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सुपर इंटेलिजेंस : सुरक्षा उपायों पर एकजुट हुईं टेक कंपनियां

वाशिंगटन, अमेरिका की सबसे शक्तिशाली प्रौद्योगिकी कंपनियां अपनी तेजी से विकसित हो रही सुपर इंटेलिजेंस प्रणालियों की आंतरिक जोखिम समीक्षा, बाहरी ऑडिट और बोर्ड स्तर की निगरानी कराने पर सहमत हो गई हैं। उभरती हुई इस तकनीक पर प्रभुत्व हासिल करने की होड़ के बीच पूरे उद्योग की ओर से साझा सुरक्षा उपाय स्थापित करने का यह एक असामान्य प्रयास है।

सुपर इंटेलिजेंस : सुरक्षा उपायों पर एकजुट हुईं टेक कंपनियां
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वाशिंगटन, अमेरिका की सबसे शक्तिशाली प्रौद्योगिकी कंपनियां अपनी तेजी से विकसित हो रही सुपर इंटेलिजेंस प्रणालियों की आंतरिक जोखिम समीक्षा, बाहरी ऑडिट और बोर्ड स्तर की निगरानी कराने पर सहमत हो गई हैं। उभरती हुई इस तकनीक पर प्रभुत्व हासिल करने की होड़ के बीच पूरे उद्योग की ओर से साझा सुरक्षा उपाय स्थापित करने का यह एक असामान्य प्रयास है।

व्हाइट हाउस में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ हुई बैठक के बाद ये प्रतिबद्धताएं सामने आईं। बैठक में प्रौद्योगिकी की दौड़ में सबसे आगे चल रही कंपनियों के प्रमुख शामिल हुए। लगातार शक्तिशाली होती प्रणालियों से पैदा होने वाले जोखिमों के स्तर को लेकर मतभेदों के बावजूद वे इस बैठक में एक साथ आए।

मेटा के प्रमुख मार्क जुकरबर्ग ने समझौते के बारे में सबसे स्पष्ट व्याख्या देते हुए इसे प्रौद्योगिकी के सुरक्षित विकास को लेकर ‘व्हाइट हाउस समझौता’ बताया।

जुकरबर्ग ने कहा, “मूल विचार यह है कि हम अमेरिकी लोगों और अपने ग्राहकों को यह भरोसा दिलाना चाहते हैं कि यह प्रौद्योगिकी उसी तरह काम करती है, जैसा हम चाहते हैं।”

उन्होंने कहा कि कंपनियां ऐसे ‘सिद्धांतों और प्रतिबद्धताओं’ पर सहमत हुई हैं, जिनमें मजबूत आंतरिक नियंत्रण और समस्याओं का पता लगाने के तंत्र शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि इन सुरक्षा उपायों के साथ ऑडिट और निगरानी की ‘कई परतें’ होंगी। इसकी शुरुआत आंतरिक जोखिम समीक्षा से होगी और इसके बाद बाहरी ऑडिटर तथा मूल्यांकनकर्ता भी इसकी जांच करेंगे।

कंपनियां इस बात पर भी सहमत हुईं कि उनके निदेशक मंडल ऑडिटरों की ओर से तैयार रिपोर्टों की स्वतंत्र रूप से समीक्षा करेंगे।

जुकरबर्ग ने कहा, “इसका अर्थ यह नहीं है कि भविष्य में हम केवल इतना ही करेंगे। यह एक शुरुआत है और ऐसा समझौता है, जिस पर पूरा उद्योग सहमत हो सकता है।”

गूगल के प्रमुख सुंदर पिचाई ने इस अवसर को ‘ऐतिहासिक और दूरगामी प्रभाव वाला’ बताते हुए कहा कि उद्योग इस प्रौद्योगिकी के संभावित लाभों और जोखिमों, दोनों को समझता है।

पिचाई ने कहा, “हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि हम जोखिमों से निपट रहे हैं और राष्ट्रपति ने उद्योग के तौर पर हमसे आगे बढ़कर जिम्मेदारी निभाने को कहा है।”

एंथ्रोपिक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डारियो अमोदेई ने भी इसकी संभावनाओं पर जोर देते हुए प्रौद्योगिकी से जुड़े जोखिमों को लेकर आगाह किया।

अमोदेई ने कहा, “एआई के असाधारण लाभ हैं, लेकिन मेरा मानना है कि इस प्रौद्योगिकी से बेहद वास्तविक जोखिम भी जुड़े हुए हैं।”

उन्होंने कहा, “इन जोखिमों से निपटने का तंत्र क्या होगा, इस पर अभी भी चर्चा जारी है। लेकिन हम सभी को मिलकर काम करने की जरूरत है, ताकि हम जीत सकें और सुरक्षित तरीके से जीत सकें।”

