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ट्रंप : दक्षिण कोरिया को अलास्का पाइपलाइन प्रोजेक्ट पर फैसला जल्‍द नहीं हुआ तो बड़ी कीमत चुकानी होगी

वाशिंगटन, अलास्का पाइपलाइन प्रोजेक्ट मामले में दक्षिण कोरिया की ओर से मंजूरी नहीं म‍िलने पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर वह परियोजना पर जल्द हस्ताक्षर नहीं करता है, तो उसे भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है।

ट्रंप : दक्षिण कोरिया को अलास्का पाइपलाइन प्रोजेक्ट पर फैसला जल्‍द नहीं हुआ तो बड़ी कीमत चुकानी होगी
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वाशिंगटन, अलास्का पाइपलाइन प्रोजेक्ट मामले में दक्षिण कोरिया की ओर से मंजूरी नहीं म‍िलने पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर वह परियोजना पर जल्द हस्ताक्षर नहीं करता है, तो उसे भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है।

शुरुआत में ट्रंप ने कहा कि अगर दक्षिण कोरिया इस प्रोजेक्ट में शामिल नहीं होना चाहता तो उन्हें इससे कोई परेशानी नहीं है। हालांकि, जब एक पत्रकार ने बताया कि सोल ने अभी तक प्रोजेक्ट को मंजूरी नहीं दी है, तो ट्रंप का रुख सख्त हो गया।

ट्रंप ने पत्रकारों से कहा, "उन्हें बता दो कि अगर उन्होंने जल्द साइन नहीं किया, तो मैं इसे दोगुना कर दूंगा।"

यह बहस तब शुरू हुई जब व्हाइट हाउस में ट्रंप से अलास्का पाइपलाइन पर दक्षिण कोरिया के रुख के बारे में पूछा गया।

एक पत्रकार ने कहा, "दक्षिण कोरिया ने कहा है कि उसने अभी तक इस अलास्का पाइपलाइन को मंजूरी नहीं दी है। वह अभी भी इस पर विचार कर रहा है। क्या आपने जल्दबाजी में कोई बयान दे दिया?"

ट्रंप ने कहा क‍ि नहीं, मैंने जल्दबाजी नहीं की। अगर वे इसे नहीं करना चाहते, तो मुझे कोई परेशानी नहीं है। मैं बस उनसे ज्यादा कीमत वसूल करूंगा।

पत्रकार ने जवाब दिया कि दक्षिण कोरिया ने कहा है कि वह अभी भी प्रस्ताव पर विचार कर रहा है। इसके बाद ट्रंप ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर सोल ने जल्द समझौते पर साइन नहीं किए, तो कीमत दोगुनी की जा सकती है।

हालांकि, ट्रंप ने यह साफ नहीं किया कि वह किस कीमत या रकम को दोगुना करने की बात कर रहे थे। उन्होंने दक्षिण कोरिया को फैसला लेने के लिए कोई समयसीमा भी नहीं बताई।

अलास्‍का एलएनजी प्रोजेक्ट के तहत अलास्का के नॉर्थ स्लोप से प्राकृतिक गैस को एक पाइपलाइन के जरिए राज्य के दक्षिणी हिस्से में मौजूद एलएनजी फैसिलिटी तक पहुंचाने की योजना है।

वहां प्राकृतिक गैस को लिक्विफाइड नेचुरल गैस (एलएनजी) में बदलकर विदेशों में निर्यात किया जा सकेगा।

एशियाई देशों को इस प्रोजेक्ट के संभावित ग्राहकों के रूप में देखा जाता रहा है, क्योंकि इस क्षेत्र की कई अर्थव्यवस्थाएं अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए आयातित ऊर्जा पर निर्भर हैं।


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