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भारत-न्यूजीलैंड : व्यापार समझौते से इंजीनियरिंग निर्यात को बढ़ावा मिलने की उम्मीद

नई दिल्ली, भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) से भारत के इंजीनियरिंग क्षेत्र के लिए नए अवसर खुलने की उम्मीद है। अगले पांच वर्षों में न्यूजीलैंड को भारत का इंजीनियरिंग निर्यात दोगुना होने का अनुमान है। यह जानकारी ईईपीसी इंडिया के अध्यक्ष पंकज चड्ढा की ओर से दी गई।

भारत-न्यूजीलैंड : व्यापार समझौते से इंजीनियरिंग निर्यात को बढ़ावा मिलने की उम्मीद
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नई दिल्ली, भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) से भारत के इंजीनियरिंग क्षेत्र के लिए नए अवसर खुलने की उम्मीद है। अगले पांच वर्षों में न्यूजीलैंड को भारत का इंजीनियरिंग निर्यात दोगुना होने का अनुमान है। यह जानकारी ईईपीसी इंडिया के अध्यक्ष पंकज चड्ढा की ओर से दी गई।

चड्ढा ने कहा कि न्यूजीलैंड भारतीय इंजीनियरिंग वस्तुओं के लिए अपेक्षाकृत छोटा बाजार है, लेकिन इसमें विकास की काफी संभावनाएं हैं। उन्होंने व्यापार समझौते से पैदा होने वाले अवसरों को लेकर भी आशावान रुख जताया।

उन्होंने कहा, “भारत-न्यूजीलैंड एफटीए आज लागू हो गया है, जिससे इंजीनियरिंग क्षेत्र के लिए नए अवसर खुल गए हैं। भारतीय इंजीनियरिंग क्षेत्र के लिए न्यूजीलैंड अपेक्षाकृत छोटा बाजार है, लेकिन इसमें काफी संभावनाएं हैं।”

भारत का न्यूजीलैंड को इंजीनियरिंग निर्यात 2024-25 में 12.98 करोड़ डॉलर से बढ़कर 2025-26 में 14.05 करोड़ डॉलर हो गया। एफटीए लागू होने से भारतीय निर्माताओं को इस बाजार में नए अवसर तलाशने में मदद मिलेगी, जिससे निर्यात को और गति मिलने की उम्मीद है।

भारत से न्यूजीलैंड को निर्यात की जाने वाली प्रमुख इंजीनियरिंग वस्तुओं में ऑटोमोबाइल, डेयरी क्षेत्र में इस्तेमाल होने वाली औद्योगिक मशीनरी, चिकित्सा एवं वैज्ञानिक उपकरण, कार्यालय संबंधी उपकरण एवं लोहा और इस्पात उत्पाद शामिल हैं।

चड्ढा ने कहा कि यह समझौता भारतीय इंजीनियरिंग निर्यातकों, विशेष रूप से सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के लिए अपने उत्पाद पोर्टफोलियो में विविधता लाने और न्यूजीलैंड के बाजार में अपनी मौजूदगी बढ़ाने के अवसर पैदा करेगा।

उन्होंने कहा, “न्यूजीलैंड के साथ एफटीए इंजीनियरिंग वस्तुओं के निर्यातकों, विशेष रूप से एमएसएमई को अपने उत्पाद पोर्टफोलियो में विविधता लाने का अवसर प्रदान करता है।”

उन्होंने आगे कहा कि न्यूजीलैंड के साथ इंजीनियरिंग व्यापार संबंध मजबूत होने से वर्ष 2030 तक भारत के 250 अरब डॉलर के इंजीनियरिंग निर्यात लक्ष्य को हासिल करने की व्यापक महत्वाकांक्षा को भी बढ़ावा मिलेगा।

ईईपीसी इंडिया को उम्मीद है कि अगले पांच वर्षों में न्यूजीलैंड को भारत का इंजीनियरिंग निर्यात बढ़कर 28-30 करोड़ डॉलर तक पहुंच जाएगा। यह 2025-26 में दर्ज निर्यात के स्तर से लगभग दोगुना होगा।


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