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टैरिफ बने ट्रंप प्रशासन का नया हथियार

ट्रंप प्रशासन व्यापारिक साझेदार देशों पर दबाव बनाने के लिए टैरिफ का इस्तेमाल कर रहा है, ताकि वे अपने बाजार अमेरिकी कंपनियों के लिए खोलें, नियमों का बेहतर पालन करें और अमेरिका में मैन्युफैक्चरिंग को फिर से मजबूत बनाया जा सके

टैरिफ बने ट्रंप प्रशासन का नया हथियार
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अमेरिका की बराबरी वाली व्यापार नीति से रिकॉर्ड निर्यात

  • ग्रीर बोले: टैरिफ सिर्फ सजा नहीं, बातचीत का साधन
  • इंडोनेशिया से लेकर यूरोपीय संघ तक नए समझौते

वॉशिंगटन। ट्रंप प्रशासन व्यापारिक साझेदार देशों पर दबाव बनाने के लिए टैरिफ का इस्तेमाल कर रहा है, ताकि वे अपने बाजार अमेरिकी कंपनियों के लिए खोलें, नियमों का बेहतर पालन करें और अमेरिका में मैन्युफैक्चरिंग को फिर से मजबूत बनाया जा सके। अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर ने बुधवार को सांसदों के सामने यह बात कही।

जैमीसन ग्रीर ने इसे अमेरिका की नई व्यापार नीति बताया, जिसमें बराबरी के आधार पर समझौते किए जाएंगे और जरूरत पड़ने पर टैरिफ का दबाव बनाया जाएगा।

ग्रीर ने सीनेट की वित्त समिति के सदस्यों से कहा कि टैरिफ सिर्फ सजा देने का तरीका नहीं है, बल्कि बातचीत में एक ऐसा साधन भी है जिससे अमेरिकी कंपनियों और कामगारों के लिए बेहतर बाजार पहुंच हासिल की जा सकती है।

उन्होंने कहा, "हम टैरिफ का इस्तेमाल जारी रखेंगे और ऐसे समझौते करेंगे जो हमारी अर्थव्यवस्था में दोबारा उद्योगों को मजबूत करने, अमेरिकी कामगारों की रक्षा करने, उनकी आय बढ़ाने और व्यापार घाटे को कम करने में मदद करेंगे।"

ग्रीर ने दावा किया कि प्रशासन की यह नीति पहले से ही अच्छे नतीजे दे रही है। टैरिफ और समझौतों के मेल से राष्ट्रपति की व्यापार नीति ने जल्दी और प्रभावशाली परिणाम दिए हैं।

ग्रीर के अनुसार, अमेरिका अब तक 19 ऐसे ढांचे वाले या बराबरी के आधार पर किए गए व्यापार समझौते कर चुका है, जो दुनिया की कुल अर्थव्यवस्था (जीडीपी) के 32 प्रत‍िशत हिस्से को कवर करते हैं।

इंडोनेशिया के साथ हुए समझौते का उदाहरण देते हुए ग्रीर ने सांसदों को बताया क‍ि यह एक ठोस समझौता है। इसमें कई हिस्से हैं और इसमें उन सभी चीजों की सूची है जिन पर इंडोनेशिया अमेरिका के लिए अपने टैरिफ कम करेगा।

ग्रीर ने कहा कि प्रशासन की बराबरी वाली व्यापार नीति से अमेरिका के निर्यात में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है और आयात की प्रकृति भी बदली है। अब ज्यादा ध्यान उन मशीनों और उपकरणों पर है जिनसे अमेरिका में उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी।

उन्होंने कहा क‍ि अमेरिका ने दुनिया के साथ व्यापार बंद नहीं किया है, व्यापार का तरीका इस तरह बदला है जिससे अमेरिकियों को फायदा हो रहा है। ग्रीर ने कई देशों का जिक्र किया जिन्होंने अमेरिका के साथ बातचीत के बाद व्यापार बाधाएं कम करने पर सहमति जताई है।

उन्होंने कहा कि कंबोडिया ने अमेरिकी सामानों पर लगाए गए सभी टैरिफ हटा दिए हैं। वहीं, नॉर्थ मैसेडोनिया ने भी टैरिफ खत्म कर दिए हैं। मलेशिया के बारे में उन्होंने कहा कि वह सभी टैरिफ को शून्य करने और लंबे समय से चली आ रही अन्य व्यापारिक बाधाओं को हटाने की तैयारी कर रहा है। इंडोनेशिया इस साल के अंत तक अपनी प्रतिबद्धताओं को लागू कर सकता है, जबकि जॉर्डन पहले ही नया समझौता कर चुका है।

ग्रीर ने इजरायल और यूरोपीय संघ के साथ हुए समझौतों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इजरायल ने अमेरिकी मानकों को स्वीकार किया है और यूरोपीय संघ ने औद्योगिक सामानों पर टैरिफ को शून्य कर दिया है। साथ ही अमेरिकी किसानों के लिए ज्यादा निर्यात अवसर भी दिए हैं।

उन्होंने कहा क‍ि व्यापार नियमों को लागू करवाने का मतलब है टैरिफ का इस्तेमाल करना। उन्होंने तर्क दिया कि भले ही व्यापार समझौतों में विवाद सुलझाने की व्यवस्था हो, लेकिन टैरिफ अभी भी सबसे बड़ा दबाव बनाने वाला साधन है।


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