जिनमें बलूचों की स्वतंत्र राय नहीं ली गई और न ही उन्हें इसकी पहले से कोई जानकारी दी गई थी।

ट्रंप को लिखे अपने पत्र में, बलूच कार्यकर्ता ने बलूचिस्तान में पाकिस्तानी अधिकारियों द्वारा लोगों को जबरन गायब करने, न्यायेतर हत्याओं, मनमाने ढंग से हिरासत में लेने और शांतिपूर्ण राजनीतिक गतिविधियों को दबाने पर चिंता जताई। उन्होंने इन कथित अत्याचारों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग उठाई।

उन्होंने जोर देकर कहा कि इस क्षेत्र में अमेरिकी निवेश से जुड़ा कोई भी फैसला लेते समय, वहां मानवाधिकारों की गंभीर स्थिति को ध्यान में रखना चाहिए।

चंद ने यह भी कहा कि बलूचिस्तान को जबरन पाकिस्तान में शामिल किया गया था और बलूच लोगों को उनके 'आत्मनिर्णय के अधिकार' से वंचित रखा गया।

उन्होंने कहा, "अपने लापता परिजनों की तलाश कर रहे परिवारों के लिए, न्याय, सुरक्षा और उनके अधिकारों के सम्मान के बिना, खनिज संसाधनों के विकास के वादे कोई मायने नहीं रखते। आर्थिक समझौतों के जरिए कभी भी दमन को बढ़ावा नहीं मिलना चाहिए, और न ही अत्याचार के आरोपियों को अधिक संसाधन या वैधता दी जानी चाहिए।"

30 सितंबर, 2026 को पाकिस्तान में अमेरिकी दूतावास द्वारा जारी, इस्लामाबाद में अमेरिकी 'चार्ज डी अफेयर्स' (राजदूत की अनुपस्थिति में कार्यभार संभालने वाली अधिकारी) नताली ए. बेकर के एक हालिया साक्षात्कार का जिक्र करते हुए, चंद ने ट्रंप प्रशासन से पाकिस्तान के खनिज क्षेत्र में बढ़ती दिलचस्पी के परिणामों पर गौर करने का आग्रह किया।

पत्र में कहा गया, "मैं 30 सितंबर, 2026 को अमेरिकी दूतावास द्वारा जारी, इस्लामाबाद में अमेरिकी 'चार्ज डी अफेयर्स' नताली ए. बेकर के हालिया साक्षात्कार के संदर्भ में लिख रहा हूं। पाकिस्तान के खनिज क्षेत्र में बढ़ती दिलचस्पी को देखते हुए, मैं आपके प्रशासन से आग्रह करता हूं कि वह जांच करे कि आखिर किसकी जमीन और संसाधनों की पेशकश की जा रही है, इससे किसे फायदा होगा, और क्या इन फैसलों में प्रभावित लोगों की कोई सार्थक आवाज शामिल है?"

इसमें आगे कहा गया, "बलूचिस्तान हमारी मातृभूमि है। यहां की प्राकृतिक संपदा यहां के लोगों की विरासत है, न कि पाकिस्तान के राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व के लिए कोई मोलभाव करने की वस्तु।"

चंद ने बेकर और अमेरिकी विदेश विभाग से स्वतंत्र बलूच प्रतिनिधियों, मानवाधिकार रक्षकों और प्रभावित समुदायों के साथ सीधे बातचीत करने का आग्रह किया। उन्होंने जोर दिया कि इस्लामाबाद द्वारा दिए गए आश्वासन सीधे तौर पर प्रभावित लोगों की आवाज का विकल्प नहीं हो सकते।

उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि अमेरिका को बलूचिस्तान में 'चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे' (सीपीईसी) के तहत किए जा रहे चीनी निवेश से जुड़ी शिकायतों पर भी गौर करना चाहिए।

चंद ने कहा, "स्थानीय लोगों की सार्थक सहमति के बिना थोपे गए प्रोजेक्ट्स से असंतोष और अस्थिरता और गहरी हो सकती है। अमेरिका को अपनी ओर से कोई भी प्रतिबद्धता जताने से पहले इन चिंताओं से सबक लेना चाहिए।"

बलूच कार्यकर्ता ने अमेरिकी प्रशासन से आग्रह किया कि वह बलूचिस्तान में उन खनिज परियोजनाओं के लिए अमेरिकी सरकार का समर्थन, फंडिंग और गारंटी रोक दे, जिनमें बलूच लोगों की सहमति और मानवाधिकारों की विश्वसनीय सुरक्षा व्यवस्था का अभाव है। उन्होंने अमेरिकी अधिकारियों से अपील की कि वे बलूचिस्तान में कथित अत्याचारों की निष्पक्ष अंतरराष्ट्रीय जांच का समर्थन करें, और जवाबदेही तय करने तथा शांतिपूर्ण समर्थकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए दबाव डालें।


Next Story

Related Stories

All Rights Reserved. Copyright @2019
Share it