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भारत-अमेरिका : टैर‍िफ घटाने के बदले अमेरिकी फल-सोयाबीन-वाइन को भारतीय बाजार में एंट्री

वाशिंगटन, भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते के पहले चरण को अंतिम रूप देने की दिशा में तेजी से काम चल रहा है। हालांकि, अमेरिकी डेयरी उत्पादों को भारतीय बाजार में ज्यादा पहुंच देने का मुद्दा अभी भी सबसे बड़ी अड़चन बना हुआ है। इसी बीच अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो भारत दौरे पर आ रहे हैं।

भारत-अमेरिका : टैर‍िफ घटाने के बदले अमेरिकी फल-सोयाबीन-वाइन को भारतीय बाजार में एंट्री
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वाशिंगटन, भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते के पहले चरण को अंतिम रूप देने की दिशा में तेजी से काम चल रहा है। हालांकि, अमेरिकी डेयरी उत्पादों को भारतीय बाजार में ज्यादा पहुंच देने का मुद्दा अभी भी सबसे बड़ी अड़चन बना हुआ है। इसी बीच अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो भारत दौरे पर आ रहे हैं।

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने शुक्रवार को लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट को लागू करने और रूसी तेल के खरीदारों पर इसके टैरिफ को माफ करने के आदेश पर हस्ताक्षर किए।

इस व्यापार बातचीत का मूल उद्देश्य एक तरह का लेनदेन है। अमेरिका भारतीय सामानों पर कम और स्थिर टैरिफ देना चाहता है, जबकि बदले में भारत अमेरिकी उत्पादों के लिए अपने बाजार में ज्यादा पहुंच देने पर विचार कर रहा है।

फरवरी में घोषित रूपरेखा के तहत, अमेरिका ने भारतीय वस्तुओं पर लगाया जाने वाला पारस्परिक टैरिफ 25 फीसदी से घटाकर 18 फीसदी कर दिया। इसके अलावा, भारत की ओर से रूसी तेल खरीदने से जुड़े अतिरिक्त 25 फीसदी शुल्क को भी हटा दिया गया।

बदले में भारत ने अमेरिकी औद्योगिक उत्पादों और कई कृषि वस्तुओं पर टैरिफ घटाने या खत्म करने की सहमति दी है। इनमें मेवे, फल, सोयाबीन तेल, वाइन और अन्य शराब उत्पाद शामिल हैं।

वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने गुरुवार को कहा कि समझौते का पहला चरण तय हो चुका है और फिलहाल इसके कानूनी दस्तावेज तैयार किए जा रहे हैं। हालांकि, इसे लागू करने से पहले भारत को अपने प्रतिस्पर्धी लाभ से जुड़े कुछ पहलुओं पर स्पष्टता चाहिए।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा है कि बातचीत अब अंतिम पड़ाव के काफी करीब पहुंच चुकी है। वहीं, अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर ने 2 अक्टूबर को कहा था कि समझौता अभी तुरंत होने वाला नहीं है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को उम्मीद जताई कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौता जल्द पूरा होगा, क्योंकि इससे वैश्विक व्यापार और दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को फायदा मिलेगा।

न्यूयॉर्क स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास ने शुक्रवार को 'एक्‍स' पर बताया कि सितंबर 2026 में भारत का वस्तु निर्यात 23 फीसदी बढ़कर 44.4 अरब डॉलर पहुंच गया, जबकि व्यापार घाटा भी कम हुआ है।

व्यापार असंतुलन को कम करने के लिए भारत अमेरिका से वाणिज्यिक विमान, कोकिंग कोल, सोना, ऊर्जा और रक्षा उपकरण जैसी बड़ी खरीद कर सकता है।

ऊर्जा के मामले में भारत के सामने व्यावहारिक चुनौतियां भी हैं। भारत की ज्यादातर रिफाइनरियां मध्यम श्रेणी के सल्फरयुक्त कच्चे तेल के हिसाब से बनी हैं, जो मुख्य रूप से खाड़ी देशों और रूस से मिलता है। अमेरिकी हल्के कच्चे तेल को इसमें कुछ हद तक मिलाया जा सकता है, लेकिन इसकी भी एक सीमा है।

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण होर्मुज स्‍ट्रेट से होने वाला जहाजरानी मार्ग प्रभावित हुआ है। ऐसे में रूसी तेल की आपूर्ति को तुरंत किसी दूसरे स्रोत से बदलना आसान नहीं है।

दूसरी ओर, भारत ने अमेरिकी गैस की खरीद काफी बढ़ा दी है। 'केप्लर' के आंकड़ों के मुताबिक, मार्च से मई 2026 की तिमाही में अमेरिका पहली बार भारत का सबसे बड़ा एलएनजी (तरलीकृत प्राकृतिक गैस) आपूर्तिकर्ता बना।

अगस्त में भारत के एलपीजी (रसोई गैस) आयात का आधे से ज्यादा हिस्सा अमेरिका से आया था। हालांकि सितंबर में खाड़ी देशों से आपूर्ति बढ़ने के बाद यूएई फिर से सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता बन गया।

मार्को रुबियो 17 अक्टूबर से 22 अक्टूबर तक समरकंद, मुंबई और जामनगर का दौरा करेंगे। 20 अक्टूबर को मुंबई में उनकी विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ बैठक होने वाली है।

उधर, 3 नवंबर को होने वाले मध्यावधि चुनावों से पहले अमेरिका में ईंधन की बढ़ती कीमतें भी चिंता का विषय हैं। इसी वजह से वॉशिंगटन भी तेल और गैस की आपूर्ति में किसी बड़े व्यवधान से बचना चाहता है।


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