ट्रंप-शी के रिश्ते की नई शुरुआत
वाशिंगटन, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और शी जिनपिंग ने सैन्य सम्मान, मेल-मिलाप भरी भाषा और व्हाइट हाउस में डिनर के जरिए दुनिया के सबसे अहम द्विपक्षीय रिश्ते को स्थिर करने की कोशिश की। हालांकि वाशिंगटन में उनका यह दिन प्रतिद्वंद्विता को खत्म करने वाला समझौता नहीं बल्कि उसे संभालने का एक फ्रेमवर्क ही दे पाया।

वाशिंगटन, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और शी जिनपिंग ने सैन्य सम्मान, मेल-मिलाप भरी भाषा और व्हाइट हाउस में डिनर के जरिए दुनिया के सबसे अहम द्विपक्षीय रिश्ते को स्थिर करने की कोशिश की। हालांकि वाशिंगटन में उनका यह दिन प्रतिद्वंद्विता को खत्म करने वाला समझौता नहीं बल्कि उसे संभालने का एक फ्रेमवर्क ही दे पाया।
इस दौरे की सबसे बड़ी उपलब्धि राजनीतिक दिखावा और कूटनीतिक शिष्टाचार रही। ट्रंप ने खुद जॉइंट बेस एंड्रयूज पर शी जिनपिंग का स्वागत किया। रेड कार्पेट, अमेरिकी सैनिकों की मौजूदगी और दो बी-1 बॉम्बर विमानों की उड़ान ने इस स्वागत को भव्यता के साथ-साथ अमेरिकी ताकत का भी प्रदर्शन बना दिया।
अगली सुबह व्हाइट हाउस में फिर औपचारिक स्वागत हुआ। ट्रंप ने उनके रिश्ते को 'आपसी सम्मान और हमारे लोगों के महत्वपूर्ण हितों' पर बनी 'सच्ची महान दोस्ती' बताया। उन्होंने कहा कि उनकी बातचीत में सुरक्षा, टेक्नोलॉजी और 'सुपर इंटेलिजेंस' जैसे मुद्दे शामिल होंगे।
शी जिनपिंग ने जवाब में नियंत्रण और संवाद की भाषा का इस्तेमाल किया। उन्होंने खुलकर बातचीत, सरकारों के बीच ज्यादा संपर्क और नियमित सैन्य संचार का आह्वान किया। शी जिनपिंग ने कहा, "चीन और अमेरिका को हमारे बीच कोई टकराव और कोई संघर्ष न होने की रेखा को बनाए रखना चाहिए।" यही वाक्य इस शिखर वार्ता को उसके औपचारिक दिखावे से बेहतर तरीके से बताता है।
दोनों नेताओं में से किसी ने भी यह नहीं कहा कि एडवांस चिप, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सैन्य शक्ति या एशिया में प्रभाव को लेकर प्रतिस्पर्धा खत्म हो गई है। शी जिनपिंग ने कहा कि प्रतिस्पर्धा 'स्वस्थ' होनी चाहिए और 'दायरे में रहनी चाहिए'।
व्यापार के मोर्चे पर सबसे स्पष्ट नतीजा सामने आया। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा कि नवंबर में खत्म होने जा रहे टैरिफ ट्रूस (व्यापारिक युद्धविराम) को 10 जनवरी तक बढ़ा दिया गया है। इस व्यवस्था के तहत कुछ अमेरिकी टैरिफ निलंबित रहेंगे जबकि चीन अमेरिकी निर्माताओं के लिए जरूरी रेयर-अर्थ मिनरल्स की सप्लाई जारी रखेगा। यह समय खरीदने जैसा है, कोई बड़ा आर्थिक समझौता नहीं। वॉल स्ट्रीट जर्नल ने बैठक से पहले रिपोर्ट किया था कि सेमीकंडक्टर एक्सपोर्ट कंट्रोल जैसे कड़े मुद्दे एजेंडे में नहीं हैं।
एआई पर भी यही पैटर्न दिखा। शी जिनपिंग ने कहा कि दोनों देशों में एआई को अच्छे के लिए विकसित करने की क्षमता और जिम्मेदारी है। अमेरिका ने एआई हॉटलाइन जैसे चैनल पर चर्चा की है लेकिन कोई बाध्यकारी समझौता नहीं हुआ।
ताइवान, ईरान और मानवाधिकार जैसे मुद्दों पर भी कोई नया फॉर्मूला नहीं निकला। ट्रंप के लिए यह शिखर वार्ता कूटनीति को दिखाती है, तो शी जिनपिंग के लिए यह बराबरी के सम्मान का संकेत है। इस दौरान मेलानिया ट्रंप और पेंग लियुआन ने स्मिथसोनियन म्यूजियम का दौरा कर सांस्कृतिक कूटनीति को आगे बढ़ाया।
स्टेट डिनर में अमेरिकी टेक कंपनियों के अधिकारी मौजूद थे। ट्रंप ने शी को बाज की मूर्ति भेंट की। इस मुलाकात से भारत का भी सीधा जुड़ाव है। चीन के साथ सीमा विवाद, क्वाड में भागीदारी और ग्लोबल सप्लाई चेन पर निर्भरता के कारण अमेरिका-चीन रिश्तों का असर भारत की सुरक्षा और अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।
ट्रंप और शी इससे पहले सात बार मिल चुके हैं। यह शी की अमेरिका की दूसरी राजकीय यात्रा और एक दशक से ज्यादा समय में पहली वाशिंगटन यात्रा है।


