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राष्ट्रपति ली : अमेरिका के साथ गठबंधन अहम

सोल, दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग ने मंगलवार को अमेरिका के साथ अपने देश के गठबंधन को बेहद अहम बताते हुए कहा कि कूटनीति में किसी भी तरह के दब्बूपन या दूसरे देश के सामने झुकने की नीति से बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि दक्षिण कोरिया की विदेश नीति का मूल सिद्धांत व्यावहारिकता है और राष्ट्रीय हितों की रक्षा सबसे महत्वपूर्ण है।

राष्ट्रपति ली : अमेरिका के साथ गठबंधन अहम
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सोल, दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग ने मंगलवार को अमेरिका के साथ अपने देश के गठबंधन को बेहद अहम बताते हुए कहा कि कूटनीति में किसी भी तरह के दब्बूपन या दूसरे देश के सामने झुकने की नीति से बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि दक्षिण कोरिया की विदेश नीति का मूल सिद्धांत व्यावहारिकता है और राष्ट्रीय हितों की रक्षा सबसे महत्वपूर्ण है।

योनहाप समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति ली ने कैबिनेट की बैठक में ये टिप्पणियां ऐसे समय कीं, जब सोल और वाशिंगटन के बीच संबंधों में तनाव की खबरें सामने आ रही हैं। अमेरिका की ओर से दक्षिण कोरिया के साथ खुफिया जानकारी साझा करने को लेकर कुछ अनबन की खबरें चर्चा में हैं।

ली ने कहा, "कूटनीति ऐसी होनी चाहिए, जिससे दक्षिण कोरिया की गरिमा बनी रहे और उसके राष्ट्रीय हितों की रक्षा हो। किसी भी परिस्थिति में दूसरे देश के सामने अनावश्यक रूप से झुकने या दब्बू रुख अपनाने से बचना चाहिए।"

उन्होंने कहा, “दक्षिण कोरिया की कूटनीति का सिद्धांत व्यावहारिकता है। देश के लिए सबसे महत्वपूर्ण उसके राष्ट्रीय हित हैं।”

हालांकि, राष्ट्रपति ने अमेरिका के साथ गठबंधन के महत्व को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि दक्षिण कोरिया-अमेरिका गठबंधन बेहद महत्वपूर्ण है और यह देश की कूटनीति का प्रमुख आधार है। इस गठबंधन को आगे और मजबूत करने की जरूरत है।

ली ने कहा, " देशों के बीच मतभेद होना स्वाभाविक है। ऐसे मतभेदों को लगातार चर्चा, बातचीत और समन्वय के जरिए सुलझाया जाना चाहिए। मतभेदों को इस स्तर तक सीमित रखा जाना चाहिए, जहां उन्हें प्रभावी ढंग से संभाला जा सके।"

दोनों देशों के बीच हालिया तनाव की एक वजह खुफिया जानकारी साझा करने का मुद्दा है। रिपोर्ट के अनुसार, दक्षिण कोरिया के एकीकरण मंत्री की उत्तर कोरिया के कुसोंग में यूरेनियम संवर्धन केंद्र होने संबंधी पिछली टिप्पणी के बाद वाशिंगटन ने आपत्ति जताई थी। माना जा रहा है कि अमेरिका ने इस बात पर चिंता व्यक्त की कि साझा की गई खुफिया जानकारी को एकतरफा तरीके से सार्वजनिक किया गया।

दक्षिण कोरिया के कुछ रूढ़िवादी मीडिया संस्थानों ने एकीकरण मंत्री पर अमेरिका के साथ गठबंधन को नुकसान पहुंचाने का आरोप भी लगाया है। हालांकि, राष्ट्रपति ली ने अपने बयान में गठबंधन को कमजोर करने के बजाय उसके भीतर मतभेदों को बातचीत के जरिए सुलझाने पर जोर दिया।

ली ने अमेरिका के साथ निवेश परियोजनाओं को लेकर हुए हालिया समझौते का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि लंबी बातचीत के बाद दक्षिण कोरिया ने ऐसे परिणाम हासिल किए, जो उसके राष्ट्रीय हितों के लिए बेहतर हैं। उनके अनुसार, सरकार आगे भी देश के हितों की रक्षा के लिए हरसंभव प्रयास करेगी।

राष्ट्रपति ने कहा, "जब भी मतभेद या गलतफहमियां सामने आएंगी, सरकार उन्हें दूर करने और संबंधित पक्षों के साथ समन्वय स्थापित करने की कोशिश करेगी।"

इस बीच, अमेरिका में दक्षिण कोरिया की राजदूत कांग क्यंग-व्हा ने सोमवार को वाशिंगटन में दक्षिण कोरियाई संसद की एक समिति के समक्ष कहा कि दोनों देशों के बीच खुफिया सहयोग में सुधार की दिशा में प्रगति हुई है। हालांकि, उन्होंने व्हाइट हाउस के साथ उच्चस्तरीय संवाद में अब भी कुछ सीमाएं होने की बात स्वीकार की।

कांग ने कहा कि व्हाइट हाउस के साथ संवाद में सीमाएं हैं। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि खुफिया जानकारी साझा करने का मुद्दा दोनों देशों के संबंधों में सबसे कठिन विषयों में से एक बना हुआ है।

दक्षिण कोरिया की सरकार के सामने अब अमेरिका के साथ रणनीतिक और सुरक्षा सहयोग को बनाए रखते हुए अपने राष्ट्रीय हितों और स्वतंत्र कूटनीतिक रुख के बीच संतुलन स्थापित करने की चुनौती है। राष्ट्रपति ली के ताजा बयान इसी संतुलन पर जोर देते हैं।


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