नेपाल में विनाशकारी बाढ़, अलर्ट जारी
काठमांडू, गोरखा की चुमानुबरी ग्रामीण नगरपालिका से होकर बहने वाली बूढ़ी गंडकी नदी में अचानक आई बाढ़ से नदी के किनारे के इलाके प्रभावित हुए हैं। रविवार तड़के आई इस बाढ़ से दोभान, घट्टेखोला, जगत और सल्लेरी जैसे इलाकों में नुकसान हुआ है। वहीं चार हाइड्रोप्रोजेक्ट्स को भी नुकसान पहुंचा है।

काठमांडू, गोरखा की चुमानुबरी ग्रामीण नगरपालिका से होकर बहने वाली बूढ़ी गंडकी नदी में अचानक आई बाढ़ से नदी के किनारे के इलाके प्रभावित हुए हैं। रविवार तड़के आई इस बाढ़ से दोभान, घट्टेखोला, जगत और सल्लेरी जैसे इलाकों में नुकसान हुआ है। वहीं चार हाइड्रोप्रोजेक्ट्स को भी नुकसान पहुंचा है। नेपाल के इंडिपेंडेंट पावर प्रोड्युसर्स एसोसिएशन (आईपीपीएएन) यानी स्वतंत्र बिजली उत्पादक संघ ने इसकी जानकारी दी।
इस बाढ़ ने 26 अगस्त को भोटे कोशी और त्रिशूली नदियों में आई विनाशकारी बाढ़ की याद दिला दी, जिसकी चपेट में कई बस्तियां आई थीं और कुछ हिस्सों को बहा ले जाने के साथ ही बूढ़ी गंडकी नदी बेसिन और उसकी सहायक नदियों में मौजूद हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट साइट्स के पुलों, सड़कों और बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाया था।
रविवार को आई बाढ़ को लेकर नेपाल में प्राइवेट सेक्टर के पावर डेवलपर्स संघ, (आईपीपीएएन) ने एक बयान में कहा कि बूढ़ी गंडकी नदी और उसकी सहायक नदियों पर बने चार हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट प्रभावित हुए हैं, जिनकी कुल क्षमता 412.09 एमडब्ल्यू है।
आईपीपीएएन के अनुसार, 341 एमडब्ल्यू के बूढ़ी गंडकी हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट का मुख्य कैंप एरिया बाढ़ की चपेट में आ गया। प्रोजेक्ट साइट पर मौजूद कुछ निर्माण उपकरण भी बह गए।
आईपीपीएएन ने बताया कि 24.5 एमडब्ल्यू के दोभान खोला हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट के कैंप एरिया में कुछ घर क्षतिग्रस्त हो गए, जबकि प्रोजेक्ट साइट के पास बना बेली ब्रिज बह गया।
बाढ़ ने 30.59 एमडब्ल्यू के यारू खोला हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट पर निर्माण कार्य में मदद करने वाले बेली ब्रिज को भी नुकसान पहुंचाया, साथ ही निर्माण सामग्री और उपकरण भी बह गए।
आईपीपीएएन के अनुसार, 16 एमडब्ल्यू के माछा खोला हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की साइट तक जाने वाली सड़क और वहां तक जाने वाला पुल भी क्षतिग्रस्त हो गया।
ऐसे समय में जब नेपाल दक्षिण एशिया में हाइड्रोपावर का बड़ा निर्यातक बनने की कोशिश कर रहा है, यह हालिया आपदा देश के स्वच्छ ऊर्जा बुनियादी ढांचे के अचानक आने वाली बाढ़, भूस्खलन और जलवायु से जुड़ी अन्य आपदाओं के प्रति संवेदनशील होने को उजागर करती है।
26 अगस्त को भोटे कोशी और त्रिशूली नदियों में आई विनाशकारी बाढ़ से हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट, सौर ऊर्जा सुविधाओं, बिजली ट्रांसमिशन बुनियादी ढांचे और परिवहन नेटवर्क को भारी नुकसान पहुंचा। ऊर्जा क्षेत्र, खासकर हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट, सबसे बुरी तरह प्रभावित हुए।
विश्व बैंक के 'ग्लोबल रैपिड पोस्ट-डिजास्टर डैमेज एस्टीमेशन' (ग्रेड) के अनुसार, अगस्त की बाढ़ ने 12 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट और एक सौर ऊर्जा प्रोजेक्ट को नुकसान पहुंचाया था, जिनमें 281.1 एमडब्ल्यू की चालू क्षमता और 395.02 एमडब्ल्यू की निर्माणाधीन क्षमता शामिल है।
रिपोर्ट के अनुसार, ट्रांसमिशन लाइनों और सब-स्टेशनों को हुए नुकसान से नेशनल ग्रिड को 149.6 एमडब्ल्यू बिजली की सप्लाई भी बाधित हुई। इससे प्रभावित कुल क्षमता लगभग 430.7 एमडब्ल्यू हो गई, जो जुलाई के मध्य में खत्म हुए वित्त वर्ष 2025-26 के आखिर तक नेपाल की कुल हाइड्रोपावर और सोलर क्षमता का 10.6 प्रतिशत है।
राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, अगस्त में आई आपदा में 1,455 लोग मारे गए, जबकि 5,285 लोग लापता हैं।


