नेतन्याहू ने ईरान पर हमलों किया बचाव
संयुक्त राष्ट्र, संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करते हुए इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरान पर की गई बमबारी का बचाव करते हुए दावा किया कि अगर हमने ऐसा नहीं किया होता, तो हम सभी मारे गए होते।

संयुक्त राष्ट्र, संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करते हुए इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरान पर की गई बमबारी का बचाव करते हुए दावा किया कि अगर हमने ऐसा नहीं किया होता, तो हम सभी मारे गए होते।
उन्होंने कहा कि ईरान पर इजरायल और अमेरिका ने मिलकर कार्रवाई की। यह सिर्फ खुद को बचाने के लिए नहीं, बल्कि सभ्यता को बचाने के लिए भी था। उन्होंने कहा, "इस लड़ाई में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से बड़ा हमारा कोई साझेदार नहीं रहा।"
नेतन्याहू ने गाजा में फिलिस्तीनियों के खिलाफ 'नरसंहार' करने के आरोपों को भी खारिज किया। उन्होंने इसे इस सदी का सबसे बड़ा झूठ बताया।
अमेरिका और इजरायल ने ईरान में कई ठिकानों पर बमबारी की, जिसमें ईरान के सुप्रीम अली खामेनेई समेत कई अन्य नेता मारे गए।
हालांकि, इसके बाद ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को बंद कर दिया। दुनिया की करीब 20 प्रतिशत पेट्रोलियम और गैस सप्लाई इस समुद्री मार्ग से गुजरती है और इसके बंद होने से कई देशों को प्रभावित करने वाला आर्थिक संकट पैदा हो गया। फिलहाल यह संघर्ष अभी भी जारी है।
जब नेतन्याहू भाषण देने के लिए मंच पर पहुंचे, तो कई देशों के प्रतिनिधि हॉल से बाहर निकल गए। इस पर नेतन्याहू ने उन्हें 'कायर' कहा। वहीं उनके समर्थकों ने हिब्रू में 'एम इजरायल चाई' के नारे लगाए, जिसका मतलब है, 'इजरायल की कौम जिंदा है।'
नेतन्याहू ने इजरायल को एक ऐसे ताकतवर देश के तौर पर पेश किया, जो उनके मुताबिक सात मोर्चों पर लड़ रहा है। उन्होंने इनमें हमास, हिज्बुल्लाह, हूती, ईरान, इराक के हथियारबंद गुट, सीरिया के हथियारबंद गुट और वेस्ट बैंक में फिलिस्तीनी लड़ाकों का नाम लिया।
उन्होंने कहा कि वे सभी हमें धरती से मिटाने के लिए हमारे खिलाफ एकजुट हुए। वे नाकाम रहे। अक्टूबर 2023 में गाजा से हमास के इजरायल पर हमले का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि हम टूटे नहीं। इसके बजाय हम उठ खड़े हुए और शेरों की तरह लड़े।
लेख के मुताबिक, इजरायल की बड़े पैमाने पर की गई जवाबी कार्रवाई में 70 हजार लोगों के मारे जाने की बात कही गई है।
नेतन्याहू से पहले बोलने वाले फिलिस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास ने इजरायल पर गाजा में 'नरसंहार वाला युद्ध' चलाने का आरोप लगाया था।
इसके जवाब में नेतन्याहू ने कहा कि इजरायल पर नरसंहार का आरोप लगाना इस सदी का सबसे बड़ा झूठ है।'
उन्होंने सवाल किया कि अगर इजरायल वास्तव में नरसंहार करने वाला शासन होता, तो क्या वह विरोधी पक्ष की आबादी को 10 लाख पोलियो वैक्सीन देता या गाजा में 20 लाख टन खाना बांटने की अनुमति देता।
नेतन्याहू ने अपने भाषण में कई नेताओं की आलोचना भी की। इनमें तुर्किये के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगान भी शामिल थे। नेतन्याहू ने उन्हें 'तानाशाह' बताते हुए आरोप लगाया कि वह हमास के नेताओं को भी अपने देश में जगह देते हैं।
उन्होंने पश्चिमी देशों के नेताओं पर आरोप लगाया कि उन्होंने 'यहूदी-विरोधी भीड़ के सामने झुकने का रास्ता चुना है।'
कुछ देशों ने वेस्ट बैंक से आने वाले इजरायली उत्पादों पर सीमित पाबंदियां लगाई हैं। लेख के मुताबिक, ऐसा करने वाले देशों में हाल में ब्रिटेन भी शामिल हुआ है।
नेतन्याहू ने कहा कि आजाद दुनिया में बहुत से लोग आजादी का बचाव करने से डरते हैं। उन्होंने वेस्ट बैंक में फिलिस्तीनियों पर होने वाले हमलों को ज्यादा बड़ा मुद्दा मानने से इनकार किया और इनके लिए कुछ गिने-चुने उपद्रवियों को जिम्मेदार बताया।