एनवीडिया के प्रमुख जेनसन हुआंग ने कहा कि सुरक्षा और तकनीकी प्रगति एक-दूसरे के विपरीत नहीं हैं।

हुआंग ने कहा, “नवाचार, प्रौद्योगिकी और सुरक्षा के बीच कोई टकराव नहीं है। हम इस प्रौद्योगिकी को आगे बढ़ाएंगे, जो मानवता और हमारे देश की भविष्य की समृद्धि के लिए बेहद महत्वपूर्ण है और हम यह काम जिम्मेदारी तथा सुरक्षित तरीके से करेंगे।”

ट्रंप ने बार-बार इस बात पर जोर दिया कि उद्योग को खुद अपनी निगरानी करनी चाहिए।

ट्रंप ने कहा, “यह सब अच्छे के लिए होने वाला है और हम इसे बेहतर तथा सुरक्षित बनाएंगे। वास्तव में ये कंपनियां एक-दूसरे की निगरानी करेंगी।”

राष्ट्रपति ने प्रौद्योगिकी की इस दौड़ को सीधे चीन से भी जोड़ा। उनका तर्क था कि अगर कंपनियों के लिए विदेशों में डेटा सेंटर बनाना आसान हुआ तो अमेरिका निवेश गंवा सकता है।

चीन के अमेरिका से आगे निकलने के जोखिम के बारे में पूछे जाने पर ट्रंप ने कहा, “मुझे नहीं लगता कि ऐसा होगा, जब तक कि हम मूर्खतापूर्ण कदम उठाकर इन लोगों को दूसरे देशों में जाने के लिए मजबूर नहीं करते। ऐसा हो सकता है।”

बाद में उन्होंने अपनी चेतावनी को और स्पष्ट किया।

ट्रंप ने कहा, “एलन और मैं पिछले दिनों राष्ट्रपति शी के साथ बैठे थे और जिन डेटा सेंटरों को हम नहीं चाहते, वे उन सभी को ले लेंगे। वे हर डेटा सेंटर चाहते हैं, क्योंकि यह चीन के लिए बहुत अच्छा है। वैसे यह हमारे लिए भी बहुत अच्छा है और हम काफी आगे हैं। हम अपनी बढ़त बनाए रखेंगे।”

ट्रंप ने यह भी कहा कि वह ‘सुपर इंटेलिजेंस जार’ चुनने के बेहद करीब हैं और अगले ‘तीन या चार दिनों’ में फैसले की घोषणा करने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि नियुक्ति से पहले वह कंपनियों और अमेरिकी संसद के नेताओं से विचार-विमर्श करना चाहते हैं।

तकनीकी बुनियादी ढांचे के इस व्यापक विस्तार के पैमाने को रेखांकित करते हुए हुआंग ने इसे ‘इतिहास की सबसे बड़ी औद्योगिक क्रांति’ बताया।

हुआंग ने कहा, “हमारे यहां चिप संयंत्र स्थापित हो रहे हैं, कंप्यूटर संयंत्र बन रहे हैं और एआई फैक्ट्रियां तैयार हो रही हैं।” उन्होंने कहा कि इस विस्तार से “अमेरिका में दस लाख नौकरियां पैदा हो रही हैं।”

हालांकि, सुपर इंटेलिजेंस के तेजी से विकास ने रोजगार के भविष्य पर इसके संभावित प्रभाव को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं।

एलन मस्क ने स्वीकार किया कि नौकरियों का स्वरूप बदलेगा। उन्होंने इस बदलाव की तुलना पहले के उन तकनीकी परिवर्तनों से की, जिनमें कुछ रोजगार समाप्त हुए, जबकि नए अवसर भी पैदा हुए।

मस्क ने कहा, “मेरा मानना है कि सबसे संभावित परिणाम समृद्धि का ऐसा युग होगा, जिसमें हमारे पास केवल यूनिवर्सल बेसिक इनकम ही नहीं, बल्कि यूनिवर्सल हाई इनकम होगी।”

उन्होंने रोबोटिक्स और सुपर इंटेलिजेंस की मदद से स्वास्थ्य सेवा में भी व्यापक प्रगति की भविष्यवाणी की।

मस्क ने कहा, “जब आपके पास रोबोट और सुपर इंटेलिजेंस होंगे, तो इसका अर्थ है कि दुनिया में हर व्यक्ति को यहां मौजूद किसी भी व्यक्ति, यहां तक कि मुझसे भी बेहतर चिकित्सा सुविधा मिल सकेगी। क्या यह अद्भुत नहीं होगा?”


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