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समुद्र जाने को तैयार नहीं अड़ियल ‘बुकांगी’ : दक्षिण कोरिया

सोल, दक्षिण कोरिया के बुसान की अड़ियल 'बुकांगी' ने प्रशासन की नाक में दम कर रखा है। 3.5 मीटर लंबी शार्क समुद्र में लौटने को तैयार नहीं है। करीब तीन सप्ताह पहले ये बुसान के नॉर्थ पोर्ट की एक संकरी नहर में पहुंच गई थी। अब ये उसी जलमार्ग में बनी हुई है। उसे खुले समुद्र तक पहुंचाने की दो कोशिशें की जा चुकी हैं लेकिन दोनों नाकाम रहीं।

समुद्र जाने को तैयार नहीं अड़ियल ‘बुकांगी’ : दक्षिण कोरिया
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सोल, दक्षिण कोरिया के बुसान की अड़ियल 'बुकांगी' ने प्रशासन की नाक में दम कर रखा है। 3.5 मीटर लंबी शार्क समुद्र में लौटने को तैयार नहीं है। करीब तीन सप्ताह पहले ये बुसान के नॉर्थ पोर्ट की एक संकरी नहर में पहुंच गई थी। अब ये उसी जलमार्ग में बनी हुई है। उसे खुले समुद्र तक पहुंचाने की दो कोशिशें की जा चुकी हैं लेकिन दोनों नाकाम रहीं। दिलचस्प बात यह है कि एक बार समुद्र के मुहाने के काफी करीब पहुंचने के बाद भी वह नहर में लौट आई।

फिर स्थानीय लोगों ने इसका नाम ‘बुकांगी’ रख दिया। यह नाम बुसान के नॉर्थ पोर्ट के कोरियाई नाम ‘बुकहांग’ और स्थानीय नामों में इस्तेमाल होने वाले प्रत्यय ‘ई’ से मिलकर बना है। योनहाप न्यूज एजेंसी के अनुसार, 18 सितंबर को पहली बार नहर में देखे जाने के बाद से बुकांगी न सिर्फ स्थानीय अधिकारियों के लिए एक रेस्क्यू चुनौती बनी हुई है, बल्कि हजारों लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र भी बन गई है। शनिवार तक सात लाख से ज्यादा लोग उसे देखने पहुंच चुके थे।

शार्क को नहर से बाहर निकालने की पहली कोशिश 29 सितंबर को की गई थी। अधिकारियों ने पानी की तेज धार छोड़कर उसे धीरे-धीरे नहर के मुहाने की ओर पहुंचाने का प्रयास किया। पांच नौकाओं और पानी के पंपों की मदद से करीब पांच घंटे तक पूरी शिद्दत से अभियान चलाया गया, लेकिन शार्क बार-बार नौकाओं के पीछे से निकलती रही और अधिकारियों की बनाई दिशा से बचती रही, जिसके बाद अंततः अभियान पर विराम लगाना पड़ा।

इसके बाद अधिकारियों ने एक और तरकीब निकाली। 2 अक्टूबर को करीब 50 मीटर लंबा और 6.8 मीटर ऊंचा जाल बिछाया गया। योजना थी कि जाल की मदद से शार्क को धीरे-धीरे कृत्रिम जलमार्ग से बाहर निकाल खुले समुद्र तक पहुंचाया जाएगा। लेकिन यह कोशिश भी सफल नहीं रही। जाल नहर की तलहटी में ही जाकर अटक गया और करीब दो घंटे की मशक्कत के बाद अभियान रोकना पड़ा।

इसके अगले दिन जो हुआ उससे सब हतप्रभ रह गए। दरअसल, अधिकारियों ने जाल को नहर के मुहाने से करीब 100 मीटर पहले रोक दिया था। लेकिन अगले दिन बुकांगी उस 50 मीटर लंबे जाल को पार कर फिर नहर के भीतर लौट आई। यानी जिस शार्क को बाहर निकालने के लिए इतनी मशक्कत की, वह खुद ही वापस उसी जगह पहुंच गई जहां से उसे निकालने के लिए ऑपरेशन चलाया गया।

अधिकारियों के सामने अब सवाल केवल यह नहीं है कि शार्क को कैसे पकड़ा जाए, बल्कि यह भी है कि उसे समुद्र की ओर जाने के लिए मजबूर करना कितना सही और सुरक्षित होगा।

स्थानीय अधिकारियों ने पहले बताया था कि शार्क के नहर में रहने के दौरान उसके भोजन करते हुए नहीं देखा गया है। इसी वजह से उन्हें चिंता थी कि अगर वह लंबे समय तक इसी जलमार्ग में रही तो उसकी ताकत धीरे-धीरे कम हो सकती है। हालांकि, राष्ट्रीय मत्स्य विज्ञान संस्थान के निरीक्षण में उसकी गतिविधि और सांस लेने की स्थिति स्थिर पाई गई थी।

बुकांगी के प्रति लोगों की दिलचस्पी भी असाधारण रही है। 18 सितंबर को पहली बार दिखाई देने के बाद कुछ ही दिनों में सैकड़ों हजार लोग उसे देखने पहुंचने लगे। चुसोक (कोरियाई थैंक्स गिविंग) की छुट्टियों के दौरान तो चार दिनों में करीब 4.83 लाख लोगों ने वाटरफ्रंट पार्क का रुख किया। यह सामान्य छुट्टी वाले दिनों की तुलना में करीब 50 गुना ज्यादा था।

लोगों की इस दिलचस्पी को देखते हुए बुसान शहर ने बुकांगी को अपना मानद प्रचार राजदूत भी बना दिया है। इस तरह एक ऐसी शार्क, जो समुद्र में लौटने को तैयार नहीं है, अचानक पूरे शहर की पहचान और आकर्षण का हिस्सा बन गई है।

इस बीच दक्षिण कोरिया के समुद्री इलाकों में बड़ी शार्क के दिखाई देने की घटनाओं ने विशेषज्ञों का ध्यान भी खींचा है। कुछ विशेषज्ञों ने समुद्र के बढ़ते तापमान को इसके संभावित कारणों में शामिल किया है।

फिलहाल बुसान की इस ‘अड़ियल’ मेहमान की कहानी जारी है। समुद्र कुछ ही दूरी पर है, बचाव दल दो बार कोशिश कर चुका है और सात लाख से ज्यादा लोग उसे देख चुके हैं। लेकिन बुकांगी को इससे कोई फर्क नहीं पड़ रहा।


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