ट्रंप : युद्धविराम के प्रस्ताव को ठुकराया
वॉशिंगटन, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के सात दिन के युद्धविराम के प्रस्ताव को खारिज करते हुए नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनावों के बाद तेहरान पर फिर से बमबारी शुरू करने की बात कही।

वॉशिंगटन, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के सात दिन के युद्धविराम के प्रस्ताव को खारिज करते हुए नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनावों के बाद तेहरान पर फिर से बमबारी शुरू करने की बात कही।
द वॉल स्ट्रीट जर्नल ने मामले की जानकारी रखने वाले अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया कि ट्रंप ने ईरान का प्रस्ताव ठुकरा दिया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप पहले ही कह चुके हैं कि वह ईरान को कभी भी परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देंगे। उन्हें इस बात पर भरोसा नहीं है कि तेहरान उनकी मांगों को पूरा करेगा और वह ईरान के खिलाफ दोबारा बमबारी की संभावना देख रहे हैं।
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर एक तस्वीर भी पोस्ट की, जिसमें नक्शे पर होर्मुज स्ट्रेट को 'ट्रंप स्ट्रेट' लिखा हुआ एक नक्शा दिखाया गया है।
तेहरान ने रणनीतिक रूप से बेहद अहम होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोलने और लड़ाई खत्म करने का प्रस्ताव दिया था। मौजूदा लड़ाई 28 फरवरी को शुरू हुई थी, जब अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान पर हमले किए थे। ईरान ने कहा था कि अगर वॉशिंगटन उसकी मांगें मान लेता है, तो प्रस्ताव सात दिनों के भीतर लागू किया जा सकता है।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र में पत्रकारों से कहा, "ईरान ने कतर के जरिए अमेरिका को सात दिनों की एक ठोस योजना दी है। अगर जरूरी शर्तें पूरी होती हैं, तो स्ट्रेट को दोबारा खोला जा सकता है और सात दिनों के अंदर जहाजों की सामान्य आवाजाही बहाल की जा सकती है।"
उन्होंने कहा, "अब फैसला अमेरिका को करना है। ईरान दबाव, धमकी या डराने की कोशिशों को स्वीकार नहीं करता और दबाव में अपने संप्रभु अधिकारों को नहीं छोड़ेगा।"
अराघची ने कहा कि अगर अमेरिकी पक्ष वास्तव में समझौता करने और होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोलने को लेकर गंभीर है, तो मैं आपको बता सकता हूं कि अब हर चीज तैयार है।
ईरान ने इससे पहले कहा था कि अगर अमेरिका उसकी कुछ शर्तें मानता है, तो वह होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोल देगा और अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर बातचीत भी सात दिनों के अंदर फिर शुरू कर देगा। ईरान की मांगों में अमेरिकी समुद्री नाकेबंदी हटाना, तेल से जुड़े प्रतिबंधों में छूट देना और ऐसा युद्धविराम लागू करना जिसमें लेबनान भी शामिल हो, जैसी बातें शामिल थीं।
ईरानी विदेश मंत्री ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान एक निजी बैठक में भी इस प्रस्ताव पर चर्चा की थी। अमेरिका और ईरान ने 17 जून को मध्य पूर्व में युद्ध खत्म करने के लिए 14 सूत्रीय समझौता किया था।
इस समझौते में लेबनान समेत सभी सैन्य कार्रवाइयों को तुरंत रोकने की बात शामिल थी। साथ ही दोनों देशों ने 60 दिनों के अंदर किसी अंतिम समझौते तक पहुंचने की कोशिश करने की प्रतिबद्धता जताई थी।
हालांकि, 8 जुलाई को ट्रंप ने कहा कि यह समझौता 'खत्म हो चुका है।' इसके करीब एक हफ्ते बाद तेहरान ने भी समझौता ज्ञापन को निलंबित कर दिया। ईरान ने आरोप लगाया कि वॉशिंगटन ने 'अपनी सभी प्रतिबद्धताओं का उल्लंघन किया है।'


