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अमेरिका ने जताई चिंता, यूरोपीय विमान निर्माता एयरबस को मिले निवेश ऋण

वाशिंगटन, अमेरिका ने यूरोपीय विमान निर्माता एयरबस को दिए गए रिकॉर्ड स्तर के निवेश ऋण पर चिंता जताई है। अमेरिका का कहना है कि इस कदम से अमेरिका और यूरोप के बीच व्यापार संबंधों में नई अनिश्चितता पैदा हो गई है और विमान सब्सिडी विवाद पर बने पुराने समझौते के भविष्य को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।

अमेरिका ने जताई चिंता, यूरोपीय विमान निर्माता एयरबस को मिले निवेश ऋण
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वाशिंगटन, अमेरिका ने यूरोपीय विमान निर्माता एयरबस को दिए गए रिकॉर्ड स्तर के निवेश ऋण पर चिंता जताई है। अमेरिका का कहना है कि इस कदम से अमेरिका और यूरोप के बीच व्यापार संबंधों में नई अनिश्चितता पैदा हो गई है और विमान सब्सिडी विवाद पर बने पुराने समझौते के भविष्य को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।

अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर ने सोमवार को कहा कि यूरोपीय निवेश बैंक ने एयरबस को अपने इतिहास का सबसे बड़ा ऋण मंजूर किया है। उन्होंने कहा कि बार-बार जानकारी मांगने के बावजूद अमेरिका को अब तक इस वित्तीय सहायता का पूरा विवरण नहीं दिया गया है।

यह ऋण फ्रांस, जर्मनी और स्पेन में एयरबस की विभिन्न परियोजनाओं के लिए दिया जाना है। इसी वजह से विमान निर्माण कंपनियों को मिलने वाली सरकारी सहायता को लेकर पुराना विवाद फिर से चर्चा में आ गया है। अमेरिका और यूरोपीय संघ ने एक समझौता करके इस विवाद को थामने की कोशिश की थी, जिसके तहत जवाबी शुल्क को निलंबित कर दिया गया था।

ग्रीर ने एक बयान में कहा, "मुझे सच में उम्मीद थी कि एयरबस को मिलने वाली और व्यापार को प्रभावित करने वाली यूरोपीय सब्सिडी अब बीते समय की बात हो चुकी होगी।"

उन्होंने आरोप लगाया कि फ्रांस, जर्मनी और स्पेन लंबे समय से एयरबस को विशेष समर्थन देते रहे हैं, जिससे अमेरिकी एयरोस्पेस कंपनियों और वहां काम करने वाले कर्मचारियों को नुकसान हुआ है।

ग्रीर ने कहा, "दशकों से फ्रांस, जर्मनी और स्पेन अपने राष्ट्रीय विमान निर्माता एयरबस का आक्रामक तरीके से समर्थन करते रहे हैं, जिससे उसे अमेरिकी कंपनियों पर अनुचित बढ़त मिली है।"

अमेरिका की इस प्रतिक्रिया के बाद फिर से उस समझौते पर ध्यान गया है, जिसके तहत बड़े नागरिक विमानों के निर्माताओं को मिलने वाली फंडिंग व्यावसायिक शर्तों पर दिए जाने की बात कही गई थी।

फिलहाल अमेरिका ने कोई नया शुल्क (टैरिफ) लगाने की घोषणा नहीं की है और न ही औपचारिक रूप से यह कहा है कि यूरोपीय संघ ने समझौते का उल्लंघन किया है। लेकिन ग्रीर की टिप्पणियों से साफ है कि वॉशिंगटन इस बात पर सवाल उठा रहा है कि क्या यह नया ऋण दोनों पक्षों की प्रतिबद्धताओं के अनुरूप है या नहीं।

अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (यूएसटीआर) के अनुसार, यूरोपीय निवेश बैंक ने गर्मियों के दौरान इस ऋण को मंजूरी दी थी। यह फैसला उस समय लिया गया जब यूरोपीय संघ ने विमान सब्सिडी विवाद से जुड़े शुल्कों के निलंबन की अवधि बढ़ाई थी।

ग्रीर ने कहा कि ऋण मंजूरी का समय और उससे जुड़ी जानकारी की कमी ने अमेरिकी प्रशासन की चिंताएं बढ़ा दी हैं। उन्होंने कहा, "हम लगातार जानकारी मांग रहे हैं, लेकिन अब तक हमें इस ऋण के बारे में कोई विस्तृत जानकारी नहीं मिली है।"

ग्रीर के मुताबिक, इस स्थिति ने अमेरिका और यूरोप के बीच एयरोस्पेस व्यापार को लेकर काफी अनिश्चितता पैदा कर दी है। उन्होंने इस मुद्दे का जल्द समाधान निकालने की जरूरत पर जोर दिया।

उन्होंने कहा, "यह जरूरी है कि इस मामले को जल्द से जल्द सुलझाया जाए, ताकि विमानन क्षेत्र में बाजार आधारित उत्पादन सुनिश्चित हो सके और हमारे लंबे प्रयासों से बने समझौते की शर्तों का उल्लंघन न हो।"

यह विवाद अमेरिका और यूरोप के बीच चल रहे सबसे पुराने व्यापारिक विवादों में से एक की पृष्ठभूमि में सामने आया है। कई वर्षों से दोनों पक्ष एक-दूसरे पर अपनी विमान निर्माण कंपनियों, बोइंग और एयरबस को अनुचित सरकारी सहायता देने का आरोप लगाते रहे हैं।

विश्व व्यापार संगठन ने भी पहले इन मामलों में जांच के बाद दोनों पक्षों को जवाबी कदम उठाने की अनुमति दी थी। इसके बाद 2021 में अमेरिका और यूरोपीय संघ ने आपसी सहमति से इन विवादों से जुड़े अतिरिक्त शुल्कों को पांच साल के लिए स्थगित कर दिया था और बड़े नागरिक विमानों के वित्तपोषण के लिए नए नियमों पर बातचीत शुरू की थी।

इस समझौते का उद्देश्य दोनों अर्थव्यवस्थाओं के बीच व्यापारिक तनाव कम करना और विमान उद्योग को मिलने वाली सरकारी सहायता के लिए स्पष्ट नियम तय करना था। अब एयरबस को मिले इस बड़े ऋण को लेकर अमेरिका की नई चिंताएं यह दिखाती हैं कि इस समझौते की सफलता काफी हद तक वित्तीय सहायता से जुड़े नियमों के पालन पर निर्भर करती है।


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