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पश्चिम बंगाल: पीडीएस घोटाले में ईडी ने फिर से तलाशी ली, अब तक 49.3 लाख रुपए जब्त

प्रवर्तन निदेशालय के कोलकाता जोनल ऑफिस ने पश्चिम बंगाल में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) की वस्तुओं के बड़े पैमाने पर हेरफेर के खिलाफ अपनी कार्रवाई तेज कर दी है

पश्चिम बंगाल: पीडीएस घोटाले में ईडी ने फिर से तलाशी ली, अब तक 49.3 लाख रुपए जब्त
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कोलकाता। प्रवर्तन निदेशालय के कोलकाता जोनल ऑफिस ने पश्चिम बंगाल में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) की वस्तुओं के बड़े पैमाने पर हेरफेर के खिलाफ अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। इसके तहत कई जगहों पर नए सिरे से तलाशी अभियान चलाए गए हैं।

शनिवार (25 अप्रैल) को एजेंसी ने कोलकाता, हाबरा और बर्दवान में 11 जगहों पर तलाशी ली। ये जगहें निरंजन चंद्र साहा और गेहूं घोटाले में कथित तौर पर शामिल अन्य लोगों से जुड़ी थीं। इन कार्रवाइयों के दौरान 18.4 लाख रुपए नकद, साथ ही बड़ी मात्रा में आपत्तिजनक दस्तावेज़ और डिजिटल सबूत जब्त किए गए।

एजेंसी ने एक प्रेस नोट में बताया कि यह ताजा कार्रवाई इस महीने की शुरुआत में 10 अप्रैल को 17 ठिकानों पर की गई तलाशी के बाद हुई है। इस तलाशी में 30.9 लाख रुपए बरामद हुए थे, जिससे इस जांच में अब तक जब्त की गई कुल नकदी की रकम बढ़कर 49.3 लाख रुपए हो गई है।

यह चल रही जांच, कल्याणकारी गेहूं के अवैध रूप से दूसरी जगह भेजे जाने के संबंध में कस्टम्स के डिप्टी कमिश्नर द्वारा बसीरहाट पुलिस स्टेशन में दर्ज कराई गई एक शुरुआती पुलिस शिकायत से शुरू हुई है। एजेंसी ने बताया कि इस जांच में एक संगठित आपराधिक नेटवर्क का पता चला है, जिसमें निर्यातक, थोक विक्रेता और ट्रांसपोर्टर शामिल हैं, जिन्होंने गरीबों के लिए रखे गए 5 हजार मीट्रिक टन से ज्यादा गेहूं को सुनियोजित तरीके से दूसरी जगह भेज दिया।

धोखाधड़ी को छिपाने के लिए कथित तौर पर आरोपियों ने सरकारी या भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) की मुहर लगे बोरे पलट दिए और उनमें पीडीएस का गेहूं भरकर उन्हें खुले बाजार या बांग्लादेश को निर्यात के लिए वैध माल के तौर पर पेश किया।

जांचकर्ताओं ने पाया कि इस गिरोह ने नकली इनवॉइस और ट्रक के ऐसे दस्तावेजों का इस्तेमाल किया जिनमें जरूरी जानकारी, जैसे कि गाड़ी का सही नंबर या लेन-देन का असली ब्योरा मौजूद नहीं था, ऐसा उन्होंने अपने गैर-कानूनी धंधे को वैध व्यापार जैसा दिखाने के लिए किया।

धान और आटे से जुड़ी पीडीएस की अनियमितताओं की एक अलग लेकिन इसी से जुड़ी जांच में एजेंसी ने गैर-कानूनी पैसों के लेन-देन के एक और भी बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश किया है।

जांच की इस शाखा में यह सामने आया कि चावल मिलों और आटा मिल मालिकों ने अधिकृत वितरकों और सहकारी समितियों के साथ मिलकर मिलीभगत से पैसों का गबन किया, इसके लिए उन्होंने आटे की कम मात्रा की आपूर्ति की और पुराने स्टॉक को नए माल के साथ मिलाकर बेच दिया।

एजेंसी को यह भी पता चला कि धान के भुगतान को किसानों के नाम पर खोले गए फर्जी बैंक खातों में भेजा जा रहा था, ताकि धोखाधड़ी करके न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) का दावा किया जा सके।

इन व्यापक जांच के तहत, एजेंसी ने पहले ही 75 करोड़ रुपए की चल और अचल संपत्तियां जब्त कर ली हैं और नौ लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें बकीबुर रहमान और पूर्व मंत्री ज्योति प्रिया मल्लिक जैसी जानी-मानी हस्तियां भी शामिल हैं।

हालांकि, विशेष अदालत में आरोप-पत्र दायर किए जा चुके हैं, लेकिन एजेंसी ने कहा कि वह अभी भी और सुरागों की तलाश कर रही है, ताकि राज्य की कल्याणकारी योजनाओं के जरिए अपराध से कमाई करने वाले पूरे नेटवर्क को पूरी तरह से खत्म किया जा सके।


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