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यूएन महासचिव के चुनाव पर चर्चा

संयुक्त राष्ट्र, संयुक्त राष्ट्र के अगले महासचिव के चुनाव का मुद्दा अब संयुक्त राष्ट्र महासभा की बहस में भी सामने आ गया है। कई देशों के नेताओं ने यूएन के लिए ज्यादा मजबूत नेतृत्व की मांग की है। वहीं, बहामास ने कैरेबियाई क्षेत्र की एक महिला राजनयिक का समर्थन किया है, जो चुने जाने पर संयुक्त राष्ट्र की पहली महिला महासचिव बन सकती हैं।

यूएन महासचिव के चुनाव पर चर्चा
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संयुक्त राष्ट्र, संयुक्त राष्ट्र के अगले महासचिव के चुनाव का मुद्दा अब संयुक्त राष्ट्र महासभा की बहस में भी सामने आ गया है। कई देशों के नेताओं ने यूएन के लिए ज्यादा मजबूत नेतृत्व की मांग की है। वहीं, बहामास ने कैरेबियाई क्षेत्र की एक महिला राजनयिक का समर्थन किया है, जो चुने जाने पर संयुक्त राष्ट्र की पहली महिला महासचिव बन सकती हैं।

बहामास के प्रधानमंत्री फिलिप डेविस ने इस पद के लिए संयुक्त राष्ट्र में गुयाना की राजदूत कैरोलिन रोड्रिग्स-बिर्केट का समर्थन किया।

उन्होंने इस बात की ओर ध्यान दिलाया कि संयुक्त राष्ट्र की स्थापना के बाद से अब तक हुए सभी नौ महासचिव पुरुष रहे हैं।

इसके अलावा कैरेबियाई क्षेत्र से भी अब तक कोई व्यक्ति यूएन महासचिव नहीं बना है।

रोड्रिग्स-बिर्केट को गुयाना ने औपचारिक रूप से उम्मीदवार बनाया है। उन्होंने जून में संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों के साथ एक इंटरैक्टिव बातचीत में भी हिस्सा लिया था।

अगले महासचिव को ऐसे समय संयुक्त राष्ट्र की कमान मिलेगी, जब संगठन यूरोप, मध्य पूर्व और अफ्रीका में युद्धों, आर्थिक दबाव, बड़ी शक्तियों की आपसी प्रतिस्पर्धा और सुरक्षा परिषद की प्रभावी तरीके से काम करने की क्षमता पर उठते सवालों का सामना कर रहा है।

कई नेताओं ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने संबोधन के दौरान बताया कि वे आने वाले महासचिव से किस तरह के नेतृत्व और प्राथमिकताओं की उम्मीद करते हैं।

चेक गणराज्य के राष्ट्रपति पेट्र पावेल ने कहा कि एंटोनियो गुटेरेस के उत्तराधिकारी के सामने सबसे बड़ी जिम्मेदारी संयुक्त राष्ट्र को बढ़ती भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा और दुनिया में बढ़ते बंटवारे के मुताबिक ढालने की होगी।

पावेल ने कहा, "कूटनीति की सबसे ज्यादा जरूरत दोस्तों के बीच नहीं, बल्कि विरोधियों के बीच होती है।"

उन्होंने कहा कि जब किसी मुद्दे पर सहमति बनना बहुत मुश्किल दिखाई दे, तब भी बातचीत के मंच के रूप में संयुक्त राष्ट्र की भूमिका बेहद जरूरी बनी रहती है। जर्मनी ने कहा कि अगले महासचिव को संयुक्त राष्ट्र में बड़े स्तर पर सुधार की अगुवाई करनी होगी।

उसने कहा कि देश यूएन से जितनी उम्मीदें रखते हैं और उसे काम करने के लिए जितने संसाधन तथा अधिकार देते हैं, उनके बीच मौजूद अंतर को भी खत्म करना होगा।

