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US Midterm Election 2026: ट्रंप ने दी वीटो की धमकी, बोले- डेमोक्रेट्स को समझौते के लिए मजबूर कर दूंगा

ट्रंप ने कैलिफोर्निया की चुनाव प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में 20 हजार फर्जी मतदाता तैयार किए गए और वहां बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुई हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि फर्जी मतदाताओं की संख्या लाखों में हो सकती है।

US Midterm Election 2026: ट्रंप ने दी वीटो की धमकी, बोले- डेमोक्रेट्स को समझौते के लिए मजबूर कर दूंगा
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वॉशिंगटन: अमेरिका में मध्यावधि चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज होने के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ संकेत दिया है कि अगर रिपब्लिकन पार्टी कांग्रेस में अपना बहुमत खो देती है, तो वह अपने वीटो अधिकार का इस्तेमाल करने से पीछे नहीं हटेंगे। ट्रंप का दावा है कि इस स्थिति में डेमोक्रेटिक पार्टी के नेताओं को उनके साथ बातचीत करने और समझौते की मेज पर आने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस में सत्ता का बंटवारा होने से उनकी सरकार की प्राथमिकताओं पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा। इसके साथ ही उन्होंने राजनीतिक टकराव के कारण अमेरिकी अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचने की आशंकाओं को भी खारिज कर दिया।

बहुमत खोने पर वीटो का इस्तेमाल करेंगे राष्ट्रपति

फ्लोरिडा में चुनावी रैली के लिए रवाना होने से पहले व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने रिपब्लिकन पार्टी की जीत का भरोसा जताया। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि डेमोक्रेट्स कांग्रेस में बहुमत हासिल कर लेते हैं, तो वह अपने संवैधानिक अधिकारों का इस्तेमाल करेंगे। ट्रंप ने कहा, “मैं हर चीज पर वीटो लगा दूंगा। तब डेमोक्रेट मेरे पास आएंगे और समझौता करेंगे।” उनके बयान से संकेत मिलता है कि यदि कांग्रेस में रिपब्लिकन पार्टी की स्थिति कमजोर होती है, तो राष्ट्रपति और विपक्ष के बीच विधायी मुद्दों पर टकराव बढ़ सकता है। अमेरिकी व्यवस्था में राष्ट्रपति को कांग्रेस से पारित विधेयकों पर वीटो लगाने का अधिकार प्राप्त है। हालांकि, कुछ परिस्थितियों में कांग्रेस दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत से राष्ट्रपति के वीटो को पलट सकती है। ऐसे में ट्रंप की रणनीति की सफलता कांग्रेस में दोनों दलों की वास्तविक संख्या और राजनीतिक समीकरणों पर निर्भर करेगी।

चुनाव प्रचार को लेकर उठे सवालों पर ट्रंप का जवाब

ट्रंप ने वॉल स्ट्रीट जर्नल की उस रिपोर्ट को भी खारिज किया, जिसमें उनके आक्रामक चुनाव प्रचार के कारण मतदाताओं में नाराजगी बढ़ने और रिपब्लिकन उम्मीदवारों को नुकसान पहुंचने की आशंका जताई गई थी। रिपोर्ट के लेखक और रिपब्लिकन पार्टी के पूर्व रणनीतिकार कार्ल रोव पर निशाना साधते हुए ट्रंप ने उन्हें ‘लूजर’ कहा। उन्होंने दावा किया कि उनकी चुनावी रैलियों में बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं और इससे देशभर में रिपब्लिकन उम्मीदवारों को फायदा मिल रहा है। ट्रंप के मुताबिक, उनके समर्थकों का उत्साह इस बात का संकेत है कि पार्टी चुनाव में बेहतर प्रदर्शन करेगी। हालांकि, रैलियों में जुटने वाली भीड़ को चुनावी नतीजों का निश्चित संकेत नहीं माना जा सकता। मतदाताओं की प्राथमिकताएं, स्थानीय मुद्दे और उम्मीदवारों का प्रदर्शन भी मध्यावधि चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

इल्हान उमर के नाम को लेकर विवाद

ट्रंप ने डेमोक्रेटिक सांसद इल्हान उमर से इस्तीफा देने की मांग भी की। उन्होंने फॉक्स न्यूज की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया कि उमर का असली नाम इल्हान नूर सईद एल्मी है। हालांकि, इल्हान उमर के कार्यालय ने इस दावे को खारिज कर दिया। उनके कार्यालय की ओर से कहा गया कि यह जानकारी पूरी तरह गलत है और उनका असली नाम इल्हान उमर ही है। इस मुद्दे पर ट्रंप की टिप्पणी ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है। अमेरिकी राजनीति में आव्रजन, नागरिकता और नेताओं की व्यक्तिगत पृष्ठभूमि पहले भी विवाद के विषय रहे हैं। ऐसे मामलों में किसी दावे की विश्वसनीयता का आकलन उपलब्ध प्रमाणों और संबंधित पक्षों के आधिकारिक बयानों के आधार पर किया जाना जरूरी है।

कैलिफोर्निया में चुनावी गड़बड़ी का आरोप

ट्रंप ने कैलिफोर्निया की चुनाव प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में 20 हजार फर्जी मतदाता तैयार किए गए और वहां बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुई हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि फर्जी मतदाताओं की संख्या लाखों में हो सकती है। इसके अलावा, ट्रंप ने मिनेसोटा और कुछ अन्य राज्यों की चुनाव प्रक्रियाओं को लेकर भी संदेह जताया। हालांकि, इन आरोपों के समर्थन में उन्होंने पत्रकारों के सामने कोई प्रमाण पेश नहीं किया। चुनाव संबंधी आरोपों की पुष्टि के लिए मतदाता सूची, आधिकारिक जांच और संबंधित चुनाव अधिकारियों के निष्कर्ष महत्वपूर्ण होते हैं। इसलिए इन दावों को प्रमाणित तथ्य के बजाय ट्रंप के आरोपों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

मध्यावधि चुनाव से तय होगी राजनीतिक ताकत

अमेरिकी मध्यावधि चुनाव में कांग्रेस के सदनों का नियंत्रण राष्ट्रपति की नीतियों को लागू करने की क्षमता पर असर डाल सकता है। यदि रिपब्लिकन बहुमत बनाए रखते हैं, तो ट्रंप के लिए विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाना अपेक्षाकृत आसान हो सकता है। वहीं, डेमोक्रेट्स के बहुमत में आने पर बजट, सरकारी खर्च और अन्य प्रमुख विधेयकों पर टकराव बढ़ने की आशंका रहेगी। ट्रंप ने फिलहाल जीत का भरोसा जताया है, लेकिन उनके बयानों से स्पष्ट है कि संभावित विभाजित सरकार की स्थिति में भी वह अपनी राजनीतिक रणनीति को लेकर आक्रामक रुख बनाए रखना चाहते हैं।


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