अमेरिकी मानव तस्करी रिपोर्ट पर भड़का उत्तर कोरिया
सोल, उत्तर कोरिया ने अमेरिका की मानव तस्करी संबंधी रिपोर्ट की कड़ी आलोचना करते हुए इसे ‘राजनीति से प्रेरित गंभीर उकसावे’ की कार्रवाई करार दिया है।

सोल, उत्तर कोरिया ने अमेरिका की मानव तस्करी संबंधी रिपोर्ट की कड़ी आलोचना करते हुए इसे ‘राजनीति से प्रेरित गंभीर उकसावे’ की कार्रवाई करार दिया है। प्योंगयांग का आरोप है कि वाशिंगटन मानवाधिकारों के मुद्दे के जरिए उत्तर कोरिया के खिलाफ अपनी शत्रुतापूर्ण नीति को आगे बढ़ाने के लिए कर रहा है।
उत्तर कोरियाई विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने शनिवार को जारी बयान में अमेरिकी विदेश विभाग की 2026 की मानव तस्करी रिपोर्ट को "झूठ, मनगढ़ंत तथ्यों, पूर्वाग्रह और शत्रुता से भरा दस्तावेज" बताया। योनहाप न्यूज एजेंसी ने बताया कि उत्तर कोरिया की सरकारी समाचार एजेंसी केसीएनए ने इस बयान को प्रकाशित किया।
अमेरिकी विदेश विभाग ने गुरुवार को जारी अपनी रिपोर्ट में उत्तर कोरिया को मानव तस्करी रोकने के प्रयासों के मामले में सबसे निचली श्रेणी ‘टियर-3’ में रखा है। इस श्रेणी में चीन, रूस, ईरान और क्यूबा भी शामिल हैं। उत्तर कोरिया लगातार 24वें वर्ष इस श्रेणी में रखा गया है।
उत्तर कोरियाई प्रवक्ता ने आरोप लगाया, "अमेरिका मानवाधिकारों को राजनीतिक हथियार बनाकर देश की संप्रभुता और आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करना चाहता है।" उसने रिपोर्ट को खारिज करते हुए कहा, "इस तरह के दस्तावेजों का इस्तेमाल दूसरे देशों की राजनीतिक और सामाजिक व्यवस्था को बदलने के औचित्य के रूप में किया जाता है।"
प्रवक्ता ने चेतावनी दी कि उत्तर कोरिया के संप्रभु अधिकारों और नागरिकों के हितों के लिए खतरा पैदा करने वाली अमेरिकी मानवाधिकार नीति के खिलाफ कड़ी जवाबी कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, बयान में किसी विशिष्ट कार्रवाई का विवरण नहीं दिया गया।
अमेरिकी रिपोर्ट में उत्तर कोरिया की सरकार पर राजनीतिक कैद शिविरों और श्रम प्रशिक्षण केंद्रों में मानव तस्करी से जुड़े मामलों को संस्थागत रूप देने का आरोप लगाया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, देश में जबरन श्रम का इस्तेमाल राजनीतिक दमन की व्यवस्था के हिस्से के रूप में किया जाता है और इससे प्राप्त धन का उपयोग सरकारी कामकाज के लिए किया जाता है।
रिपोर्ट में विदेशों में काम करने वाले उत्तर कोरियाई नागरिकों की स्थिति पर भी चिंता जताई गई है। अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार, "इनमें से कई लोगों को अत्यधिक काम करने के लिए मजबूर किया जाता है। कुछ को खतरनाक परिस्थितियों में काम करना पड़ता है और उनके पासपोर्ट तक उनकी पहुंच नहीं होती।"
उत्तर कोरिया ने इन आरोपों को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताते हुए खारिज किया है। इस विवाद से दोनों देशों के बीच मानवाधिकारों को लेकर जारी मतभेद एक बार फिर सामने आए हैं।


