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जयशंकर : रूस-यूक्रेन संघर्ष पर भारत की तीन सूत्रीय पहल

अटलांटा, रूस और यूक्रेन के बीच जारी संघर्ष को सीमित करने और उसके वैश्विक प्रभावों को कम करने के लिए भारत तीन प्रमुख मुद्दों पर दोनों देशों और यूरोप के साथ बातचीत कर रहा है। इनमें नागरिक जहाजों और नाविकों पर हमले रोकना, काला सागर के रास्ते अनाज का निर्यात बहाल करना और ऊर्जा से जुड़े बुनियादी ढांचे पर हमले रोकने का रास्ता तलाशना शामिल है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शनिवार को इसकी जानकारी दी।

जयशंकर : रूस-यूक्रेन संघर्ष पर भारत की तीन सूत्रीय पहल
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अटलांटा, रूस और यूक्रेन के बीच जारी संघर्ष को सीमित करने और उसके वैश्विक प्रभावों को कम करने के लिए भारत तीन प्रमुख मुद्दों पर दोनों देशों और यूरोप के साथ बातचीत कर रहा है। इनमें नागरिक जहाजों और नाविकों पर हमले रोकना, काला सागर के रास्ते अनाज का निर्यात बहाल करना और ऊर्जा से जुड़े बुनियादी ढांचे पर हमले रोकने का रास्ता तलाशना शामिल है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शनिवार को इसकी जानकारी दी।

अटलांटा, 1 नवंबर (आईएएनएस)। रूस और यूक्रेन के बीच जारी संघर्ष को सीमित करने और उसके वैश्विक प्रभावों को कम करने के लिए भारत तीन प्रमुख मुद्दों पर दोनों देशों और यूरोप के साथ बातचीत कर रहा है। इनमें नागरिक जहाजों और नाविकों पर हमले रोकना, काला सागर के रास्ते अनाज का निर्यात बहाल करना और ऊर्जा से जुड़े बुनियादी ढांचे पर हमले रोकने का रास्ता तलाशना शामिल है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शनिवार को इसकी जानकारी दी।

अटलांटा में जी20 विदेश मंत्रियों की बैठक के समापन पर भारतीय पत्रकारों से बातचीत में जयशंकर ने कहा, "भारत ने रूस, यूक्रेन और यूरोपीय देशों के साथ संघर्ष के इन तीन पहलुओं पर चर्चा की है। भारत की कोशिश है कि ऐसे व्यावहारिक रास्ते निकाले जाएं, जिनसे युद्ध के बीच भी आम नागरिकों, वैश्विक व्यापार और खाद्य एवं ऊर्जा आपूर्ति को नुकसान से बचाया जा सके।"

जयशंकर ने कहा, "हमने रूस के साथ बातचीत की है। यूरोप के साथ भी चर्चा की है और यूक्रेन से भी इन तीन पहलुओं पर बात हुई है। पहला, नागरिक जहाजों और नाविकों पर हमला नहीं होना चाहिए। दूसरा, रूस और यूक्रेन दोनों से अनाज का निर्यात बहाल करने का रास्ता तलाशना है, क्योंकि काला सागर में इसका प्रवाह काफी कम हो गया है। तीसरा मुद्दा ऊर्जा से जुड़ा है।"

उन्होंने माना कि ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हमले रोकने का मुद्दा बाकी दोनों विषयों की तुलना में अधिक जटिल है, क्योंकि अलग-अलग पक्षों के लिए ऊर्जा ढांचे की परिभाषा अलग-अलग हो सकती है।

विदेश मंत्री ने कहा, "ऊर्जा पर हमला नहीं करने का मुद्दा शायद सबसे जटिल है, क्योंकि अलग-अलग पक्ष इसे अलग-अलग तरह से देखते हैं। किसी के लिए ऊर्जा बुनियादी ढांचे का मतलब तेल रिफाइनरी है, तो किसी के लिए बिजली ग्रिड। ईंधन ले जाने वाले जहाजों से जुड़े मुद्दे भी हैं। इसलिए हम कोशिश कर रहे हैं कि सभी पक्षों को एक साथ लाकर इन विषयों पर बातचीत की जा सके।"

अनाज निर्यात का मुद्दा भारत के लिए केवल रूस और यूक्रेन के बीच व्यापार तक सीमित नहीं है। इसका सीधा संबंध उन विकासशील देशों से भी है, जो अपनी खाद्य जरूरतों के लिए काला सागर क्षेत्र से होने वाली आपूर्ति पर निर्भर हैं। जयशंकर ने कहा कि अनाज का मुद्दा ग्लोबल साउथ के लिए बड़ी चिंता है, क्योंकि इसके प्रमुख खरीदारों में विकासशील देशों की बड़ी संख्या शामिल है।

भारत की इस पहल का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि वह दोनों पक्षों के साथ अपने उच्चस्तरीय संपर्क बनाए हुए है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ बातचीत के अलावा विदेश मंत्री ने भी मास्को और कीव का दौरा किया है। इस दौरान रूस और यूक्रेन दोनों के नेतृत्व के साथ संवाद जारी रखा गया है।

जयशंकर ने कहा, "प्रधानमंत्री ने दिल्ली में और उससे पहले बिश्केक में राष्ट्रपति पुतिन के साथ बातचीत की थी। वह खुद पहले मास्को गए थे और रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के साथ भी इस विषय पर चर्चा कर चुके हैं। इसके बाद उन्होंने कीव का दौरा किया और यूक्रेनी पक्ष के साथ संपर्क बनाए रखा है।"

भारत ने अमेरिका को भी अपनी बातचीत और प्रयासों से अवगत कराया है। जयशंकर के मुताबिक, अमेरिका की अपनी शांति मध्यस्थता पहल है और भारत उसके साथ समन्वय कर रहा है।

उन्होंने कहा, "हम इस मामले में अमेरिका के साथ भी समन्वय कर रहे हैं, क्योंकि उनकी अपनी शांति मध्यस्थता कर रहे हैं। विदेश मंत्री मार्को रूबियो को मोटे तौर पर पता है कि इस दिशा में क्या बातचीत चल रही है।"

हालांकि, जयशंकर ने बातचीत की मौजूदा स्थिति और संभावित प्रगति के बारे में सार्वजनिक रूप से अधिक जानकारी देने से परहेज किया। उन्होंने कहा, "अभी मैं इसका ब्योरा सार्वजनिक नहीं कर सकता।"

जी20 विदेश मंत्रियों की बैठक में भारत का व्यापक संदेश भी इसी कूटनीतिक दृष्टिकोण पर केंद्रित रहा। जयशंकर ने कहा, "दुनिया के सामने व्यापक प्रभाव डालने वाले दोनों बड़े संघर्षों का सैन्य समाधान नहीं हो सकता। इसके लिए कूटनीतिक रास्ता तलाशना जरूरी है और भारत अपनी ओर से इस दिशा में सक्रिय भूमिका निभा रहा है।"

जी20 बैठक से इतर जयशंकर ने रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव से भी मुलाकात की। इस मुलाकात के बाद सोशल मीडिया मंच एक्स पर उन्होंने बताया कि दोनों नेताओं के बीच यूक्रेन संघर्ष, खाड़ी क्षेत्र की स्थिति और बहुपक्षीय मुद्दों पर चर्चा हुई।


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