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समुद्र में सहयोग मजबूत करने का प्रयास

नई दिल्ली, भविष्य की नौसैनिक चुनौतियों के लिए तैयार रहने व उन्हें दिशा के लिए भारत और ब्रिटेन ने मिलकर कदम बढ़ाए हैं। इस सिलसिले में दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच 17वीं कार्यकारी संचालन समूह की बैठक नई दिल्ली में आयोजित की गई।

समुद्र में सहयोग मजबूत करने का प्रयास
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नई दिल्ली, भविष्य की नौसैनिक चुनौतियों के लिए तैयार रहने व उन्हें दिशा के लिए भारत और ब्रिटेन ने मिलकर कदम बढ़ाए हैं। इस सिलसिले में दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच 17वीं कार्यकारी संचालन समूह की बैठक नई दिल्ली में आयोजित की गई। यह समुद्र में सहयोग को और मजबूत बनाने का भी एक बड़ा प्रयास है। इस बैठक में मौजूदा सहयोग को अधिक प्रभावी बनाने और नए क्षेत्रों में साझेदारी बढ़ाने पर जोर दिया गया।

बैठक की सह-अध्यक्षता भारतीय नौसेना के सहायक नौसेना प्रमुख रियर एडमिरल सचिन सिक्वेरा और ब्रिटेन की रॉयल नेवी के रणनीति एवं नीति निदेशक मेजर जनरल पॉल मेनार्ड ने की। बैठक में दोनों नौसेनाओं के बीच ऑपरेशनल सहयोग बढ़ाने और व्यावहारिक स्तर पर साझा गतिविधियों को विस्तार देने पर चर्चा हुई। साथ ही, उभरती प्रौद्योगिकियों, भविष्य की युद्ध संबंधी अवधारणाओं और नई सैन्य क्षमताओं के विकास में सहयोग के रास्ते तलाशे गए। भारत और ब्रिटेन के बीच लंबे समय से चले आ रहे संबंधों और आपसी विश्वास को आगे बढ़ाते हुए दोनों पक्षों ने बदलती जरूरतों के अनुरूप सहयोग के नए अवसरों की पहचान पर फोकस किया।

बैठक का उद्देश्य दोनों नौसेनाओं के बीच तालमेल को और मजबूत करना तथा भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए साझा क्षमताओं को विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ना रहा। गौरतलब है कि जहां एक ओर दोनों देशों के बीच यह महत्वपूर्ण वार्ता हुई, वहीं इसी दौरान ब्रिटेन के समुद्र में आईएनएस त्रिशूल भारतीय नौसेना की ताकत के प्रतीक के रूप में मौजूद रहा। यहां भारतीय नौसेना व ब्रिटेन की रॉयल नेवी ने साथ मिलकर एक युद्धाभ्यास को अंजाम दिया है। इस दौरान समुद्र में तालमेल, आसमान में हवाई गतिविधियां और पानी के नीचे पनडुब्बियों से निपटने का अभ्यास किया गया।

भारत और ब्रिटेन की नौसेनाओं ने संयुक्त युद्धाभ्यास ‘कोंकण-26’ के तहत अपनी इन ऑपरेशनल क्षमताओं को परखा है। इस अभ्यास के लिए भारतीय नौसेना का गाइडेड मिसाइल से लैस युद्धपोत आईएनएस त्रिशूल 8 अक्टूबर को ब्रिटेन के प्लायमाउथ बंदरगाह पहुंचा था। यहां 15 अक्टूबर तक ब्रिटेन की रॉयल नेवी के साथ यह युद्धाभ्यास किया गया। दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच यह वार्षिक अभ्यास दो दशक से अधिक समय से जारी समुद्री साझेदारी का अहम हिस्सा है। समय के साथ इसका दायरा और जटिलता बढ़ी है। अब इसमें ऐसी गतिविधियां भी शामिल हैं, जिनमें दोनों नौसेनाओं को अलग-अलग समुद्री परिस्थितियों में मिलकर काम करना होता है।

इस नौसैनिक अभ्यास में दोनों नौसेनाओं के बीच बंदरगाह से समुद्र तक बेहतरीन तालमेल दिखा है। 'कोंकण-26' दो चरणों में आयोजित किया गया। पहले चरण में बंदरगाह पर दोनों नौसेनाओं के कर्मियों ने पेशेवर अनुभव साझा किए। उन्होंने एक-दूसरे के युद्धपोतों का दौरा किया। खेल और सांस्कृतिक गतिविधियां भी आयोजित की गईं। इस दौरान आईएनएस त्रिशूल को आगंतुकों के लिए खोला गया।


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