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रूस से डीजल समझौते पर ट्रंप की नीति पर सवाल

वॉशिंगटन, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से रूस से डीजल खरीदने के समझौते के बाद अमेरिका में दोहरे मानदंड (डबल स्टैंडर्ड) के आरोप तेज हो गए हैं।

रूस से डीजल समझौते पर ट्रंप की नीति पर सवाल
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वॉशिंगटन, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से रूस से डीजल खरीदने के समझौते के बाद अमेरिका में दोहरे मानदंड (डबल स्टैंडर्ड) के आरोप तेज हो गए हैं। कई अमेरिकी पत्रकारों, नेताओं और सोशल मीडिया यूजर्स ने सवाल उठाया है कि जब भारत और चीन जैसे देशों को रूसी तेल खरीदने पर निशाना बनाया गया, तो अब अमेरिका खुद रूस से ईंधन क्यों खरीद रहा है।

विवाद उस समय बढ़ गया जब ट्रंप ने शुक्रवार को घोषणा की कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन अमेरिका और वैश्विक बाजारों को लाखों टन डीजल की आपूर्ति करेंगे। इसके साथ ही, अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने रूसी डीजल से जुड़े कुछ लेनदेन पर लगी पाबंदियों में अस्थायी राहत भी दे दी।

यह फैसला ऐसे समय आया है, जब एक महीने से भी कम समय पहले ट्रंप ने एक द्विदलीय कानून पर हस्ताक्षर किए थे, जिसके तहत रूस से तेल और गैस खरीदने वाले बड़े देशों पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाने का प्रावधान किया गया था।

इस फैसले के बाद अमेरिकी पत्रकार कैथरीन रैम्पेल ने सोशल मीड‍िया प्‍लेटफॉर्म 'एक्स' पर तंज कसते हुए लिखा, "क्या अब हम खुद पर भी टैरिफ लगाने वाले हैं?"

राजनीतिक पत्रकार सैम स्टीन ने भी इस फैसले पर सवाल उठाए। उन्होंने याद दिलाया कि कुछ ही सप्ताह पहले ट्रंप ने रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाने के उद्देश्य से एक प्रतिबंध कानून पर हस्ताक्षर किए थे, जबकि अब वहीं प्रशासन रूस से ईंधन लेने का समझौता कर रहा है।

सोशल मीडिया पर भी कई लोगों ने अमेरिकी नीति की आलोचना की। वेरिफाइड 'एक्स' अकाउंट 'न्यूज मैट्रिक्स' ने ट्रंप के भारत पर पहले किए गए हमलों का जिक्र करते हुए सवाल उठाया, "अगर भारत की ओर से रूसी तेल खरीदना पुतिन के युद्ध को फंड करना है, तो क्या यही तर्क अमेरिका पर भी लागू नहीं होता? या फिर रूस को फंडिंग सिर्फ तब मानी जाती है जब भारत तेल खरीदे?"

रेडिट पर भी यूजर्स ने इस फैसले को लेकर नाराजगी जताई। एक यूजर ने लिखा, "दूसरों के लिए एक नियम और अपने लिए दूसरा।" वहीं दूसरे ने सवाल किया कि क्या अब अमेरिका खुद पर भी 100 फीसदी टैरिफ लगाएगा?

इस बीच अमेरिकी सांसदों ने भी फैसले की आलोचना की। डेमोक्रेटिक सीनेटर जीन शाहीन, चक शूमर और एलिजाबेथ वॉरेन ने संयुक्त बयान जारी कर प्रशासन द्वारा रूस को छह महीने तक डीजल बेचने की अनुमति देने की निंदा की। उन्होंने कहा, "राष्ट्रपति को ईरान के साथ अपने टकराव को खत्म करना चाहिए, न कि रूस के युद्ध तंत्र को आर्थिक मदद पहुंचानी चाहिए।"

सांसदों का तर्क है कि यह कदम यूक्रेन युद्ध को लेकर रूस पर दबाव बनाने की अमेरिकी कोशिशों को कमजोर कर सकता है और मॉस्को की कमाई बढ़ा सकता है।

इससे पहले सात अक्टूबर को सीनेटर जीन शाहीन और रिपब्लिकन सीनेटर रोजर विकर ने विदेश मंत्री मार्को रुबियो और वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट को पत्र लिखकर रूस के तेल टैंकरों, वित्तीय नेटवर्क और सैन्य तकनीक आपूर्तिकर्ताओं पर और सख्त प्रतिबंध लगाने की मांग की थी।

हालांकि, ट्रंप ने इस समझौते का बचाव करते हुए कहा कि अमेरिकी उपभोक्ताओं, किसानों और ट्रक चालकों के लिए ईंधन की कीमतें कम करने के मकसद से अतिरिक्त डीजल सप्लाई जरूरी है। व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने पुतिन को धन्यवाद देते हुए कहा कि अमेरिका को अतिरिक्त डीजल की जरूरत है।

ट्रंप के मुताबिक, रूस पहले चरण में तीन लाख टन से ज्यादा डीजल की आपूर्ति करेगा। इसके बाद नवंबर में पांच लाख टन और फिर 10 लाख टन अतिरिक्त डीजल भेजा जाएगा। आगे की आपूर्ति रिफाइनरी क्षमता के आधार पर तय होगी।

अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने जनरल लाइसेंस 135 जारी करते हुए अप्रैल 2027 तक रूसी डीजल से जुड़े कुछ विशेष लेनदेन की अनुमति दी है।


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