जर्मनी के विदेश मंत्री जोहान वाडेफुल ने कहा कि सही तरीके से काम करने वाले संयुक्त राष्ट्र को सिर्फ संघर्षों को संभालना नहीं चाहिए, बल्कि उनका समाधान निकालने में भी मदद करनी चाहिए।

चीन ने कहा कि अगले यूएन महासचिव को संयुक्त राष्ट्र चार्टर की रक्षा करनी चाहिए और अपने काम में स्वतंत्रता तथा ईमानदारी दिखानी चाहिए।

चीन के उपराष्ट्रपति हान झेंग ने कहा कि बीजिंग ऐसा महासचिव चाहता है जो 'संयुक्त राष्ट्र चार्टर का सम्मान करे, जिसके पास बेहतरीन क्षमता हो, जो ईमानदारी और निष्पक्षता बनाए रखे और साहस तथा समर्पण के साथ काम करे।'

चीन ने कहा कि यूएन में सुधार का मकसद सिर्फ बजट और जिम्मेदारियां कम करना नहीं होना चाहिए। उसके मुताबिक, सुधारों से संयुक्त राष्ट्र को मजबूत किया जाना चाहिए और ग्लोबल साउथ की आवाज और भागीदारी बढ़नी चाहिए।

अमेरिका ने इस मुद्दे पर काफी अलग सोच सामने रखी। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि उनके प्रशासन ने 'संयुक्त राष्ट्र के इतिहास में सबसे बड़े सुधारों' को लागू करने में मदद की है। इनमें बजट में कटौती और हजारों पदों को खत्म करना शामिल है।

ट्रंप ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र में 'बहुत बड़ी संभावनाएं' हैं, लेकिन संगठन को ऐसे अंतरराष्ट्रीय अधिकारियों की नीतियों को आगे बढ़ाना बंद करना चाहिए, जिन्हें लोगों ने चुना नहीं है।

ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा ने कहा कि संघर्षों को रोकने या उनका समाधान निकालने में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की नाकामी के कारण यूएन की विश्वसनीयता काफी नीचे चली गई है।

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने भी संस्थागत सुधार की मांग की। उन्होंने कहा कि दुनिया के सामने विकल्प है कि वह अंतरराष्ट्रीय नियमों वाली व्यवस्था को मजबूत करे या फिर 'जंगल के कानून' की ओर वापस लौट जाए।

इन बयानों से साफ हुआ कि अगले महासचिव का चुनाव अब संयुक्त राष्ट्र के भविष्य को लेकर चल रही बड़ी बहस का हिस्सा बन चुका है। कुछ सरकारें चाहती हैं कि युद्ध, जलवायु परिवर्तन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और असमानता जैसी समस्याओं से निपटने के लिए संयुक्त राष्ट्र को ज्यादा ताकत और अधिकार मिलें।

वहीं, कुछ देश चाहते हैं कि यूएन का आकार और उसकी जिम्मेदारियां सीमित हों और अलग-अलग देशों की संप्रभुता तथा अपने फैसले खुद लेने के अधिकार का ज्यादा सम्मान किया जाए।

इस चुनाव में महिला प्रतिनिधित्व भी एक अहम मुद्दा बन गया है। अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के बड़े पदों पर महिलाओं को ज्यादा प्रतिनिधित्व देने की लगातार मांग होती रही है। इसके बावजूद 1945 में संयुक्त राष्ट्र की स्थापना के बाद से आज तक कोई महिला यूएन महासचिव नहीं बनी है।

सुरक्षा परिषद के पांचों स्थायी सदस्य, चीन, फ्रांस, रूस, ब्रिटेन और अमेरिका, किसी उम्मीदवार को रोक सकते हैं। इसलिए किसी उम्मीदवार के चुने जाने के लिए इन पांच बड़ी शक्तियों के बीच सहमति बेहद अहम होती है। मौजूदा महासचिव एंटोनियो गुटेरेस का कार्यकाल 2026 के आखिर में पूरा होना है। उनके उत्तराधिकारी का कार्यकाल 1 जनवरी 2027 से शुरू होगा।


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