Top
Begin typing your search above and press return to search.

टीएमसी सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने आई-पैक की भूमिका पर उठाए सवाल, बोलीं-बाहर से आए नेताओं ने पार्टी को नुकसान पहुंचाया

तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने पार्टी संगठन, चुनावी हार, आई-पैक की भूमिका और राज्य की राजनीतिक परिस्थितियों को लेकर खुलकर अपनी राय रखी

टीएमसी सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने आई-पैक की भूमिका पर उठाए सवाल, बोलीं-बाहर से आए नेताओं ने पार्टी को नुकसान पहुंचाया
X

कोलकाता। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने पार्टी संगठन, चुनावी हार, आई-पैक की भूमिका और राज्य की राजनीतिक परिस्थितियों को लेकर खुलकर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि वह पिछले 40 वर्षों से पार्टी के साथ जुड़ी हुई हैं। उन्होंने वह दौर भी देखा है, जब पार्टी सत्ता में नहीं थी और कार्यकर्ताओं को सड़कों पर प्रताड़ित किया जाता था, लेकिन कुछ लोग बाहर से आकर पार्टी को नुकसान पहुंचा गए।

टीएमसी सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए कहा, "उन्होंने पार्टी के कठिन समय में संघर्ष किया और मेहनत के दम पर संगठन को मजबूत बनाने में योगदान दिया। मैं अच्छे समय में पार्टी में नहीं आई थी। जब लोग सड़कों पर पीटे जाते थे, तब भी मैं पार्टी के साथ थी। हमने लंबे संघर्ष के बाद पार्टी को मजबूत किया और करीब 20 साल बाद सत्ता हासिल की।”

उन्होंने इशारों में उन नेताओं और कार्यकर्ताओं पर भी निशाना साधा, जो पार्टी के सत्ता में आने के बाद जुड़े। उनके अनुसार, ऐसे कई लोग केवल व्यक्तिगत लाभ के लिए राजनीति में आए। उन्होंने संगठन को मजबूत करने में कोई विशेष योगदान नहीं दिया।

विधानसभा चुनावों में टीएमसी की हार और चुनावी रणनीति तैयार करने वाली एजेंसी आई-पैक की भूमिका पर काकोली घोष दस्तीदार ने गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि एजेंसी का काम करने का तरीका गलत था और उसके प्रतिनिधियों का व्यवहार पार्टी कार्यकर्ताओं के प्रति अपमानजनक था।

उन्होंने कहा, “हमारे कार्यकर्ता किसी के नौकर नहीं हैं। वे ममता बनर्जी और पार्टी के प्रति प्रेम और विश्वास के कारण काम करते हैं, लेकिन आई-पैक के लोगों ने उनके साथ बुरा व्यवहार किया, जिससे कार्यकर्ताओं में नाराजगी बढ़ी।”

उन्होंने यह भी कहा कि एजेंसी के कुछ सदस्य खुद को बहुत बड़ी सत्ता मानने लगे थे और स्थानीय नेताओं की राय को महत्व नहीं देते थे। उनके अनुसार, चुनाव प्रचार का संचालन करने वाली इस बाहरी एजेंसी के पास जमीनी राजनीति का पर्याप्त अनुभव नहीं था, जबकि पार्टी कार्यकर्ता लंबे समय से चुनावी राजनीति में सक्रिय रहे हैं।

काकोली घोष दस्तीदार ने स्वीकार किया कि कुछ क्षेत्रों में जनता के बीच सरकार के खिलाफ नाराजगी थी। उन्होंने पंचायत और पार्षद स्तर पर भ्रष्टाचार की शिकायतों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि अगर मतदाता नाराज थे, तो उसके पीछे कुछ न कुछ कारण जरूर रहा होगा।

उन्होंने बारासात संसदीय क्षेत्र की एआईटीसी जिला अध्यक्ष पद से अपने इस्तीफे को नैतिक जिम्मेदारी बताते हुए कहा कि सात में से पांच विधानसभा सीटों पर हार के बाद उन्होंने पद छोड़ने का फैसला किया।

टीएमसी सांसद ने कहा कि देश के हर नागरिक की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है। यदि किसी नागरिक को असुरक्षा महसूस होती है या उसकी जमीन छीनने जैसी धमकियां मिलती हैं, तो सरकार का कर्तव्य है कि वह उसकी रक्षा करे।

उन्होंने कहा कि 2026 के चुनावों में चुनाव प्रचार संभालने की जिम्मेदारी एक बाहरी एजेंसी आई-पैक के पास थी। उनके पास चुनाव लड़ने का अनुभव नहीं था, जबकि हमारे पास था, क्योंकि हमने कई चुनाव लड़े हैं। उनके काम करने का आम तरीका ही गलत था और उन्होंने हमारे पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ बुरा बर्ताव किया।

काकोली घोष ने कहा कि कुछ इलाकों में, वोटरों में साफ तौर पर नाराजगी देखी गई। यह नाराजगी हमारी अपनी सरकार के खिलाफ थी और साथ ही एसआईआर को लेकर भी थी, जहां लाखों वोटरों के नाम मनमाने ढंग से काट दिए गए थे। इन सभी बातों के मिले-जुले असर की वजह से ही यह नतीजा सामने आया।


Next Story

Related Stories

All Rights Reserved. Copyright @2019
Share it