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नेतन्याहू के लिकुड ब्लॉक ने 53 सीटें जीतीं: इजरायल चुनाव नतीजे

यरूशलेम, सेंट्रल इलेक्शन कमेटी (सीईसी) की ओर से शुक्रवार सुबह जारी किए गए 2026 के चुनावों के अंतिम नतीजों के अनुसार, 26वीं नेसेट (संसद) में किसी भी राजनीतिक गुट को बहुमत नहीं मिला है।

नेतन्याहू के लिकुड ब्लॉक ने 53 सीटें जीतीं: इजरायल चुनाव नतीजे
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यरूशलेम, सेंट्रल इलेक्शन कमेटी (सीईसी) की ओर से शुक्रवार सुबह जारी किए गए 2026 के चुनावों के अंतिम नतीजों के अनुसार, 26वीं नेसेट (संसद) में किसी भी राजनीतिक गुट को बहुमत नहीं मिला है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के नेतृत्व वाले लिकुड गुट को 53 सीटें मिली हैं, गादी आइसेनकोट की 'यशार' पार्टी के नेतृत्व वाले विपक्षी गुट को 48 सीटें मिली हैं, जबकि बाकी 19 सीटें अरब गुटों के खाते में गई हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, अगली सरकार बनाने की प्रक्रिया काफी चुनौतीपूर्ण हो सकती है और इसमें दो महीने से ज्यादा का समय लग सकता है, क्योंकि कोई भी राजनीतिक गुट बहुमत के लिए जरूरी 61 सीटों के आंकड़े के करीब नहीं पहुंच पाया है। इस बार कुल 77.9 प्रतिशत पात्र मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया, जो पिछले कई दशकों में सबसे अधिक है।

बुधवार को हर्जोग ने राजनीतिक नेताओं से अपील की कि वे एक और चुनाव की नौबत आने से रोकने के लिए हर संभव कोशिश करें। उन्होंने सरकार गठन की बातचीत में शामिल लोगों से खुले मन के साथ इस प्रक्रिया में आगे बढ़ने का आग्रह किया।

'द टाइम्स ऑफ इजरायल' के अनुसार, हर्जोग ने कहा, "खासकर कल के नतीजों के बाद, हमें एक और चुनाव से बचने के लिए हर मुमकिन कोशिश करनी चाहिए। इसलिए, मेरी उम्मीद है कि जो भी यहां आए, वह खुले मन के साथ आए।"

नेतन्याहू और आइसेनकोट, दोनों ने ही दावा किया है कि अगली सरकार वे ही बनाएंगे। इससे पहले, इस हफ्ते की शुरुआत में यरूशलेम में लिकुड पार्टी के चुनाव मुख्यालय में समर्थकों को संबोधित करते हुए नेतन्याहू ने भारी बहुमत हासिल करने की बात कही थी। उन्होंने एक 'मजबूत दक्षिणपंथी सरकार' बनाने का आह्वान किया।

नेतन्याहू ने उन पार्टियों की भी आलोचना की थी, जो अरब पार्टियों के साथ मिलकर काम करने को तैयार हैं, और ऐसी व्यवस्था को 'शर्मनाक' करार दिया था।

मंगलवार को हुए चुनाव 7 अक्टूबर 2023 को हमास द्वारा किए गए हमले के बाद पहली बार हुए हैं। 2022 के चुनावों के बाद से इजरायल के राजनीतिक परिदृश्य में बड़े बदलाव आए हैं और मतदाताओं की प्राथमिकताओं को तय करने वाले मुद्दों में भी काफी अंतर आया है।


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