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फ्रांस पर लगाया दोहरे मापदंड का आरोप : ईरानी

न्यूयॉर्क, संयुक्त राष्ट्र महासभा में शामिल होने गए ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने फ्रांस के अपने समकक्ष जीन-नोएल बारो से मुलाकात की। इसके बाद उन्होंने में ईरान को लेकर पेरिस के रुख की निंदा की और मानवाधिकारों के मामले में “दोहरे मापदंड” अपनाने का आरोप लगाया। दोनों के बीच मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र से इतर न्यूयॉर्क में मुलाकात हुई।

फ्रांस पर लगाया दोहरे मापदंड का आरोप : ईरानी
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न्यूयॉर्क, संयुक्त राष्ट्र महासभा में शामिल होने गए ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने फ्रांस के अपने समकक्ष जीन-नोएल बारो से मुलाकात की। इसके बाद उन्होंने में ईरान को लेकर पेरिस के रुख की निंदा की और मानवाधिकारों के मामले में “दोहरे मापदंड” अपनाने का आरोप लगाया। दोनों के बीच मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र से इतर न्यूयॉर्क में मुलाकात हुई।

अराघची ने बैठक के बाद अपने टेलीग्राम चैनल पर कहा कि उन्होंने ईरान के प्रति फ्रांस के “हस्तक्षेपवादी” रुख पर अपनी आपत्ति दर्ज कराई। उन्होंने तेहरान स्थित फ्रांसीसी दूतावास से ईरान के राष्ट्रीय कानूनों और नियमों का सम्मान करने को भी कहा।

ईरानी विदेश मंत्री ने क्षेत्रीय घटनाक्रम को लेकर फ्रांस की स्थिति को भी निशाने पर लिया। उन्होंने कहा, " ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल की सैन्य कार्रवाई को लेकर फ्रांस का रुख अस्वीकार्य है। हम फ्रांस सहित सभी देशों के साथ आपसी सम्मान और साझा हितों के आधार पर संबंध रखना चाहते हैं, लेकिन अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए दृढ़ रुख अपनाएंगे।"

मानवाधिकारों के मुद्दे पर अराघची ने फ्रांस पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, "पेरिस एक तरफ मानवाधिकारों को लेकर चिंता जताता है, लेकिन दूसरी ओर अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरानी लोगों के खिलाफ किए गए मानवता के खिलाफ अपराधों पर चुप रहता है।" ईरानी विदेश मंत्री ने विशेष रूप से आम नागरिकों और बच्चों की मौत का उल्लेख किया।

यह पहली बार नहीं है जब अराघची ने बारो की ईरान नीति को लेकर सार्वजनिक रूप से कड़ी प्रतिक्रिया दी है। इससे पहले भी दोनों देशों के विदेश मंत्रियों के बीच मानवाधिकार और ईरान पर अमेरिकी सैन्य कार्रवाई को लेकर तीखी बयानबाजी हो चुकी है। अराघची ने सोशल मीडिया पर फ्रांस के औपनिवेशिक अतीत का हवाला देते हुए बारो की आलोचना की थी।

वहीं फ्रांस की ओर से बैठक के बाद जारी बयान में कहा गया कि बारो ने अराघची से कूटनीतिक रास्ते पर फिर से जुड़ने का आह्वान किया। फ्रांस ने कहा, "वह मौजूदा संघर्ष का कूटनीतिक समाधान तलाशने में योगदान देने के लिए तैयार है और ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी चिंताओं का समाधान भी बातचीत के जरिए किया जाना चाहिए।"

बारो ने होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने को भी प्राथमिकता बताया। फ्रांस के अनुसार, इस जलमार्ग में मौजूदा अवरोध क्षेत्रीय स्थिरता के साथ वैश्विक ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय कानून, नौवहन की स्वतंत्रता और समुद्री सुरक्षा के प्रति फ्रांस की प्रतिबद्धता दोहराई।

फ्रांस और ईरान के बीच हाल के दिनों में तनाव बढ़ा है। फ्रांस ने तेहरान में अपने राजनयिक प्रतिष्ठानों और कर्मचारियों के खिलाफ हुई घटनाओं पर आपत्ति जताई है। वहीं ईरान ने फ्रांस पर अपने आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने का आरोप लगाया है।


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