6जी और सैटेलाइट नियमों में चीन से पिछड़ सकता है अमेरिका
वॉशिंगटन, 9 अक्टूबर (आईएएनएस)। अमेरिका के दो सीनेटरों ने चेतावनी दी है कि अगर ट्रंप प्रशासन ने जल्द कदम नहीं उठाए, तो चीन वैश्विक 6जी और सैटेलाइट संचार से जुड़े नियम तय करने में रणनीतिक बढ़त हासिल कर सकता है।

वॉशिंगटन, अमेरिका के दो सीनेटरों ने चेतावनी दी है कि अगर ट्रंप प्रशासन ने जल्द कदम नहीं उठाए, तो चीन वैश्विक 6जी और सैटेलाइट संचार से जुड़े नियम तय करने में रणनीतिक बढ़त हासिल कर सकता है।
उन्होंने कहा कि अगले साल होने वाले एक अहम अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार सम्मेलन के लिए अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख की जल्द नियुक्ति जरूरी है।
एरिजोना से डेमोक्रेटिक सीनेटर रूबेन गैलेगो और इंडियाना से रिपब्लिकन सीनेटर जिम बैंक्स ने विदेश मंत्री मार्को रुबियो से अपील की है कि 30 नवंबर से पहले अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख को नियुक्त किया जाए। 30 नवंबर से बोगोटा (कोलंबिया) में क्षेत्रीय वार्ताएं शुरू होने वाली हैं।
इस सप्ताह जारी एक द्विदलीय पत्र में दोनों सीनेटरों ने कहा कि 2027 का वर्ल्ड रेडियोकम्युनिकेशन कॉन्फ्रेंस (डब्ल्यूआरसी-27) अगली पीढ़ी के वायरलेस नेटवर्क और सैटेलाइट संचार में इस्तेमाल होने वाले रेडियो स्पेक्ट्रम से जुड़े अहम अंतरराष्ट्रीय नियम तय करेगा।
यह सम्मेलन अक्टूबर और नवंबर 2027 में चीन के शंघाई शहर में आयोजित होगा, जिसमें अमेरिका समेत 194 सदस्य देश हिस्सा लेंगे।
सीनेटरों ने कहा कि मेजबान देश होने के नाते चीन बातचीत को अपनी घरेलू तकनीकी कंपनियों, खासकर हुआवेई, के पक्ष में मोड़ने की कोशिश कर सकता है।
उन्होंने पत्र में लिखा, “मेजबान होने के कारण चीन को घरेलू मैदान का फायदा मिलेगा और वह स्पेक्ट्रम तथा तकनीकी मानकों को ऐसी दिशा में ले जाने की कोशिश कर सकता है, जिससे चीनी कम्युनिस्ट पार्टी और उससे जुड़ी कंपनियों, जैसे हुआवेई, के हितों को लाभ पहुंचे।”
दोनों सांसदों का कहना है कि सम्मेलन से काफी पहले अमेरिका को अपने सहयोगी देशों के साथ मिलकर रणनीति और बातचीत की साझा तैयारी करनी होगी।
उन्होंने कहा, “मजबूत अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल और समान सोच वाले सहयोगियों के साथ पहले से किया गया समन्वय, चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के एजेंडे का सबसे प्रभावी जवाब होगा।”
29 सितंबर को लिखे गए इस पत्र में प्रतिनिधिमंडल प्रमुख की नियुक्ति को तत्काल प्राथमिकता बताया गया है।
गैलेगो और बैंक्स ने 2023 के वर्ल्ड रेडियोकम्युनिकेशन कॉन्फ्रेंस की तैयारियों के दौरान आई समस्याओं को दोहराने के खिलाफ चेतावनी दी। उस समय अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख को आखिरी समय में बदल दिया गया था।
सीनेटरों के अनुसार, पूर्व प्रतिनिधिमंडल सदस्यों ने बताया था कि इस बदलाव के कारण अमेरिका का काफी समय बर्बाद हुआ, जो क्षेत्रीय सहयोग और साझेदारियां बनाने में काम आ सकता था। उन्होंने लिखा, “हम डब्ल्यूआरसी-27 में ऐसी ही परिस्थितियों के साथ प्रवेश करने का जोखिम नहीं उठा सकते।”
सांसदों ने कहा कि 6जी से जुड़े फैसले खास तौर पर महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि अगली पीढ़ी की वायरलेस तकनीक के मानक अभी विकसित किए जा रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि हुआवेई के समर्थन वाले प्रस्ताव इन मानकों को प्रभावित कर सकते हैं, इससे पहले कि अमेरिका और उसके साझेदार कोई साझा विकल्प तैयार कर पाएं।
सीनेटरों ने गैर-भूस्थिर सैटेलाइट नेटवर्क के तेजी से विस्तार का भी जिक्र किया। उनका कहना है कि इससे रेडियो स्पेक्ट्रम के अंतरराष्ट्रीय समन्वय की अहमियत और बढ़ गई है। हालांकि उन्होंने प्रशासन द्वारा अब तक उठाए गए कुछ कदमों की सराहना भी की।
नेशनल टेलीकम्युनिकेशंस एंड इंफॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन (एनटीआईए) और फेडरल कम्युनिकेशंस कमीशन पहले ही इंटर-अमेरिकन टेलीकम्युनिकेशन कमीशन (सीआईटीईएल) को अमेरिकी प्रस्ताव सौंप चुके हैं।
अमेरिका अपनी बाकी रणनीतिक स्थितियां 30 नवंबर से बोगोटा में शुरू होने वाली सीआईटीईएल की स्थायी परामर्श समिति-II की अगली बैठक में पेश करने की योजना बना रहा है। गैलेगो और बैंक्स ने मांग की कि उस बैठक से पहले प्रतिनिधिमंडल प्रमुख की नियुक्ति कर दी जाए, ताकि दोनों अमेरिका के आधिकारिक रुख को तैयार करने की प्रक्रिया में हिस्सा ले सकें।
उन्होंने जानकारी मांगी कि अमेरिका अपने अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ मिलकर भरोसेमंद दूरसंचार आपूर्ति श्रृंखलाएं (टेलीकॉम सप्लाई चेन) कैसे विकसित करेगा।
पत्र में खास तौर पर कहा गया है कि ग्लोबल साउथ के देशों के लिए हुआवेई और अन्य चीनी कंपनियों के विकल्प उपलब्ध कराए जाने चाहिए।
दोनों सीनेटरों ने 23 अक्टूबर तक लिखित जवाब या ब्रीफिंग और 2027 की वसंत ऋतु तक चीन के प्रभाव का मुकाबला करने की अमेरिकी रणनीति पर एक ब्रीफिंग की भी मांग की है।
वर्ल्ड रेडियोकम्युनिकेशन कॉन्फ्रेंस का आयोजन अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार संघ करता है, जो संयुक्त राष्ट्र की एक विशेष एजेंसी है। यह संस्था वैश्विक दूरसंचार समन्वय का काम करती है। इसके फैसले तय करते हैं कि विभिन्न देश मोबाइल नेटवर्क, सैटेलाइट और अन्य वायरलेस सेवाओं के लिए रेडियो फ्रीक्वेंसी का इस्तेमाल किस तरह करेंगे।


