Top
Begin typing your search above and press return to search.

अटलांटा में क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक

अटलांटा, विदेश मंत्री एस. जयशंकर शनिवार को अमेरिका के अटलांटा में होने वाली क्वाड (चतुर्भुज सुरक्षा संवाद) देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में शामिल होंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बैठक अगले महीने प्रस्तावित क्वाड नेताओं के शिखर सम्मेलन की तैयारियों के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकती है।

अटलांटा में क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक
X

अटलांटा, विदेश मंत्री एस. जयशंकर शनिवार को अमेरिका के अटलांटा में होने वाली क्वाड (चतुर्भुज सुरक्षा संवाद) देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में शामिल होंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बैठक अगले महीने प्रस्तावित क्वाड नेताओं के शिखर सम्मेलन की तैयारियों के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकती है।

बैठक में अमेरिका, भारत, जापान और ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्री हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा, समुद्री सहयोग और आर्थिक मजबूती से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करेंगे।

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो की मेजबानी में होने वाली यह बैठक जी-20 देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक से इतर सुबह नौ बजे (स्थानीय समय) आयोजित होगी। जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी और ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग भी जी-20 बैठक के लिए अटलांटा में मौजूद हैं।

ऑस्ट्रेलियाई विदेश मंत्री पेनी वोंग ने अपनी यात्रा से पहले जारी बयान में कहा, "चारों देश क्षेत्रीय सुरक्षा, समुद्री सुरक्षा और आर्थिक मजबूती के क्षेत्र में व्यावहारिक सहयोग को आगे बढ़ाएंगे, ताकि हिंद-प्रशांत क्षेत्र को शांतिपूर्ण, स्थिर और समृद्ध बनाया जा सके।"

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बुधवार को जयशंकर की यात्रा की घोषणा करते हुए कहा, "विदेश मंत्री जी-20 बैठक से इतर क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक में भी हिस्सा लेंगे और अपने समकक्षों के साथ कई द्विपक्षीय मुलाकातें करेंगे।"

एशिया सोसाइटी पॉलिसी इंस्टीट्यूट में दक्षिण एशिया पहल की निदेशक फरवा आमेर के अनुसार, "चारों देशों के विदेश मंत्रियों की यह बैठक अगले महीने मनीला में होने वाले क्वाड नेताओं के शिखर सम्मेलन की जमीन तैयार कर सकती है, जो लंबे समय से लंबित है।"

उन्होंने कहा, "पिछले एक साल में, खासकर भारत और अमेरिका के बीच, द्विपक्षीय विश्वास में आई कमी के बावजूद क्वाड ऐसा मंच बना हुआ है, जहां अधिकारी हिंद-प्रशांत क्षेत्र, आपूर्ति श्रृंखला और आर्थिक सुरक्षा के मुद्दों पर साझा सहयोग की पैरवी कर रहे हैं।"

हालांकि, आमेर ने आगाह किया कि बैठक का स्वरूप प्रतीकात्मक अधिक रह सकता है, क्योंकि "क्रिटिकल मिनरल्स से लेकर ऊर्जा तक क्वाड के कई एजेंडे पर सदस्य देश आपस में द्विपक्षीय स्तर पर काम कर रहे हैं।"

ऑस्ट्रेलियन स्ट्रेटेजिक पॉलिसी इंस्टीट्यूट की वरिष्ठ निदेशक एम्मा चैनलेट-एवरी ने कहा, "बैठक टोक्यो, कैनबरा और नई दिल्ली के लिए स्वागत योग्य है।" हालांकि, उन्होंने आशंका जताई कि इसके एक दिन बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच संभावित त्रिपक्षीय शिखर बैठक की चर्चा क्वाड के प्रयासों पर हावी हो सकती है। उनके अनुसार, यह बैठक विश्व व्यवस्था की एक अलग तस्वीर पेश कर सकती है।

समुद्री सुरक्षा भी अटलांटा बैठक के प्रमुख मुद्दों में शामिल रहने की संभावना है। जयशंकर ने शुक्रवार को जी-20 विदेश मंत्रियों की पहली पूर्ण बैठक में अंतरराष्ट्रीय कानून, विशेषकर समुद्र के कानून पर, संयुक्त राष्ट्र अभिसमय (यूएनसीएलओएस) के तहत नौवहन की स्वतंत्रता बनाए रखने और हमलों को रोकने की तत्काल जरूरत पर जोर दिया।

उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा, "नागरिक जहाजों और नाविकों पर हमलों के परिणामों का बोझ ग्लोबल साउथ के देशों को असमान रूप से उठाना पड़ रहा है।"

ऊर्जा पर आयोजित जी-20 की दूसरी पूर्ण बैठक में जयशंकर ने भारत की स्वच्छ खाना पकाने की जरूरतों के लिए एलपीजी की भरोसेमंद और नियमित आपूर्ति की आवश्यकता दोहराई। वहीं, रूबियो ने कहा कि समुद्री और खाद्य सुरक्षा आर्थिक सुरक्षा के प्रमुख आधार हैं।

इस बीच, रूबियो, जापान के विदेश मंत्री मोतेगी और दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्री चो ह्यून ने शुक्रवार शाम 'त्रिपक्षीय आर्कटिक-पैसिफिक साझेदारी' स्थापित करने के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए।

ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री वोंग ने यह भी बताया कि उनका देश यूरोपीय संघ की अगुवाई वाली 'नो फीस/नो टोल्स' पहल में शामिल हो गया है। इसका उद्देश्य नौवहन की स्वतंत्रता को प्रभावित करने वाले गैरकानूनी शुल्क और टोल का विरोध करना है।

अटलांटा में क्वाड बैठक ऐसे समय हो रही है, जब अमेरिकी विदेश मंत्री रूबियो की भारत यात्रा को अभी एक सप्ताह ही हुआ है। जयशंकर ने शुक्रवार को जी-20 बैठक से इतर अर्जेंटीना, कनाडा, मेक्सिको, ब्राजील और जर्मनी के विदेश मंत्रियों के साथ भी मुलाकात की।

अटलांटा के बाद जयशंकर 1 से 4 नवंबर तक एंटीगुआ और बारबुडा में होने वाली राष्ट्रमंडल शासनाध्यक्षों की बैठक (सीएचओजीएम) में हिस्सा लेने जाएंगे।


Next Story

Related Stories

All Rights Reserved. Copyright @2019
Share it