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'जमीर इजाजत नहीं देता' कह जज ने दिया इस्तीफा: पाकिस्तान

लाहौर, पाकिस्तान में न्यायपालिका पर कार्यपालिका के बढ़ते नियंत्रण से दुखी लाहौर हाईकोर्ट (एलएचसी) के जस्टिस मोहसिन अख्तर कयानी ने बुधवार को इस्तीफा दे दिया।

जमीर इजाजत नहीं देता कह जज ने दिया इस्तीफा: पाकिस्तान
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लाहौर, पाकिस्तान में न्यायपालिका पर कार्यपालिका के बढ़ते नियंत्रण से दुखी लाहौर हाईकोर्ट (एलएचसी) के जस्टिस मोहसिन अख्तर कयानी ने बुधवार को इस्तीफा दे दिया। स्थानीय मीडिया ने इसकी जानकारी दी।

प्रमुख अंग्रेजी मीडिया आउटलेट डॉन ने पाकिस्तान के राष्ट्रपति को लिखे त्यागपत्र के हवाले से जस्टिस कयानी के दर्द को बयां किया। उन्होंने कहा, "अपने कार्यकाल के दौरान, मैंने विभिन्न श्रेणियों के 23,000 से अधिक मामलों का निपटारा किया। इस दौरान मेरी हमेशा यही कोशिश रही कि संविधान का सम्मान हो, मौलिक अधिकारों की रक्षा की जाए और बिना किसी डर या पक्षपात के न्याय किया जाए।"

हालांकि, उन्होंने आगे कहा, "मेरी राय में, 26वें और 27वें संवैधानिक संशोधनों के जरिए किए गए बदलावों ने उच्च न्यायालयों की स्वतंत्रता और उनकी संस्थागत अखंडता को नुकसान पहुंचाया है। मैंने देखा है कि न्यायिक संस्थाओं पर कार्यपालिका (सरकार) का नियंत्रण बढ़ता जा रहा है, जो अब न्यायाधीशों की नियुक्ति और तबादले तक पहुंच गया है। मेरे आकलन के अनुसार, इस तरह के हस्तक्षेप ने न्यायिक स्वतंत्रता और न्यायिक प्रक्रिया की निष्पक्षता पर जनता के भरोसे को बुरी तरह कम कर दिया है।"

जस्टिस कयानी ने कहा कि सबसे चिंताजनक बात आम वादी (न्याय मांगने वाले व्यक्ति) की दुर्दशा है, "जो न्याय प्रणाली का मुख्य पक्षकार है, लेकिन जिसकी तकलीफें लगातार बढ़ती जा रही हैं।"

उन्होंने कहा कि न्याय मांगने वालों की जरूरतों को अक्सर नजरअंदाज किया गया है, जबकि अन्य लोग "उस व्यवस्था का फायदा उठा रहे हैं, जिसे असल में इन्हीं लोगों की सेवा के लिए बनाया गया था।"

"ऐसे हालात में, मेरा जमीर मुझे इस पद पर बने रहने की इजाजत नहीं देता। यह एक बहुत ही कठिन फैसला है, लेकिन यह मेरे इस दृढ़ विश्वास को दर्शाता है कि न्यायिक पद पर रहने वाले व्यक्ति के लिए स्वतंत्रता, संविधान के प्रति निष्ठा और मानवीय गरिमा की रक्षा करना अनिवार्य है।"

उन्होंने आगे कहा, "इसलिए, मुझे लगता है कि अब समय आ गया है कि मैं अपना न्यायिक पद छोड़ दूं और वापस वकालत (कानूनी प्रैक्टिस) में लौट जाऊं। इसके जरिए मैं लोगों की सेवा करना, उनके अधिकारों की रक्षा करना और कानूनी जागरूकता को बढ़ावा देना जारी रखूंगा।"

कयानी का कार्यकाल 10 फरवरी, 2032 तक था, लेकिन उन्होंने तय समय से पहले ही रिटायरमेंट का ऐलान कर दिया। वह इस्लामाबाद के रहने वाले हैं और अप्रैल में एलएचसी में स्थानांतरित होने से पहले आईएचसी में कार्यरत थे। उन्हें लाहौर में एलएचसी की प्रमुख सीट सौंपी गई थी।


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