पाकिस्तान : केपी में कभी भी लग सकता है आपातकाल
पेशावर, पाकिस्तान के प्रांत खैबर पख्तूनख्वा में आपातकाल लगाने की तैयारी पूरी हो चुकी है और पुलिस प्रशासन को भी अलर्ट मोड पर रख दिया गया है। पाकिस्तान तहरीक-ए इंसाफ (पीटीआई) यहां सत्तारूढ़ दल है और मुख्यमंत्री फायर ब्रांड सोहेल अफरीदी हैं। उन्होंने रविवार को संघीय सरकार की इन कोशिशों को खुली चुनौती दी है।

पेशावर, पाकिस्तान के प्रांत खैबर पख्तूनख्वा में आपातकाल लगाने की तैयारी पूरी हो चुकी है और पुलिस प्रशासन को भी अलर्ट मोड पर रख दिया गया है। पाकिस्तान तहरीक-ए इंसाफ (पीटीआई) यहां सत्तारूढ़ दल है और मुख्यमंत्री फायर ब्रांड सोहेल अफरीदी हैं। उन्होंने रविवार को संघीय सरकार की इन कोशिशों को खुली चुनौती दी है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अफरीदी ने कहा, केपी के पुलिस इंस्पेक्टर जनरल जुल्फिकार हमीद ने शनिवार को जिला पुलिस को अलर्ट कर दिया है। अगर केंद्र सरकार प्रांत में इमरजेंसी लगाती है, तो हिंसक विरोध और तोड़फोड़ की आशंका पूरी है।
उन्होंने फिर चेतावनी भरे अंदाज में कहा, "आपातकाल या राज्यपाल शासन की घोषणा के बाद, लोग तुर्की का उदाहरण देना भूल जाएंगे।"
शायद उन्होंने प्रथम विश्व युद्ध के बाद हुए तुर्की राष्ट्रीय आंदोलन का जिक्र किया। ये आंदोलन व्यापक तौर पर ऑटोमन साम्राज्य के विघटन और मित्र राष्ट्रों के कब्जे के खिलाफ 1919 में शुरू हुआ था। इसका नेतृत्व मुस्तफा कमाल पाशा (अतातुर्क) ने किया था। बाद में मुस्तफा कमाल पाशा के नेतृत्व में 'तुर्की की ग्रैंड नेशनल असेंबली' का गठन हुआ था। फिर 1923 में रिपब्लिक ऑफ टर्की यानी आधुनिक तुर्की गणराज्य की स्थापना हुई और पाशा इसके पहले राष्ट्रपति बने थे।
केपी में आपातकाल की बात करें तो स्थानीय मीडिया ने भी दावा किया है कि आईजीपी (पुलिस महानिरीक्षक) कार्यालय से जारी एक नोटिफिकेशन में विरोध प्रदर्शनों से निपटने के लिए गाइडलाइन बताई गई है और चेतावनी दी गई है कि शरारती तत्व और सरकार विरोधी तत्व प्रदर्शनों का फायदा उठाकर हिंसा भड़का सकते हैं और तोड़फोड़ कर सकते हैं।
डॉन के अनुसार, इसमें कहा गया है, "विरोध प्रदर्शनों के दौरान जान-माल की सुरक्षा और तोड़फोड़ को रोकने के लिए, डीपीओ, सब-डिवीजनल पुलिस अधिकारियों और स्टेशन हाउस अधिकारियों को अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में सभी विरोध प्रदर्शनों पर खुद नजर रखनी चाहिए।"
नोटिफिकेशन में कहा गया है कि जिला पुलिस को यह पक्का करना चाहिए कि विरोध प्रदर्शनों के दौरान व्यवस्था बनाए रखने के लिए एसडीपीओ और एसएचओ को काफी लोग उपलब्ध कराए जाएं। “डिप्लॉयमेंट में एंटी-रॉयट गियर से लैस एंटी-रॉयट स्क्वॉड, रिजर्व इंस्पेक्टर या मोहर्रर के इस्तेमाल के लिए चेक और वेरिफाइड गैस गन और शेल की पर्याप्त सप्लाई, उपद्रवियों और हिंसक प्रदर्शनकारियों की पहचान करने और उन्हें पकड़ने के लिए बिना हथियार वाले लोगों की स्पेशल स्क्वॉड, और हिंसक प्रदर्शनकारियों, उपद्रवियों और तोड़फोड़ करने वालों की पहचान करने के लिए सादे कपड़ों में लोग शामिल होने चाहिए। हथियारबंद लोगों को सिर्फ़ बहुत ज़रूरी या सही जगहों पर ही बहुत ज़रूरी हालात में तैनात किया जाना चाहिए।”
इसमें यह भी कहा गया है कि अगर कोई व्यक्ति केपी पुलिस एक्ट, 2017 के सेक्शन 86(1) के तहत बंदूक या कोई ऐसी चीज ले जा रहा है, तो पुलिस उसे जब्त कर सकती है और पाकिस्तान पीनल कोड के सेक्शन 148 के तहत उस पर कानूनी कार्रवाई कर सकती है।
जियो न्यूज ने सूत्रों के हवाले से बताया कि संघीय कैबिनेट ने संविधान के अनुच्छेद 232 और 234 के तहत खैबर पख्तूनख्वा में आपातकाल और गवर्नर शासन लागू करने का फैसला किया है। यह फैसला संघीय कैबिनेट की बैठक में लिया गया है।


